Thursday, May 28, 2009

बुद्धिमान महिलाओं का सेक्स जीवन अधिक सुखद होता है!

लंडन की किंग्स कॉलेज की शोध टीम के अनुसार भावनात्मक रूप से मजबूत महिलाएँ बुद्धिमान होती हैं और वे अपनी तथा अपने मित्र की भावनाओं का अच्छी तरह से ख्याल रख सकती हैं, इसलिए उनका सेक्स जीवन भी सुखद होता है.

इस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर टिम स्पेक्टर के अनुसार – “यह शोध दर्शाती है कि भावनात्मक चातुर्य (emotional intelligence) की वजह से हमें जीवन के हर स्तर पर कामयाबी मिलती है और इसमें शयनकक्ष भी शामिल है.”

अपनी शोध के लिए इनकी टीम ने कुल 2035 महिलाओं का अध्ययन किया जिनकी उम्र 18 साल से लेकर 83 साल तक थी. इनमें जुडवा बहनों को अधिक प्राथमिकता दी गई ताकि जेनेटिक तथा अन्य कारणों से प्राप्त होने वाले भेद की सम्भावना कम से कम हो.

इन महिलाओं से इनके सेक्स जीवन के संबंध में सवाल पूछे गए तथा कुछ सवाल उनके भावनात्मक चातुर्य (emotional intelligence) स्तर की जाँच करने के लिए पूछे गए. इस शोध के नतीजों से पता चला कि जिन महिलाओं में emotional intelligence स्तर 25% से भी कम था उनका सेक्स जीवन निराशाजनक था और उन्हें सेक्स से आनंद प्राप्त नहीं होता था. लेकिन जिन महिलाओं का emotional intelligence स्तर अच्छा था उनका सेक्स जीवन भी अच्छा था.

किंग्स कॉलेज की डॉ. एंड्रिया बरी के अनुसार – “जिन महिलाओं का emotional intelligence स्तर अच्छा होता है, उन्हें अपनी रूचि और खुशी के अनुसार मांग करना आता है. वे अपने मित्र से आग्रह कर पाती हैं और उन्हे पता होता है कि उन्हें क्या चाहिए. इसलिए उनका सेक्स जीवन भी सुखद होता है.”

इस शोध के बारे में जानकारी जरनल ऑफ सेक्सुअल मेडिसीन में दी गई है.

गर्मियों में सेक्स: “ठंडे” आनंद के 4 तरीके

चिलचिलाती धूप, उमस और गर्मी सेक्स जीवन को प्रभावित तो करती है. चिलचिलाती धूप में काम करने के बाद शाम तक शरीर की
लगभग सारी ऊर्जा उत्सर्जित हो जाती है और इसके बाद सेक्स का आनंद उठाने की क्षमता ही नहीं रहती. लेकिन कुछ ऐसे तरीके भी हैं जिससे आप गर्मियों के इस मौसम में भी सेक्स का आनंद उठा सकते हैं.

बर्फिला अहसास:
अपने साथी के साथ बर्फ से खेलना काफी मनोरंजक हो सकता है. इससे गर्मी से राहत भी मिलेगी और साथ ही साथ फोरप्ले के दौरान कुछ नया करने का अवसर भी मिलेगा. अपनी फ्रिज में रखी आइस ट्रे में से कुछ आइस क्यूब निकाल लें और उनका भरपूर इस्तेमाल करें.

आप कोई खेल भी खेल सकते हैं या फिर अपने हाथ में कुछ क्यूब लेकर अपने साथी को उसका अहसास करा सकते हैं. या फिर और भी कुछ नया सोच सकते हैं, जो आपको तथा आपके साथी को पसंद आए. परंतु ध्यान रखें कि कहीं आपके जोश से आपके साथी को चोट ना पहुँचे.

फलों की महफिल:
गर्मियों में फल, जेली तथा क्रिम काफी स्वादिष्ट लगते हैं. और आप इनका कुछ अन्य तरीकों से इस्तेमाल भी कर सकते हैं. बस अपनी फ्रिज से स्ट्राबेरी या अन्य कोई फल निकाल लीजिए, अथवा तो जेली और क्रिम भी ले सकते हैं और उनका क्या और कैसे इस्तेमाल करना है, यह तो आप दोनों पर निर्भर है. परंतु तरीका मजेदार है.

