Tuesday, December 8, 2009

दिल की बात जाननी है तो पैर देखें

सामने वाले के दिल में आपके लिए प्यार और चाहत है या नहीं, यह जानने के लिए उसकी आंखों की गहराई में उतरने की जरूरत कतई नहीं। आप उसके


पैरों की हरकत देखकर भी हाल-ए-दिल जान सकते हैं। बशर्ते आप इन संकेतों को पकड़ पा रहे हों।

रिसर्च का खुलासा
ब्रिटेन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के सायकॉलजिस्ट प्रफेसर जियोफ्रे बीटी ने पैरों में छिपे इस राज पर से पर्दा हटाया है। जियोफ्रे की मानें तो लोग बात करते समय अपने चेहरे के हावभाव या हाथों की गतिविधि का तो ध्यान रखते हैं पर पैरों पर ध्यान नहीं देते। इससे पैर उनके दिल में चल रहे उतार-चढ़ाव को बयान कर देते हैं। क्या कहती है रिसर्च रिपोर्ट आइए जानें...

- अगर लड़की किसी से प्रभावित हो और हंस रही हो तो उसके पैर शरीर से बाहर और खुले पैरों वाले पोस्चर में दिखेंगे।

- अगर लड़की ने एक के ऊपर एक पैर रखे हों या क्रॉस मुद्रा में हों तो समझिए कि वह आपकी ओर आकर्षित नहीं है।

- हालांकि बॉयज के मामले में ऐसा नहीं है। वे पैरों की मार्फत अपने सेक्सुअल अट्रैक्शन का सिग्नल नहीं देते।

- झूठे लोग अपने पैरों को जरूरत से ज्यादा सीधे खड़े रखते हैं, जबकि नर्वस शख्स अपनी भावनाओं का इजहार पैरों की गतिविधि बढ़ाकर करता है।

- हालांकि महिलाएं इसका उलट करती हैं। यानी नर्वस होने पर भी वे अपने पैर सीधे खड़ी रखती हैं।

- विशिष्ट महिला-पुरुषों में फुट मूवमेंट कम दिखता है क्योंकि बातचीत में वे दूसरों पर हावी होने की कोशिश करते हैं और बातचीत को अपने कंट्रोल में रखना चाहते हैं।

- एक्सट्रोवर्ट (बहिर्मुखी) और घमंडी शख्स भी अपने शारीरिक गतिविधि को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं और फुट मूवमेंट कम करते हैं। जबकि शर्मीले लोगों में मूवमेंट बार-बार देखा जाता है।

सेक्स के 10 फायदे

सेक्स के 10 फायदे
सेक्स ऐसा टॉपिक है जिससे हर कोई अपने आप ही जुड़ जाता है और ज्यादातर लोग जताना भी नहीं चाहते हैं। सेक्स को लेकर कई गलतफहमियां भी मौजूद हैं। लेकिन असल में सेक्स हर लिहाज से फायदेमंद ही साबित होता है। सेक्स से हेल्थ पर काफी असर पड़ता है। देखते हैं कि सेक्स करने के 10 फायदे क्या हैं:-

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी और नॉर्थ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के मुताबिक सेक्स से ऑक्सिटॉसिन हॉर्मोन्स का लेवल बढ़ता है। इस हॉर्मोन से आपसी संबंधों में मजबूती आती है और विश्वास बढ़ता है। इस हॉर्मोन के इस नेचर की वजह से इस ‘ लव हॉर्मोन ’ भी कहा जाता है। ऑक्सिटॉसिन हॉर्मोन से कपल्स में एक दूसरे के प्रति उदारता की भावना भी बढ़ती है।

स्कॉटलैंड के रिसर्चर्स के मुताबिक सेक्स से हेल्थ को सबसे बड़ा फायदा है। इससे एक तो ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है और दूसरे तनाव में कमी आती है। 24 महिलाओं और 22 पुरुषों पर की गई स्टडी में पाया गया कि जो लोग रेगुलर सेक्स करते रहे तनाव के प्रति उनका रिस्पॉन्स बेहतर रहा। एक दूसरी स्टडी के मुताबिक सेक्स करते रहने से ब्लड प्रेशर को काबू करने में सहायता मिलती है।

बेहतर सेक्स हेल्थ का सीधा असर फिजिकल हेल्थ पर पड़ता है। विल्किस यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स के मुताबिक हफ्ते में एक या दो बार सेक्स करने से इम्यूनोग्लॉबिन नाम के एंटीबॉडी में बढ़ोतरी होती है। 112 स्टूडंट्स पर किए गए रिसर्च से पता चला कि इस एंटीबॉडी से सर्दी जैसे इन्फेक्शन को रोकने में मदद मिलती है।

एक पुराना भ्रम है कि सेक्स करने से ज्यादा उम्र के लोगों को हार्ट अटैक का खतरा होता है। लेकिन इंग्लैंड के रिसर्चर्स के मुताबिक यह सिर्फ भ्रम ही है इसमें कोई सच्चाई नहीं है। एपिडिमियॉलजी ऐंड कम्यूनिटी हेल्थ के जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 914 पुरुषों में किए गए रिसर्च से पता चला कि सेक्स के दौरान उन्हें आए हार्ट अटैक का उससे कोई लेना देना नहीं है।

टैक्सस यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के मुताबिक सेक्स करने के आत्मसम्मान में बढ़ोतरी होती है। कैंब्रिज में सेक्स थेरेपिस्ट जीना ऑगदेन का कहती हैं , ‘ बेहतर सेक्स आत्मसम्मान से शुरू होता है और यह आत्मसम्मान को बढ़ाता भी है। ‘ उनके मुताबिक जिनके अंदर आत्मसम्मान पहले से ही होता है उन्हें सेक्स के बाद अलग किस्म की खुशी महसूस होती है। काफी लोग ऐसे हैं जो अच्छा महसूस करने के लिए सेक्स करते हैं।