गर्मियों में बरसात:
वह कैसे? सीधी सी बात है. आपके स्नानघर में लगा शावर आपके काफी काम आ सकता है. बस कल्पना कीजिए कि आप अपने साथी के साथ किसी घने जंगल में हैं और बरसात आ गई. इस कल्पना को और भी रंगीन बनाने में आपका शावर आपकी पूरी मदद करेगा.

बीच पर:
इन गर्मियों में आप किसी बीच रिसार्ट पर छुट्टियाँ मनाने जा सकते हैं. सुबह जल्दी उठे और बीच के किनारे उगते हुए सूरज का आनंद लें. देर रात बीच पर लैटे लैटे सितारों को देखें और अपने साथी के साथ एक बेहतरीन समय गुजारें. हाँ इस बीच अपना सेलफोन स्विचऑफ करना ना भूलें

अपने साथी से सीखें सेक्स की बातें!

सेक्स के संबंध में अनेकों किताबें तथा जानकारियाँ उपलब्ध हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं आपका साथी ही आपके लिए सबसे बड़ा सेक्स विशेषज्ञ हो सकता है. आप खुद एक दूसरे से काफी बातें सीख सकते हैं.

प्यार की शुरूआत:
महिलाएँ अपने पुरूष मित्र से सीख सकती हैं कि प्यार की शुरूआत कैसे की जाए. पुरूष सेक्स के प्रति महिलाओं से अधिक आग्रही होते हैं. प्यार की शुरूआत अधिकतर मामलों में पुरूष की पहल से ही होती है. महिलाएँ यहाँ यह सीख सकती हैं कि कैसे अपने साथी को सेक्स के लिए मनाया जाए.

कई मामलों में ऐसा होता है कि महिलाएँ सेक्स के प्रति उदासीन नहीं होती परंतु शुरूआत करने से हिचकती हैं, यहाँ वे अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं कि सही समय पर सही तरीके से कैसे सेक्स का आग्रह किया जाए.

फोरप्ले ही सबकुछ है:
पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि कैसे फोरप्ले का आनंद उठाया जाए. पुरूष नैसर्गिक रूप से सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं, इसलिए वे फोरप्ले का पूरा आनंद नहीं उठा पाते और इससे उनकी महिला मित्र अथवा पत्नी को भी पूर्ण संतुष्टि नहीं मिलती.
महिलाएँ फोरप्ले का अधिक आनंद उठाती हैं और उनके लिए फोरप्ले सेक्स के जितना ही आवश्यक होता है. यहाँ पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि फोरप्ले सेक्स से पहले की कसरत नहीं बल्कि सेक्स का अभिन्न अंग है.

नए विचार:
सेक्स में विवधता ना हो तो एक समय के बाद सेक्स के प्रति रूचि कम होने लगती है. दांपत्य जीवन के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. इसलिए सेक्स में विवधता बनाए रखनी चाहिए. यहाँ भी महिलाएँ अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं.

सेक्स में विवधता के लिए पुरूष अधिक आग्रही होते हैं और हमेशा कुछ नया करना चाह्ते हैं. महिलाएँ बदलाव तथा कुछ नया करने के प्रति उतनी उत्साहित नहीं होती. लेकिन सेक्स में बदलाव ना हो तो वह एक रोजमर्रा का काम बन जाता है. परंतु महिलाएँ अपने साथी की मदद से सेक्स के नए आयाम खोज सकती हैं.

संतोष है महत्वपूर्ण :
सेक्स पुरूष तथा महिला दोनों के लिए आवश्यक होता है और सुकून प्राप्त करना और देना प्यार के आधार स्तम्भ है. हम सब यह बात जानते हैं लेकिन पुरूष यहाँ महिलाओं से कम नम्बर पाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुरूष नैसर्गिक रूप से थोडे अधीर होते हैं. वे सेक्स से तुरंत आनंद प्राप्त करना चाहते हैं तथा अपनी संतुष्टि को प्राप्त करने के लिए अपनी साथी की संतुष्टि को भूल जाते हैं.

यहाँ भी पुरूष महिलाओं से सीख सकते हैं. आनंद और संतुष्टि आवश्यक है लेकिन केवल एक के लिए नहीं दोनों के लिए. आम तौर पर देखा गया है कि महिलाएँ अपने पुरूष मित्र की संतुष्टि के लिए अधिक आग्रही होती हैं बजाय स्वयं अपनी. इसलिए यदि दोनों एक दूसरे की संतुष्टि का पूरा ध्यान रखें तो सेक्स जीवन आनंदमयी हो जाता है.

गर्मियों में सेक्स: “ठंडे” आनंद के 4 तरीके

सेक्स के संबंध में अनेकों किताबें तथा जानकारियाँ उपलब्ध हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं आपका साथी ही आपके लिए सबसे बड़ा सेक्स विशेषज्ञ हो सकता है. आप खुद एक दूसरे से काफी बातें सीख सकते हैं.

प्यार की शुरूआत:
महिलाएँ अपने पुरूष मित्र से सीख सकती हैं कि प्यार की शुरूआत कैसे की जाए. पुरूष सेक्स के प्रति महिलाओं से अधिक आग्रही होते हैं. प्यार की शुरूआत अधिकतर मामलों में पुरूष की पहल से ही होती है. महिलाएँ यहाँ यह सीख सकती हैं कि कैसे अपने साथी को सेक्स के लिए मनाया जाए.

कई मामलों में ऐसा होता है कि महिलाएँ सेक्स के प्रति उदासीन नहीं होती परंतु शुरूआत करने से हिचकती हैं, यहाँ वे अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं कि सही समय पर सही तरीके से कैसे सेक्स का आग्रह किया जाए.

फोरप्ले ही सबकुछ है:
पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि कैसे फोरप्ले का आनंद उठाया जाए. पुरूष नैसर्गिक रूप से सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं, इसलिए वे फोरप्ले का पूरा आनंद नहीं उठा पाते और इससे उनकी महिला मित्र अथवा पत्नी को भी पूर्ण संतुष्टि नहीं मिलती.
महिलाएँ फोरप्ले का अधिक आनंद उठाती हैं और उनके लिए फोरप्ले सेक्स के जितना ही आवश्यक होता है. यहाँ पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि फोरप्ले सेक्स से पहले की कसरत नहीं बल्कि सेक्स का अभिन्न अंग है.

नए विचार:
सेक्स में विवधता ना हो तो एक समय के बाद सेक्स के प्रति रूचि कम होने लगती है. दांपत्य जीवन के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. इसलिए सेक्स में विवधता बनाए रखनी चाहिए. यहाँ भी महिलाएँ अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं.

सेक्स में विवधता के लिए पुरूष अधिक आग्रही होते हैं और हमेशा कुछ नया करना चाह्ते हैं. महिलाएँ बदलाव तथा कुछ नया करने के प्रति उतनी उत्साहित नहीं होती. लेकिन सेक्स में बदलाव ना हो तो वह एक रोजमर्रा का काम बन जाता है. परंतु महिलाएँ अपने साथी की मदद से सेक्स के नए आयाम खोज सकती हैं.

संतोष है महत्वपूर्ण :
सेक्स पुरूष तथा महिला दोनों के लिए आवश्यक होता है और सुकून प्राप्त करना और देना प्यार के आधार स्तम्भ है. हम सब यह बात जानते हैं लेकिन पुरूष यहाँ महिलाओं से कम नम्बर पाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुरूष नैसर्गिक रूप से थोडे अधीर होते हैं. वे सेक्स से तुरंत आनंद प्राप्त करना चाहते हैं तथा अपनी संतुष्टि को प्राप्त करने के लिए अपनी साथी की संतुष्टि को भूल जाते हैं.

यहाँ भी पुरूष महिलाओं से सीख सकते हैं. आनंद और संतुष्टि आवश्यक है लेकिन केवल एक के लिए नहीं दोनों के लिए. आम तौर पर देखा गया है कि महिलाएँ अपने पुरूष मित्र की संतुष्टि के लिए अधिक आग्रही होती हैं बजाय स्वयं अपनी. इसलिए यदि दोनों एक दूसरे की संतुष्टि का पूरा ध्यान रखें तो सेक्स जीवन आनंदमयी हो जाता है.

बच्चों के जन्म के बाद प्यार को जीवंत रखने के 5 तरीके

बच्चों के जन्म के बाद की दुनिया अलग ही होती है. कहते हैं बच्चों के जन्म से दाम्पत्य जीवन की नई शुरूआत होती है.

बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.

प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.

साथ में फिल्म देखें:

बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.

साथ में टहलने जाएँ:

यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.

खेल खेलें:

बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.

साथ खाना खाएँ:

यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.

एकांत ढूंढे:

छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.

दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.