सेक्स से मोटापा घटाने में भी मदद मिलती है। आधे घंटे के सेक्स से 85 कैलरीज़ बर्न होती हैं। हालांकि 85 कैलरीज़ ज्यादा नजर नहीं आती हैं। लेकिन सोचिए आधे घंटे के 42 सेशन के बाद 3570 कैलरीज़ बर्न होंगी , इतनी कैलरीज़ के बर्न होने से एक पाउंड वजन कम हो जाएगा। अमेरिकन असोसिएशन ऑफ सेक्शुएलिटी एजुकेटर्स ऐंड थेरेपिस्ट्स के प्रेजिडंट पैटी ब्रिटन के मुताबिक सेक्स से शारीरिक सेहत और मानसिक सेहत दोनों को फायदा होता है।

एक बार ऑक्सिटॉसिन हॉर्मोन घटना शुरू होता है तो एंड्रोफिन हॉर्मोन में बढ़ोतरी होती है जिससे दर्द में कमी आती है। इसलिए अगर सेक्स के बाद आपको आपके सिरदर्द में कमी आए या ऑर्थराइटिस का दर्द छूमंतर हो जाए तो चौंकिएगा नहीं। यह सब सेक्स की वजह से है।

एक यूरॉलजी इंटरनैशनल के ब्रिटिश जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सेक्स से पुरुषों में प्रॉस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है। रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग 30 साल से कम उम्र के हैं , सेक्स से उनमें भविष्य में प्रॉस्टेट कैंसर का खतरा कम हो जाता है। जबकि 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में रेगुलर सेक्स से प्रॉस्टेट कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

महिलाओं में अकसर कमर के आसपास के एरिया में दर्द की शिकायत देखी जाती है। इसकी वजह पेल्विक फ्लोर मसल्स का कमजोर होना है। इन मसल्स को मजबूत करने के लिए महिलाएं ‘ कीगल ’ एकसरसाइज़ करती हैं जिससे यह एरिया मजबूत होता है। सेक्स से भी ठीक यही अनुभूति होती है जो कीगल एक्सरसाइज से होती है। और महिलाओं को काफी आराम मिलता है।

एक रिसर्च के मुताबिक सेक्स से बेहतर नींद आती है। दरअसल सेक्स के बाद रिलीज हुए ऑक्सिटॉसिन से एक फायदा यह भी है। और अच्छी नींद से बाकी चीजें भी बेहतर हो जाती हैं। बेहतर नींद से वजन और ब्लड प्रेशर मेनटेन करने में मदद मिलती है।

हफ्ते में 3 बार सेक्स, खुशहाल जिंदगी का राज

हफ्ते में तीन बार सेक्स

करें और अपनी शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाएं। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि यह बात एक नए रिसर्च से सामने आई है। इस रिसर्च में कहा गया है कि अगर आप अपनी शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाना चाहते हैं , तो हफ्ते में तीन बार सेक्स करें और हर दिन 4 बार अपनी बीवी या पति को किस करें। हैपी मैरिज लाइफ के लिए अपनी पत्नी या पति को रोज एक बार आई लव यू कहना भी जरूरी है। इसके अलावा अगर प्रत्येक दिन अपने पार्टनर को कम से कम तीन बार गले लगाते हैं और महीने में दो बार उसके साथ रोमांटिक अंदाज में भोजन करते हैं , तो आपकी मैरिज लाइफ में सिर्फ और सिर्फ खुशी ही होगी दूर तक गम का नामोंनिशां तक नहीं होगा।

इस सर्वे में 3 हजार से ज्यादा शादीशुदा लोगों को शामिल किया गया था और उनसे मैरिज लाइफ के बारे में तमाम सवाल पूछे गए। इस सर्वे में शामिल लोग 31 से 32 साल तक के थे और उनकी शादी कम से कम 3 महीने पुरानी थी। सर्वे के बाद पता चला कि जो लोग हफ्ते में कम से कम तीन बार सेक्स करते हैं और रोज 4 बार किस करते हैं , उनकी मैरिज लाइफ काफी खुशहाल है। रोज कम से कम 1 बार आई लव यू कहने वाले जोड़े की लाइफ काफी स्मूद दिखी।

Friday, October 23, 2009

शर्म के कारण 'असुरक्षित सेक्स'

कॉन्डम की खरीदारी में शर्मिंदगी से असुरक्षित सेक्स को बढ़ावा मिल रहा है। इसका खुलासा हाल ही में किए गए एक सर्वे में किया गया है। सर्व

े में यह बात सामने आई है कि हर 10 में से एक व्यक्ति असुरक्षित सेक्स कर रहा है, क्योंकि कॉन्डम खरीदने में उसे शर्मिंदगी महसूस होती है। यह सर्वे mastersdirect.com द्वारा कराया गया है।

इसके अलावा, करीब 50 फीसदी लोग छोटे-मोटे यौन रोगों के शिकार हैं और वह इलाज के लिए शर्मिंदगी के कारण डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं। सर्वे में यह बात सामने आई है कि इस शर्मिंदगी के कारण लोग अपने सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

इसमें सबसे मजेदार खुलासा यह सामने आया है कि करीब एक तिहाई लोग कॉन्डम जैसे प्रॉडक्ट खरीदने जाते हैं तो शर्मिंदगी से बचने के लिए कुछ और चीजों की खरीदारी कर लेते हैं, जिनकी उनको जरूरत नहीं होती। यानी कॉन्डम के साथ बिना जरूरत के क्रीम और टूथ पेस्ट।

दिमाग के लिए बढ़िया है बिना कॉन्डम के सेक्स!