Tuesday, May 26, 2009

कलीग से प्यार, जरा संभलकर यार

अगर आपका अपनी कलीग के साथ होने वाला हंसी-मजाक अफेयर में बदल गया है, तो अपने इस रिलेशन पर अब आपको बॉस के स्टैंड की चिंता शुरू कर देनी चाहिए।



अक्सर ऑफिस में साथ काम करने वाली खूबसूरत लड़कियां अपने कलीग्स की रातों की नींद उड़ा देती हैं। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है, तो उसके सपनों में खोने से पहले नीचे दी गई बातों पर गौर फरमाएं। कहीं ऐसा ना हो कि आप अपनी 'स्वीट हार्ट' के सपनों में ही खोए रहें और हकीकत में आपके सामने परेशानी खड़ी हो जाए।

अट्रैक्शन क्यों?
सबसे पहले अपनी खूबसूरत कलीग की उस बात पर ध्यान दें, जिस वजह से आप उसकी ओर आकर्षित हुए हैं। हालांकि कई बार लोग स्ट्रेस की वजह से भी इधर-उधर आकर्षित होते हैं। स्ट्रेस दूर करने का सबसे अच्छा तरीका किसी के ख्यालों में खो जाना ही है।

एंप्लॉयर पॉलिसी
पांच में से एक एंप्लॉयर अपने एम्प्लॉइज के बीच रिलेशन को लेकर एक पॉलिसी बनाकर रखता है। अगर आपके रिलेशन से कंपनी के काम पर असर पड़ रहा है, तो आपको नौकरी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि ऐसा कुछ भी करने से पहले आप कंपनी की रूल बुक पढ़ लें।

बॉस को बताएं
माना कि रोमैंस पर्सनल होता है, लेकिन बेहतर होगा कि आप इस बारे में बॉस को भी बता दें। अगर उसे आपके इस रिलेशन के बारे में पता होगा, तो शायद वह आपका ज्यादा ध्यान रख पाएगा।

पहले काम
ध्यान रहे कि रोमैंस आप अपने लिए कर रहे हैं। इससे आपके एंप्लॉयर को कोई फायदा नहीं होने वाला। इसलिए रुमानी सपने बुनने में इतना न खो जाएं कि आपके काम पर सवाल उठने लगें।

होशियार बनें
अपने नए पार्टनर के साथ दो घंटे का लंच करना शुरू करेंगे, तो आप पाएंगे कि आपके कलीग्स ने आपके साथ चाय पीना भी छोड़ दिया है। ऐसे में दूसरे कलीग्स को टाइम देने के मामले में होशियार बनें।

क्या आप तैयार हैं?
प्यार करना अच्छी बात है। लेकिन आपको इस बात के लिए भी तैयार रहना होगा कि अगर ऑफिस कलीग के साथ लव रिलेशन में कोई प्रॉब्लम आने पर आपको अपनी जॉब छोड़नी पड़ सकती है।

नजदीकी क्यों?
अगर आप बेवजह किसी कलीग को ज्यादा अटेंशन दे रहे हैं और उसके पीछे पड़े हैं, तो यह सेक्सुअल हरासमंट की कैटिगरी में आता है। इसलिए ऐसे किसी रिलेशन में पड़ने से पहले उससे यह स्पष्ट पूछ लें कि कहीं इससे हमारी वर्किन्ग रिलेशनशिप में फर्क तो नहीं आएगा। वरना आपको नजदीकी दिखाना महंगा पड़ सकता है।

जॉब पर खतरा
एक जाने-माने बिजनस गुरु एक इंटरव्यू के सिलसिले में एक अखबार की एडिटर से मिले और यह मुलाकात अफेयर में बदल गई। इसका नतीजा यह हुआ कि अखबार की एडिटर को अपनी जॉब गंवानी पड़ी। दरअसल, कोई भी संस्थान यह नहीं चाहता कि उसके किसी एंप्लॉई की वजह से मार्किट में उनके बारे में नेगेटिव खबर आए।

ऑफिस पर्सनल नहीं
अगर ऑफिस में आपकी सीट पर हर वक्त आपके चाहने वालों की भीड़ रहती है, तो इस चीज को कोई पसंद नहीं करेगा। ध्यान रखें कि ऑफिस आपके पर्सनल यूज के लिए नहीं है। इसलिए बेहतर यही होगा कि ऑफिस में आप अपने करीबी कलीग से ज्यादा गप्पें ना लड़ाएं।