बिना कॉन्डम सेक्स दिमाग के लिए फायदेमंद है! एक स्टडी तो कुछ यही कहती है। वेस्ट स्कॉटलैंड यूनिवर्सिटी के स्टुअर्ट ब्रॉडी और उनक


े कलीग ने अपनी स्टडी में पाया कि कॉन्डम के बिना सेक्स करना महिला और पुरुष दोनों की मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद है। हालांकि यह दूसरी बात है कि असुरक्षित यौन संबंध से प्रेगनंसी और एड्ज़ जैसी बीमारी का खतरा है।

ब्रॉडी के मुताबिक असुरक्षित यौन संबंध नेचरल प्रोसेस है। इसके कई फायदे हैं। स्टडी में यह बात भी पाई गई कि कॉन्डम से सेक्स करना कुछ लोगों की खराब मानसिक हालत के लिए जिम्मेदार था। रिसर्चर्स ने पुर्तगाल में 99 महिलाओं और 111 पुरुषों के ऊपर यह स्टडी की। ये वे लोग थे जो तनाव से गुजर रहे थे।

ब्रॉडी ने पाया कि जो लोग अनसेफ सेक्स करते हैं, वह तनाव से दूसरों की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से निपटते हैं। यही नहीं उनकी मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहती है।

जितना बड़ा लिंग, उतनी अच्छी सेहत

जिन पुरुषों के लिंग का साइज सामान्य से बड़ा होता है, वे आमतौर पर ज्यादा हेल्दी होते हैं। उनके अंदर आत्मसम्मान भी ज्यादा होता है। यह बात ऑस्ट्रेल


िया की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में हुई एक स्टडी में सामने आई है।

यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पुरुष के लिंग के साइज और शरीर पर रिसर्च की। 'साइंस-अ-गोगो' नामक वेबसाइट पर छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों के लिए लिंग का साइज भी मायने रखता है, लेकिन वे ज्यादा अहमियत इस बात को देते हैं कि उनकी बॉडी शेप बाकी पुरुषों के मुकाबले कैसी है।

प्रमुख रिसर्चर ऐनाबेल चैन के मुताबिक इसे लॉकर रूम सिंड्रोम कहते हैं। चैन बताती हैं कि पुरुषों की बॉडी शेप को लेकर एक अवधारणा बनी हुई है और पुरुष इस बात को लेकर काफी चिंतित रहते हैं कि उनकी बॉडी इस अवधारणा में फिट बैठती है या नहीं। उनके साइज का सेक्शुअल रिलेशन पर क्या असर पड़ता है, इसकी चिंता उन्हें कम होती है।

पुरुषों के लिंग के साइज, बॉडी इमेज और मेंटल हेल्थ आपसी संबंधों पर हुई इस रिसर्च में सामने आया कि जिन पुरुषों के लिंग का साइज बड़ा होता है वे ज्यादा आत्मसम्मान से जीते हैं और वे अपने बॉडी शेप को लेकर भी संतुष्ट होते हैं। इस स्टडी में 40 से ज्यादा देशों के 700 पुरुषों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया। इनकी उम्र 18 से 76 साल के बीच थी।

चैन ने कहा कि यह स्टडी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक महिलाओं की बॉडी शेप पर ही बात होती रही है और पुरुषों के मामले में कोई खास डेटा उपलब्ध नहीं है।

स्टडी में पता चला कि 6 फीसदी लोग अपने बॉडी साइज से संतुष्ट थे जबकि 90 फीसदी लोग और बड़ा साइज चाहते थे। 7 फीसदी लोगों को लगता है कि वे जरूरत से ज्यादा बड़े हैं।

खूबसूरत महिलाएं कराती हैं 'फील गुड'

सुंदरियों का सामना भले ही कइयों को नर्वस कर देता हो, लेकिन ये हुस्न की मलिकाएं जब पुरुषों से बातचीत करती हैं, तो उन्हें 'फील गुड'

होता है।
एक नई रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है। रिसर्चर्स ने पाया कि आकर्षक महिला की मौजूदगी से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में अस्थाई बढ़ोतरी होती है। यह हार्मोन मर्दों की कामुकता से जुड़ा है। इससे कार्टिसोल भी पैदा होता है जो चौकन्नेपन तथा सेहत से जुड़ा है।

स्टडी के मुताबिक पुरुषों के साथ समय बिताने का ठीक उल्टा असर होता है। इससे इन दोनों प्रकार के हार्मोन का स्तर पुरुषों में कम हो जाता है।

मुख्य रिसर्सर्चर डॉ. जेम्स रोने ने कहा कि इस बढ़ोतरी के जंतुओं में भी प्रभाव देखे गए। उनके अनुसार, टेस्टोस्टेरोन और कार्टिसोल दोनों का स्तर उन पुरुषों में बढ़ गया, जिन्होंने महिलाओं से बातचीत की। लेकिन पुरुषों से बात करने पर हार्मोन के स्तर में कमी देखी गई।

बड़ी ठोड़ी वाली महिलाएं बेवफा

माना जाता है कि बड़ी ठोड़ी वाली महिलाएं पुरुषों को कम पसंद आती हैं। क्या इसकी वजह सिर्फ खूबसूरती है ? वैज्ञानिकों


की मानें, तो नहीं। इसकी वजह सिर्फ आकर्षण नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि महिलाओं की उभरी हुई या बड़ी ठोड़ी बताती है कि वे बेवफा हो सकती हैं।

यह नतीजा मनोवैज्ञानिकों की एक टीम ने एक रिसर्च के आधार पर निकाला है। इस टीम ने कुछ महिलाओं का एक ग्रुप बनाया और उनसे सेक्स को लेकर उनकी फैंटसी और व्यवहार के बारे में सवाल किए। उसके बाद कुछ पुरुषों से कहा गया कि इनमें से वे किसे अपनी पार्टनर के तौर पर पसंद करेंगे। पुरुषों को महिलाओं के सेक्शुअल बिहेवियर के बारे में कुछ नहीं बताया गया था
नतीजे हैरतअंगेज थे। पुरुषों ने उन महिलाओं को सबसे कम पसंद किया था, जिनकी ठोड़ी उभरी हुई थी। इन सभी महिलाओं का सेक्शुअल बिहेवियर भी चौंकाने वाला था। छोटी ठोड़ी वाली महिलाओं के मुकाबले ये सेक्शुअली ज्यादा ऐक्टिव थीं।