महंगा पड़ सकता है प्यार
एक एयरप्लेन कंपनी के चीफ इग्जेक्युटिव को एक फीमेल इग्जेक्युटिव से इश्क लड़ाने की वजह से इस्तीफा देना पड़ा। कंपनी की कोड ऑफ कंडक्ट बुक में साफ लिखा था कि इस तरह की चीजों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

टॉयलेट में 2000 महिलाओं की फोटो खींची

ब्राजील में एक कंपनी का एग्जेक्यटिव डायरेक्टर था फ्रेडरिको फ्रीरे। वह अपने फोन वीडियो और स्टिल कैमरे से टॉयलेट में महिलाओं की फोटो खी

ंच लेता था।

उसने यह हरकत 2,000 से भी ज्यादा महिलाओं के साथ की। इनमें से कुछ महिलाओं की अश्लील फोटो उसने पोर्नोग्रैफिक वेबसाइट्स पर भी डाल दी।

एक बार एक महिला कर्मचारी की नजर टॉयलेट में अचानक चमकी रेड लाइट पर पड़ी और जल्द ही उसे पता चल गया कि दरअसल यह एक गुप्त कैमरा है।

फ्रीरे के कारनामे का भंडाफोड़ हो गया। उसकी हरकतों का शिकार हुई महिलाओं ने उसे बर्खास्त करने की मांग जोरशोर से उठाई और आखिरकार उसकी छुट्टी हो गई।

6 पीड़ित महिलाओं ने रियो की जिला अदालत में फ्रीरे के खिलाफ केस कर दिया। अदालत ने उसे दोषी पाया और 6 महिलाओं को 14,778 डॉलर (करीब 72 लाख रुपए) का हर्जाना देने का आदेश दिया। यानी हर महिला को औसतन 12 लाख रुपए मिलेंगे।

इस हिसाब से यदि सभी 2000 महिलाओं ने दावा ठोंक दिया तो फ्रीरे को करीब 250 करोड़ रुपए का चूना लग सकता है। ठीक ही है, जैसी करनी वैसी भरनी!

सेक्स के दौरान किया शोर, तो महिला हुई गिरफ्तार

इंग्लैंड में एक अजीब - -

गरीब मामला सामने आया है। 47 साल की एक महिला को पुलिस ने तब गिरफ्तार कर लिया जब उन्होंने सेक्स के दौरान ज़्यादा शोर करने की शिकायत के बाद लगे बैन को तोड़ डाला। यह बैन इस महिला पर गिरफ्तारी से दो दिन पहले ही लगा था।

कैरोलाइन कार्टराइट नाम की इस महिला पर ऐंटी सोशल बिहैवियर ऑर्डर के तहत पाबंदी लगाई गई थी। मैजिस्ट्रेट ने यह पाबंदी तब लगाई थी जब पाया गया था कि इस महिला ने सेक्स के दौरान शोर करने के शुरुआती आदेश को तोड़ा था। लेकिन इस महिला को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

लेकिन महिला ने गिरफ्तारी के बाद कहा कि वह अपने सेक्स और शोर का सिलसिला जारी रखेंगी। महिला ने कहा कि मैं रुकूंगी नहीं। मैं पाबंदी लगने के बाद से शोर कर रही हूं और सुबह भी मैंने कार्टराइट ने कहा कि यह बेहद अप्राकृतिक होगा कि आप सेक्स के दौरान शोर करें। कार्टराइट ने यह भी कहा कि मैं ऐसा नहीं मानती कि मैं बहुत ज़्यादा आवाज़ करती हूं। इस महिला और उनके पति स्टीव के पड़ोसियों ने पुलिस से कई बार शोरशराबे की शिकायत की है जिसके बाद कार्टराइट पर इस तरह के बैन लगे।

टॉपलेस कॉफी हाउस!

अमेरिका के माइने स्थित वासलबोरो शहर में एक

टॉपलेस कैफे में काम करने वाले लोग।
ऐसा
कॉफी हाउस खुला है , जिसमें तमाम वेटर और वेट्रेस टॉपलेस होते हैं। इसका नाम है ' ग्रैंड व्यू टॉपलेस कॉफी शॉप '

यह कॉफी शॉप इसी हफ्ते सोमवार को खुला है। मंगलवार को इसमें दो पुरुषों ने कॉफी पी। इस दौरान उनके इर्द - गिर्द 3 टॉपलेस वेट्रेस और खुले सीने वाला एक वेटर मौजूद रहे।

कैफे के बाहर साइनबोर्ड लगे हैं : ' ओवर 18 ओनली ', ' नो कैमराज , नो टचिंग , कैश ओनली ' एक टॉपलेस वेट्रेस सुसी विले ने कहा कि कैफे का नजारा लेने के लिए मर्द , औरतें और दंपती रुक जा रहे हैं।

मगर इस कॉफी शॉप के खुलने से लोकल लोगों में काफी नाराजगी है। पिछले महीने टाउन प्लानिंग बोर्ड के सामने जब इस कैफे का प्रस्ताव आया था , तब भी उन्होंने अपना विरोध और गुस्सा जताया था। लेकिन अफसरों का कहना है कि कॉफी शॉप में गैरकानूनी कुछ भी नहीं है। लिहाजा , यह खास कैफे बड़ी शान से खुल गया है।

लेडी है कि भूचाल!

वह 36 साल की है। जर्मनी की है। वजन है बस 252 पाउंड (करीब सवा सौ किलो)। नाम है इल्नेस लोर्बाक और काम है वेश्यावृत्ति।

जर्मनी में वेश्यावृत्ति कानूनी धंधा है, इसलिए लोर्बाक बगैर किसी दिक्कत के अपने अपार्टमंट में धंधा करती है। मगर उसके पड़ोसी परेशान हो गए हैं और उसके धंधे को बंद कराने के लिए अदालत की शरण में गए हैं।

पड़ोसियों का कहना है कि लोर्बाक जब अपने कस्टमर्स के साथ होती है तो उनके फ्लैट हिलने लगते हैं। एक पड़ोसी ने अदालत से कहा कि एक बार उसका फ्लैट इतनी बुरी तरह हिला कि शेल्फ में रखे उसके कीमती क्रिस्टल ग्लास (कीमत 100 पौंड यानी 7,000 रुपए) टूट कर बिखर गए।

लोर्बाक के फ्लैट के एकदम बगल में रहने वाली पड़ोसन कैरोल्सो हॉफमैन ने हालात की तुलना 'अर्थक्वैक' फिल्म से की। उन्होंने अदालत से कहा, 'मैं नहीं जानती कि लोर्बाक के कस्टमर के लिए धरती हिलती है या नहीं, लेकिन हमारे लिए हिलती है। जब सौ किलो से भी ज्यादा वजन की महिला जंगली जानवर की तरह अपने क्लाइंट से जूझ रही हो तो आप स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं। वह 'वन वूमन डिमॉलिशन जॉब' है।'

मगर लोर्बाक ने कोर्ट से कहा, 'मैं एक मदर हूं और एक कामकाजी महिला के तौर पर जहां तक संभव हो, संयत और संजीदा रहती हूं।'

जज ने फिलहाल इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

कैसे बने फैट से फिट

फिट और फैट ... ये दोनों

शब्द लिखने - सुनने में बेशक एक जैसे लगते हैं लेकिन असल में इन दोनों स्थितियों के बीच भारी फर्क है। यानी फिट होने पर आप तरोताजा , चुस्त - दुरुस्त , स्मार्ट दिखते हैं और बीमारियों से दूर रहते हैं , वहीं फैट यानी मोटापा पर्सनैलिटी खराब करने के साथ - साथ तमाम बीमारियों को भी न्योता देता है। डायबीटीज , हाई ब्लडप्रेशर , कमर दर्द , दिल की बीमारी , घुटने में दर्द जैसी बीमारियों का खतरा मोटापे के साथ काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

जानें अपना बीएमआई : यह जानना बेहद जरूरी है कि असल में फिट किसे कहें। इसका सीधा - सा फंडा है बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स। बीएमआई जानने का फॉर्म्युला है वजन ( किलो में )/ लंबाई ( मीटर में का स्कवेयर ) एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए डब्ल्यूएचओ ने 25 और भारत सरकार ने 23 बीएमआई तय किया है। इसकी वजह यह है कि भारतीयों के शरीर में पश्चिमी देशों के लोगों के मुकाबले 5 फीसदी फैट ज्यादा होता है। अगर वहां किसी को 80 किलो का होने पर दिक्कत होगी तो भारतीयों को 75 किलो पर ही परेशानी महसूस होने लगेगी। इसी तरह फैट उनकी पूरी बॉडी में बराबर फैला होता है , जबकि भारतीयों के खास हिस्से खासकर पेट पर फैट जमा होता है।