नॉर्थ अमेरिका की चार यूनिवर्सिटियों के वैज्ञानिकों की टीम ने नतीजा निकाला कि पुरुष उभरी हुई ठोड़ी वाली महिलाओं को कम पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें बेवफाई का डर होता है। दरअसल, उभरी हुई ठोड़ी एक मर्दाना गुण है। इसकी वजह एक मर्दाना हार्मोन टेस्टेस्टेरन है। यह हार्मोन सभी महिलाओं में पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। इसकी ज्यादा मात्रा सेक्शुअली ज्यादा ऐक्टिव बनाती है। पुरुषों को लगता है कि जो महिलाएं रिलेशनशिप से पहले सेक्स के मामले में ज्यादा ऐक्टिव हैं, वे बाद में बेवफा भी हो सकती हैं।

इस नतीजे की मिसाल कई मशहूर हस्तियों में भी देखने को मिलती हैं। मसलन, उभरी हुई ठो़ड़ी वाली डचेस ऑफ कार्नवाल का शादीशुदा होते हुए भी प्रिंस चार्ल्स से अफेयर था। उधर, मशहूर ऐक्ट्रिस जोने वुडवर्ड की छोटी ठोड़ी थी। उन्होंने हॉलिवुड स्टार पॉल न्यूमैन से शादी की और 50 साल तक निभाई। 83 साल की उम्र में न्यूमैन की मौत तक उनके रिश्ते में कभी कोई दिक्कत नहीं आई।

Sunday, September 13, 2009

सेक्स के लिए ठोक-बजाकर पुरुष चुनती हैं महिलाएं

एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है कि महज आनंद के लिए सेक्स करने के वास्ते पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक ठोक


बजा कर चयन करती हैं।

जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित ब्रिटेन की ब्रुनेल यूनिवर्सिटी द्वारा कराए गए मनोवैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक रात बिताने के लिए किसी महिला का चयन करने के मामले में जर्मनी के पुरुष अमेरिकी और इटैलियन पुरुषों की तुलना में अधिक उत्सुक होते हैं।

अध्ययन के दौरान अमेरिका, जर्मनी और इटली में 400 से अधिक छात्रों और इतनी ही संख्या में छात्राओं से इस बारे में सवाल पूछे गए। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि किसी पुरुष या महिला का शारीरिक आकर्षण उसके साथ उसके फ्लैट में जाने या हमबिस्तर होने में क्या भूमिका निभाता है।

रिसर्चर्स ने बताया कि उनसे हल्के बदसूरत, साधारण आकर्षक या बेहद आकर्षक लोगों को रैंकिंग देने को कहा गया। पुरुषों और महिलाओं ने इस बारे में अलग-अलग राय दी।

अध्ययन के दौरान पुरुष साधारण या अपवाद स्वरूप सुंदर महिलाओं को पसंद करते नजर आए। वहीं दूसरी ओर, महिलाओं ने उन पुरुषों के फ्लैट में जाने या उनके साथ हमबिस्तर होने की इच्छा जताई जो बेहद आकर्षक हैं।

चेहरे से ज्यादा ब्रेस्ट पर टिकती हैं पुरुषों की नजरें

पुरुष किसी महिला की खूबसूरती का पैमाना


उसके चेहरे से नहीं बल्कि ब्रेस्ट की खूबसूरती से आंकते हैं। जी हां , यह सच है। हाल ही में किए गए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पुरुष की निगाहें महिलाओं के चेहरे की बजाय सबसे पहले उनके ब्रेस्ट पर टिकती हैं। सिर्फ 20 फीसदी पुरुष ही पहली निगाह में चेहरा देखते हैं।


' डेली मेल ' में छपी एक खबर के मुताबिक न्यू जीलैंड के वेलिंगटन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व वाली एक इंटरनैशनल रिसर्च टीम ने पाया है कि करीब 50 फीसदी पुरुषों की पहली नजर महिलाओं के ब्रेस्ट पर पड़ती है। यही नहीं पुरुष महिलाओं के शरीर के किसी अन्य हिस्से के मुकाबले ज्यादा समय तक ब्रेस्ट ही देखते हैं।

रिसर्च में पाया गया है कि पहली नजर में करीब एक तिहाई कमर और नितंब , जबकि 20 फीसदी से कम लोग चेहरा देखते हैं।

हालांकि , दावा किया गया है कि इसका कारण क्रमानुगत विकास हो सकता है , क्योंकि बड़े ब्रेस्ट और पतली कमर वाली महिलाओं में महिला हॉर्मोन ओस्ट्रोजेन का स्तर ज्यादा होता है और वैसी महिलाओं की प्रजनन क्षमता ज्यादा होती है।

शोध में रिसर्चरों ने एक ही महिला की विभिन्न विषयों पर 6 तस्वीरें पेश कीं , जिनमें आकार को डिजीटल तरीके से बढ़ाया या घटाया जा सकता था। उन्होंने उन हिस्सों को रिकॉर्ड किया जिन्हें पुरुषों ने पहले देखा , कितनी बार देखा और कितने समय तक देखते रहे। यह सब दर्ज करने के लिए उन्होंने 2 कैमरों और मिरर का इस्तेमाल किया , ताकि आंख की गतिविधि को मापा जा सके।

रिसर्चरों ने कहा कि पुरुषों ने ब्रेस्ट देखने में ज्यादा समय लगाया और अन्य हिससे के मुकाबले वहां उनकी नजरें ज्यादा टिकी रहीं।

पति संतुष्ट नहीं कर पाते, क्या करूं?