1. अगर आपका बीएमआई 23 या इससे कम है तो आप फिट हैं।

2. 23 से 25- ओवरवेट

3. 25 से 30- मोटे

4 . 30 से ज्यादा - बेहद मोटे

वजन घटाने का सही तरीका : अगर आप पहले से सचेत हों और पौष्टिक लेकिन कम कैलरी और लो फैट वाले खाने के साथ - साथ नियमित रूप से फिजिकल ऐक्टिव हों या साथ में वॉक , जॉगिंग , स्कीपिंग , साइकलिंग , स्विमिंग जैसी एक्सर्साइज या योग करते रहें तो बीएमआई 23 तक बनाए रखना मुश्किल नहीं है। क्योंकि अगर एक बार वजन अगर बढ़ जाए तो कम करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसके लिए सबसे जरूरी है स्पेशलिस्ट से सलाह करके योजना बनाना और उस पर लगातार अमल करना। आमतौर पर लोग वजन घटाने के लिए डाइटिंग को ही एक तरीका मानते हैं और क्रैश डाइटिंग करने लगते हैं , जो सही नहीं है। डाइटिंग का मतलब भूखे रहना नहीं है , बल्कि सही वक्त पर उचित मात्रा में कम कैलरी और लो फैट वाली फाइबर युक्त चीजें खाने से है। असल में जब हम कम खाते हैं तो बॉडी का मैटाबॉलिज्म कम हो जाता है और मिनरल और विटामिन की कमी हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप भरपूर , लेकिन सही खाना खाएं।

वजन घटाने के लिए हमें थ्री - डाइमेंशनल ( तीन पहलुओं पर ) कोशिश करनी होगी :

1. कैलरी कम लें। शरीर को कम कैलरी मिलेगी तो वह पहले से जमा कैलरी का इस्तेमाल करेगा।

2.ज्यादा कैलरी बर्न करें। एक्सर्साइज और ज्यादा शारीरिक मेहनत करने पर शरीर में जमा फालतू कैलरी बर्न होगी।

3. स्ट्रेस कम करें। इससे आपको भूख ज्यादा लगती है और आप इमोशनल ईटिंग करते हैं।

मसलन , अगर आपने 4 किलो वजन कम करने का टारगिट रखा है तो सबसे पहले खाने में से 1000 कैलरी की कटौती करें। फिर कैलरी खर्च करें। आधे घंटे तेज सैर से 80 कैलरी तक बर्न हो जाती हैं। बाकी के लिए एरोबिक्स , जॉगिंग , स्विमिंग या दूसरी एक्सर्साइज की जा सकती हैं। तीसरी जरूरी चीज है , लाइफस्टाइल में बदलाव। लिफ्ट के बजाय सीढि़यों का इस्तेमाल करें , नौकर से पानी मांगने के बजाय खुद उठकर जाएं , आसपास रिक्शे या दूसरे वीइकल के बजाय पैदल जाएं। इन छोटी - छोटी चीजों से काफी कैलरी काफी खर्च होती हैं।

डाइट और एक्सर्साइज के अलावा वजन घटाने के कुछ और भी तरीके हैं। इनमें से कुछ खुद घर में अपनाए जा सकते हैं तो कुछ के लिए आपको एक्सपर्ट या इंस्टिट्यूट का सहारा लेना होगा।

योग
वजन कम करने का सबसे सटीक और सरल तरीका है योग। कपालभाति , अग्निसार क्रिया , उर्ध्वहस्तोत्तानासन , दुत उत्तानपादासन , हृदय स्तंभासन , द्विपाद साइकलिंग , भुजंगासन , चक्की चालन , उज्जायी प्रणायाम ऐसे आसन हैं , जो वजन कम करने में बेहद मददगार हैं।

कपालभाति : सांस को नाक से बाहर फेंके , जिससे पेट अंदर - बाहर जाएगा। 5- 10 मिनट करें। यह आसन पेट पर जमा चर्बी कम करता है। हाई बीपी वाले धीरे - धीरे करें और कमरदर्द वाले कुर्सी पर बैठकर करें।