मैं एक शादीशुदा लड़की हूं।

हमारी
शादी को एक साल हो चुका है। शादी से पहले मैं किसी और लड़के से प्यार करती थी। उससे मेरी शादी नहीं हो पाई। मैंने शादी के बाद अपने पति को बहुत प्यार दिया है। वह भी मुझे बहुत प्यार करते हैं। लेकिन कुछ टेंशन के चलते वह मुझे शादीशुदा जिंदगी का सुख नहीं दे पा रहे हैं।

मैं उनको भरपूर प्यार देती हूं। वह मुझसे संतुष्ट भी हैं। मैंने उनको कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनसे संतुष्ट नहीं हूं। शायद इसी कारण हमारा बच्चा भी नहीं ठहर रहा है। मैं एक वर्किन्ग लेडी हूं। अपने इस आंतरिक तनाव के कारण मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के बारे में सोचने लग जाती हूं। मेरे कई और पुरुष मित्र भी हैं। मैं अपने को उनकी और आकर्षित होता महसूस कर रही हूं। हालांकि मैं यह बिल्कुल नहीं चाहती। समझ नहीं आता कि मैं क्या करूं। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।
सारिका , दिल्ली

हमारी एक रीडर अपनी इस समस्या पर आपसे कुछ सुझाव चाहती हैं। अगर आपके पास कोई सलाह , कोई सुझाव हो तो ज़रूर बताएं। हो सकता है , आपकी एक छोटी - सी सलाह उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दे।

महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं?

महिलाएं पुरुषों के साथ सेक्स


सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी में शांति बनी रहे , या वह बिना वजह के सिरदर्द से बचना चाहती हैं। महिलाओं की लिस्ट में रोमैंस और पेशन की जगह काफी पीछे है। महिलाओं पर हुई एक स्टडी पर बाज़ार में आई किताब तो कुछ ऐसा ही कहती है।

तस्वीरों में : किस्म- किस्म के कामसूत्र

टेक्सस यूनिवर्सिटी में साइकॉलजी के प्रोफेसर्स सिंडी मेस्टन और डेविड बस की लिखी किताब - वाय वुमेन हेव सेक्स ( महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं ? ) में करीब 200 कारणों को हाईलाइट किया गया है। इस किताब के लिए रिसर्च के दौरान एक महिला ने तो यहां तक स्वीकार किया कि वह सेक्स सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उसके पति अपने स्पर्म बाहर निकाल सके।

रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती। रिसर्च के दौरान प्रोफेसर मेस्टन ने 1000 महिलाओं का इंटरव्यू किया , जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के साथ सोने के सैकड़ों कारण बताए।

पहली डेटिंग, तो लड़के क्या करें

डेटिंग का मतलब है एक दूसरे को समझने की कसरत। लेकिन जब आप पहली डेटिंग पर जा रहे हों, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है:




जब बात पहले डेट पर जाने की हो, तो झिझकना एक सामान्य-सी बात है। लेकिन जब बात फर्स्ट इंप्रेशन की हो, तो आपका झिझकना ठीक नहीं। फर्स्ट डेट पर कुछ खासों बातों का खयाल रखना जरूरी होता है, ताकि सामने वाले को आप इंप्रेस कर सके और उसके बारे में काफी कुछ पता कर सकें।

फर्स्ट डेट पर कभी भी उसके पिछले प्यार के बारे में न पूछें। वास्तव में, इसे तो तब तक अवॉइड करना चाहिए, जब तक कि वह खुद इस टॉपिक को नहीं छेड़ती। ऐसा संभव है कि उसका पिछला प्यार दुख पहुंचाने वाला रहा हो या फिर वह अभी भी उसे प्यार कर रही हो। ऐसे में पहले ही दिन का मजा किरकिरा करना ठीक नहीं।

किसी लड़की की रुचियों के बारे में जानने का ट्रिकी फॉर्म्युला यह है कि आप उससे पिछले ट्रैवल डेस्टिनेशन के बारे में बात करें और पूछें कि भविष्य में वह कहां जाना चाहती है। अगर वह ऐसे किसी प्लेस की जानकारी आपको देती है, जहां वह जाना चाहती है तो आप वहां चलने का ऑफर उसे दे सकते हैं। इस टॉपिक पर बातचीत का बड़ा फायदा यह है कि आपको एक-दूसरे के कल्चरल बैकग्राउंड और नए एडवेंचर्स के प्रति खुले नजरिए का पता चल जाएगा।

उससे उसके दोस्तों के बारे में पूछिए। अगर आप उन दोस्तों को नहीं जानते हैं, तब भी वह अपने दोस्तों और उनसे मिलने के बारे में आपको खुशी-खुशी बताएगी। उसके दोस्तों की जानकारी से आप उसके बारे में भी काफी कुछ समझ पाएंगे।

अगर आप पहले डेट पर किसी बार या रेस्तरां में हैं, तो आप यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि खाने-पीने के मामले में उसकी रुचि क्या है। और यह भी कि कहीं वह अल्कोहल तो नहीं लेती।

जब आप बात कर रहे हों, तो करियर और एजुकेशन की बातें क्यों छोड़ी जाएं? ऐसे में एकेडमिक अचीवमेंट और जॉब की बातें आपको उसे समझने और उत्साहित करने में मदद करेंगी।

आप उसकी हॉबिज के बारे में बात कर सकते हैं। वह क्या पसंद करती है? खेल में उसकी कितनी दिलचस्पी है? किस तरह का संगीत पसंद है? इन सवालों के जवाब से आपको यह पता चलेगा कि आपके बीच कितना बेहतर बॉन्ड बन सकता है।

बहरहाल, इन सबके बावजूद एक बात हमेशा याद रखें और वह कि एक ही मुलाकात में आप किसी के बारे में सब कुछ नहीं जान सकते हैं। इसलिए सब्र रखें और कुछ चीजें बाद के दिनों के लिए भी छोड़ दें।

पिल्स का नेगेटिव असर नहीं

ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के बारे में मिथ है कि इनका सेवन रोकने के बाद प्रेग्नेंसी रेट पर गलत प्रभाव पड़ता है। लेकिन इस बारे हुई स्टड

ीज का कुछ और ही मानना है। महिलाओं द्वारा ली जाने वाली कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का उनकी प्रेग्नेंसी रेट पर का कोई असर नहीं पड़ता। दरअसल, किसी भी महिला के प्रेग्नेंसी रेट का इससे कोई लेना-देना नहीं होता कि वह कितने समय तक उसने पिल्स लीं और इस दौरान कौन-से हार्मोन उसके शरीर में गए।

यह तथ्य ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स पर रिसर्च कर रही एक यूरोपीय कंपनी की एक स्टडी में उभर कर सामने आया। यह स्टडी लगभग 60,000 यूरोपीय महिलाओं पर की गई थी। गौरतलब है कि इनमें से 21 फीसदी महिलाएं पिल्स का सेवन बंद करने के एक साइकिल बाद ही प्रेग्नेंट हो गईं। इतना ही नहीं, शेष महिलाओं में तीन साइकिल्स के बाद यह रेट 45.7 तक पहुंच गया। जबकि एक साल यानी 13 साइकिल्स के बाद बची हुई कुल महिलाओं में से 79.4 महिलाएं भी प्रेग्नेंट हो गईं।

साथ ही, रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि पिल्स का सेवन रोकने के बाद हर पांच में से एक महिला, जो कि पहले बारह महीनों में कंसीव नहीं कर पाई, उनमें से 45 फीसदी महिलाओं ने दूसरे साल में कंसीव कर लिया। इस तरह से लगभग 88.3 महिलाएं सफलतापूर्वक मां बनने में कामयाब रहीं।

इसी विषय पर हुए अन्य शोधों में यह बात भी सामने आई है कि लंबे समय तक पिल्स लेने वाली महिलाओं में कम समय के लिए पिल्स लेने वाली महिलाओंकी अपेक्षा प्रेग्नेंसी रेट कम पाया जाता है। लेकिन यहां यह जानना रोचक होगा कि इसकी असली वजह पिल्स का अधिक सेवन नहीं, बल्कि उनकी बढती हुई उम्र होती है। 35 वर्ष से अधिक उम्र व स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में आमतौर पर यह दर कम ही पाई जाती है। इतना ही नहीं, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का प्रेग्नेंसी रेट पर कोई नेगेटिव इफेक्ट नहीं होता।

स्वाइन फ्लू से डरते हैं? तो यह पढिए

इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वाइन फ्लू एक घातक बिमारी है, लेकिन यह भी सच है कि स्वाइन फ्लू का इलाज सम्भव है और थोड़ी सी सावधानी स्वाइन से बचा सकती है. लेकिन दुनिया में कई ऐसी बिमारियाँ हैं जो स्वाइन फ्लू से कहीं घातक है, लेकिन उनकी उतनी चर्चा नहीं होती जितनी स्वाइन फ्लू की होती है.

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार से लगभग 40 बच्चों की मौत हो गई थी लेकिन यह खबर कभी सुर्खी नहीं बन पाई.

और अब एक नई बिमारी का पता चला है जिसे मंकी मलेरिया कहा जाता है. इस बिमारी की वजह से मलेशिया के लोगों की जान के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है. पहले यह माना जाता था कि यह बिमारी सिर्फ बंदरों को ही होती है लेकिन अब इस बिमारी के से इंसानों के ग्रस्त होने के मामले सामने आ रहे हैं. और इस तरह से पाँचवें प्रकार की मलेरिया का उद्भव हुआ है.

दुनिया में मलेरिया से प्रति वर्ष 10 लाख लोगों की मौत होती है. लेकिन अब मलेरिया अफ्रीका और एशिया महाखंड में रहने वाले लोगों के जीवन का एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए इस बात की इतनी चर्चा नहीं होती.

मलेरिया के विभिन्न प्रकारों में से मलेरिया फाल्सीपारम सबसे घातक होता है. लेकिन यह नई किस्म की मलेरिया जिसे पी. नोलेसी कहा गया है भी काफी घातक है.

पी. नोलेसी या जिसे मंकी मलेरिया भी कहा जाता है कि किटाणुँ शरीर में हर 24 घंटें के बाद फिर से पनपते रहते हैं, और इसलिए इसलिए यह रोग काफी घातक साबित हो सकता है.

अभी तक इस रोग से ग्रस्त लोगों के कम मामले ही प्रकाश में आए हैं, परंतु चिकित्सकों का मानना है कि चुँकि इसके लक्षण आप पी. मलेरिया जैसे ही होते हैं इसलिए इसे आम मलेरिया ही समझ लिया जाता है.

क्यों होते हैं सास बहु के झगड़े

यह वर्षों से होता आया है और शायद आगे भविष्य में भी होता रहेगा. हम बात कर रहे हैं सास बहु की लड़ाई की. जी नहीं, यह बालाजी के किसी धारावाहिक से संबंधित लेख नहीं है, परंतु वास्तविक जीवन की एक सच्चाई है. एक ऐसी सच्चाई जिसकी वजह से लाखों वैवाहिक जीवन प्रभावित हैं और अब इसके पीछे की वजह जान ली गई है.

वजह ऐसी नहीं है जो किसी को पता ना हो परंतु इस बार इस बात की पुष्टि की गई है कि आखिर सास और बहु में किसी चीज को लेकर टकराव होता है और क्या इस टकराव को टाला जा सकता है?

अपनी नई पुस्तक में प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. टेरी एप्टर ने लिखा है कि पत्नी अथवा गर्लफ्रेंड भले ही कितना भी चाह ले की वह अपनी सास की तरह बनेगी परंतु उनके मन में एक दुराग्रह होता ही है और वह इससे बाहर नहीं आ पाती.

एप्टर ने आगे लिखा है कि आम तौर पति सास बहु के झगड़े में मूक दर्शक बन जाते हैं जबकि उनको उनके बीच के विवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभानी चाहिए.

अपनी शोध के लिए एप्टर ने 200 लोगों के साक्षात्कार लिए जिनमें से 49 जोड़े थे. शोध से पता चला कि करीब दो तिहाई महिलाओं को शिकायत थी कि उनकी अपनी सास से नहीं बनती. डॉ. एप्टर के अनुसार दोनों महिलाएँ सोचती हैं कि वे एक दूसरे को जानती और समझती हैं पर वास्तविकता कुछ और ही होती है.

डॉ. एप्टर के अनुसार तनाव के अधिकतर मामलों की जड़ मात्र गलतफहमी होती है लेकिन उन गलफहमियो को दूर नहीं किया जाता और इससे तनाव बढता रहता है. दोनों महिलाओं का मूल उद्देश्य अधिपत्य हासिल करना होता है जो इंसान के जिन में है.

Saturday, September 12, 2009

बच्चों के जन्म के बाद प्यार को जीवंत रखने के 5 तरीके


बच्चों के जन्म के बाद की दुनिया अलग ही होती है. कहते हैं बच्चों के जन्म से दाम्पत्य जीवन की नई शुरूआत होती है.

बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.

प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.

साथ में फिल्म देखें:

बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.

साथ में टहलने जाएँ:

यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.

खेल खेलें:

बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.

साथ खाना खाएँ:

यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.

एकांत ढूंढे:

छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.

दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.

अपने अंतरंग जीवन से बोरियत को दूर करें

क्या आपको लग रहा है कि आपका वैवाहिक जीवन निरसता से भर रहा है. तो आप इन कुछ उपायों को आज़मा कर देख सकते हैं. कुछ शीर्ष मनोवैज्ञानिकों ने वैवाहिक जीवन में समरसता बनाए रखने के आसान उपाय बताए हैं:
अपने प्रेम का इज़हार करना सीखें:
कभी कभी छोटी छोटी सी बातें भी बड़ा असर कर जाती है. जब आप ऑफिस में हों तो अपने मोबाइल से अपनी पत्नी के मोबाइल पर छोटा सा एसएमएस कर दें कि आपको उनकी याद आ रही है. इस तरह का प्रेम भरा संदेश जादू कर जाएगा. इस बात को कोई भी समझ सकता है कि ऑफिस के व्यस्तों पलों में किसी को अपने साथी की याद नहीं आती पर फिर भी यह एसएमएस जरूर्र असर दिखाता है.

या फिर कभी कभी एक छोटी सी पर्ची पर “आई लव यू’ जैसा छोटा सा संदेश लिखकर छोड़ दें. इसका भी काफी असर होगा.

पिकनिक पर जाएँ:
पर सिर्फ आप दो और कोई नहीं. यदि आप सयुंक्त परिवार में रहते हैं तो यह थोड़ा सरल हो जाता है क्योंकि आप अपने बच्चों को घर पर आसानी से छोड़कर जा सकते हैं. अन्यथा जब आपके बच्चे छुट्टियों में कहीं गए हुए हों तब यह कार्यक्रम बनाया जा सकता है.

लेकिन इस पिकनिक को मात्र आप दोनों तक सीमित रखें और प्यार का भरपूर आनंद लें.

प्यार भरे उपहार:
उपहार जरूरी नहीं कि महंगे ही हों. एक चॉकलेट भी अपना कमाल दिखा सकती है. परंतु इन छोटे छोटे उपहारों से कुछ पल बेहद हसीन और सुहावने हो जाते हैं.

आपसी समझ:
यह सबसे जरूरी है. आप दोनों में यदि बेहतरीन तालमेल है तो आपके जीवन का हरपल खुशनुमा हो जाता है, क्योंकि दोनों को ही एक दूसरे की कमज़ोरी पता होती है और दृढता भी. आपसी समझ को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ. एक दूसरे के बीच की झिझक को दूर करें, फिर चाहे वह सेक्स संबंधित बातें ही क्यों ना हो. मनोचिकित्सक मनोज शेखावत के अनुसार सेक्स संबंधित बातों का खुलकर आदान प्रदान पति और पत्नी के बीच की झिझक को ना केवल मिटाता बल्कि उन्हें एक दूसरे के करीब भी लाता है.

जानिए क्या है ‘सेक्स” का सही समय


क्या आप जानते हैं सेक्स का सही समय क्या है? बात अजीब लग सकती है लेकिन ब्रिटेन के नागरिकों की बात करें तो रात 10.15 बजे का समय सेक्स के सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि करीब आधे ब्रिटिशर इस समय अपने प्रेमी के साथ अंतरंग क्षण बीता रहे होते हैं.

सेक्स के लिए दूसरा सबसे उपयुक्त समय है
शुक्रवार रात 9 बजे


द डेली एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार कुछ संशोधकों ने करीब 5000 लोगों का सर्वे कर उपरोक्त नतीजा निकाला. लेकिन रात 10.15 का समय ही सेक्स के लिए उपयुक्त क्यों? अधिसंख्य ब्रिटिश पुरूषों का जवाब था – ताकि रात 10.30 बजे फूटबाल की हाईलाइट्स बिना किसी व्यवधान के देखी जा सके!

इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सेक्स के लिए दूसरा सबसे उपयुक्त समय है शुक्रवार रात 9 बजे और तीसरा सबसे उपयुक्त समय है रविवार सुबह 9.30 बजे.

लेकिन क्या अंतरंग क्षणों को पहले से तय समय में बांधा जा सकता है. यह सर्वे कराने वाली साइट के प्रवक्ता का कहना है कि – इस सर्वे से पता चलता है कि प्यार खत्म हो गया है. अब लोग अपनी सुविधा के अनुसार सेक्स करते हैं. आज लोगों की जिंदगी में सेक्स का अधिक महत्व नहीं रह गया है.

Tuesday, September 1, 2009

रिलेशनशिप रहेगी सदा जवां

कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो शादीशुदा जिंदगी को आप आसानी से जवां बनाए रख सकते हैं। आइए देखें कौन सी बातें हैं ये :


सेक्स न भूलें
हमेशा इस बात का ध्यान रखिए कि सेक्स कभी भी आपकी प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर ना हो। इसके लिए आपको पहले से ही यह तय करना होगा कि आपके प्यार करने का वक्त क्या होगा। भले ही यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन सेक्सुअल लाइफ को स्मूद रखने के लिए हैं।

तारीफ करें
अपने पार्टनर को रोजाना किसी न किसी बात के लिए कॉम्प्लिमेंट देते रहें। इससे आपकी रिलेशनशिप को सपोर्ट मिलेगा। साथ ही इससे आपकी उन दिनों की यादें ताजा बनी रहेंगी, जब आप शादी से पहले एक-दूसरे के साथ छिप-छिपकर रोमांटिक वक्त बिताया करते थे।

मददगार बनें
घर का काम किसी भी कपल के बीच झड़प की वजह बन सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप पहले ही अपना काम बांट लें। इससे आप साथ में काम करेंगे और बहस भी नहीं होगी। खास बात यह है कि अगर आप घर के काम में पत्नी की मदद करेंगे, तो उसकी सेक्स इच्छा बढ़ जाएगी। दरअसल, घर का काम महिलाओं की सेक्स इच्छा कम करने की इकलौती वजह है।

स्पेशल बेडरूम
आपका बेडरूम आपके सपनों की दुनिया की तरह होना चाहिए। उसका लुक ऐसा होना चाहिए मानो वह आपको इंवाइट कर रहा हो। इसके लिए आप रूम में सेंट वाली कैंडल्स और अपनी पिक्चर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि बेडरूम में लैपटॉप, टीवी और किसी भी दूसरे काम पर बैन होना चाहिए।

डिस्कस करें
अगर आप अपने किसी फ्यूचर प्लान को लेकर सहमत नहीं हैं, तो इस पर डिस्कशन किया जा सकता है। ध्यान रहे कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने से बात बिगड़ सकती है। इसलिए आपसी प्रॉब्लम्स को प्यार से ही सुलझाने की कोशिश करें।

रोमांस विद डांस
कभी-कभी लाइट म्यूजिक पर डांस करना आपको फिर से पुराने दिनों की याद दिला सकता है। साथ में डांस करने से आपके दिमाग के साथ बॉडी का भी मिलन होता है। इस तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज से बॉडी में डोपेमाइन रिलीज होता है और खुशियों में बढ़ोतरी होती है। इसका असर आपको बेडरूम में देखने को मिलेगा।

वह क्या है जो विवाह को टिकाए रखता है?


क्या प्यार विवाह का सबसे महत्वपूर्ण अंग है? क्या प्यार की वजह से ही विवाह लम्बे समय तक टिकते हैं? यदि ऑस्ट्रेलिया में करवाए गए एक सर्वे के नतीजों पर गौर करें तो ऐसा नहीं है. इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि विवाह को बचाए रखने में प्यार का वस्तुत: कोई योगदान नहीं होता, वरन जो चीजें विवाह संबंध बनाए रखने में कारगर साबित होती हैं वे हैं उम्र, पहले के संबंध और धुम्रपान और शराब पीने जैसी आदतें.

यह शोध ऑस्ट्रेलिया नेशनल विश्वविद्यालय के संशोधकों ने की और इसके लिए 6 साल तक 2500 विवाहित अथवा एक साथ रह रहे जोड़ों के ऊपर नज़र रखी गई. इस संशोधन से पता चला कि वह एक चीज जो तय करती है कि जोड़े साथ में रहेंगे कि नहीं वह है – पैसे.

एक ऑस्ट्रेलियन अखबार की खबर के अनुसार एक सर्वे से जुड़े संशोधकों ने यह भी पाया कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाले कुल विवाह या लीव-इन-रिलेशनशिप के ¼ केस 6 साल के भीतर टूट जाते हैं. 25 वर्ष आते आते लगभग आधी शादियाँ टूट जाते है.

शोध में यह भी पाया गया कि यदि कोई पति अपनी पत्नी से 9 साल या अधिक बड़ा हो अथवा यदि किसी पुरूष ने 25 वर्ष आयु से पहले शादी की हो तो उनकी शादी टूटने के आसार दूगने अधिक होते हैं. इसके अलावा यदि किसी महिला को बच्चे प्राप्त करने की तीव्र आकांक्षा हो तो भी शादी अधिक नहीं टिकती.

यह शोध ऑस्ट्रेलिया के समाज के ऊपर आधारित है और पूरे विश्व की सोच को परिलिक्षित नहीं करता है. विशेषरूप से भारत जैसे देश की संस्कृति ऑस्ट्रेलिया की संस्कृति से काफी अलग है. इसलिए इन नतीजों को भारत के ऊपर भी लागू नहीं किया जा सकता.

स्वाइन फ्लू से शिशु को बचाएँ – स्तनपान कराएँ


क्या स्वाइन फ्लू से ग्रस्त माता को अपने शिशु को स्तनपान कराना चाहिए? जवाब है हाँ. और इसके पीछे की मूल वजह यह है कि यदि माता को स्वाइन फ्लू है तो बहुत सम्भव है कि उसके शिशु को भी यह बिमारी लग चुकी होगी चाहे वह उसे स्तनपान कराए या नहीं.

ब्रैस्टफीडिंग प्रोमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया और वर्ल्ड एलायंस फोर ब्रैस्टफीडिंग एक्शन ने स्वाइन फ्लू से ग्रस्त माता द्वारा स्तनपान कराए जाने का समर्थन किया है.

स्तनपान शिशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है. माता के दूध की वजह से शिशु का शरीर इस तरह के इंफैक्शन से लड़ने के लिए ताकत हासिल करता है. इसलिए इंफ्लूएंजा जैसी बिमारियों से बचाव के लिए स्तनपान कराना अतिआवश्यक है.

यदि माँ के शरीर में किसी खास बिमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता ना हो तो भी उसके दूध से शिशु वह क्षमता प्राप्त कर सकता है.

चिकित्सकों का तो यहाँ तक कहना है कि स्वाइन फ्लू के फैलाव के दौरान माता को स्तनपान कराने की मात्रा बढा देनी चाहिए.

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए शिशु के आसपास का वातावरण स्वच्छ रखना चाहिए और अपने हाथों को लगातार धोते रहना चाहिए. यह ध्यान रहे कि कम से कम लोग शिशु के पास जाए और जो भी उसे हाथ लगाए उसके हाथ धुले हुए हों.