अग्निसार : खड़े होकर पैरों को थोड़ा खोलकर हाथों को जंघाओं पर रखें। सांस को बाहर रोक दें। फिर पेट की पंपिंग करें यानी सांस अंदर खींचें , फिर छोड़ें। स्लिप डिस्क , हाई बीपी या पेट का ऑपरेशन करा चुके लोग इसे करें।

उर्ध्व हस्तोत्तानासन : खड़े होकर पैरों को थोड़ा खोलें। हाथों की उंगलियों को फंसाकर सिर के ऊपर उठा लें। सांस निकालें और कमर को लेफ्ट साइड में झुका लें। इसी तरह दूसरी ओर करें।

दुत उत्तानपादासन : कमर के बल लेटकर हाथों को जंघाओं के नीचे जमीन पर रखें। दोनों पैरों को 90 डिग्री तक ऊपर उठाएं। इस प्रकार जमीन पर बिना टिकाए बार - बार पैरों को ऊपर - नीचे करते रहें। कमर दर्द वाले इसे करें।

हृदय स्तंभासन : कमर के बल लेटकर हाथों को जंघाओं के ऊपर रखें। सांस भरकर पैरों को उठाएं। सिर और कमर को उठाएं। इस दौरान शरीर का भार नितंबों पर रहेगा।

द्विपाद साइकलिंग : कमर के बल लेटे - लेटे ही दोनों पैरों को मिलाकर एक साथ साइकलिंग की तरह घुमाएं। थकान होने तक लगातार घुमाते रहें। हाथों को कमर के नीचे सपोर्ट के लिए रखें। यही प्रक्रिया रिवर्स में भी दोहराएं।

भुजंगासन : पेट के बल लेटकर दोनों हाथों को नितंबों के नीचे रखें। सांस भरते हुए आगे से सिर और छाती को ऊपर उठाकर पीछे की ओर मोड़ लें।

चक्की चालन : दोनों पैर सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं और हाथों को आपस में बांध लें। फिर आगे की ओर झुककर चक्की चलाने जैसा अभ्यास करें।

उज्जायी प्राणायाम : थायरॉइड के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद है। सीधे बैठकर सांस बाहर निकालें। अब सांस भरते हुए गले की मांसपेशियों को टाइट करें और सांस भरते जाएं। साथ ही गले से घर्षण की आवाज करते जाएं। फिर नाक से सांस धीरे - से बाहर निकाल दें।

इन सभी आसनों को 8- 10 बार दोहराएं। अगर सुबह नियमित रूप से ये आसन किए जाएं तो एक महीने में किलो तक वजन कम हो सकता है। आसन खुद भी किए जा सकते हैं , लेकिन शुरुआत अगर किसी एक्सपर्ट या योग गुरु की देखरेख में की जाए तो बेहतर है।

पावर योग : योग की यह तकनीक आजकल काफी चलन में है। योग में जहां एक ही स्थिति में कुछ देर रुकना होता है , वहीं पावर योग में जोरदार और लगातार प्रैक्टिस होती है। इसमें एक ही क्रिया को लगातार कई बार किया जाता है और सारा जोर स्ट्रेंथ और लचक पर होता है। लगातार मूवमंट से पसीना भी ज्यादा निकलता है। ऐसे में वजन जल्दी घटता है , लेकिन प्रैक्टिस रोकने पर मसल टोनिंग कम हो जाती है। यानी बॉडी के लूज होने का खतरा होता है। पावर योग हमेशा एक्सपर्ट की देखरेख में ही करना चाहिए।

आयुर्वेद
आयुर्वेद में इलाज मुख्यत : जड़ी - बूटियों पर आधारित होता है। यह करीब - करीब नेचरोपैथी जैसा ही है। इसमें भी मसाज और स्टीम बेस्ड तकनीक होती है। मसाज के लिए अदरक , कुलष्ठा दूसरी बूटियों मिला तेल या पाउडर इस्तेमाल किया जाता है। फिर स्टीम दी जाती है। खास पैक भी लगाया जाता है। इन सब तरीकों से फैट मोबलाइज हो जाता है। आयुर्वेद में आमतौर पर 10- 15 सीटिंग में पांच किलो तक वजन घट सकता है। पांच हजार से 20 हजार रुपये तक चार्ज किए जाते हैं। इसका फायदा यह है कि शरीर ढीला नहीं पड़ता और वजन अचानक वापस नहीं आता। बॉडी टोन्ड और शेप में जाती है।

होम्योपैथी
मोटापे से छुटकारा पाने के लिए खाना खाने के बाद दिन में तीन बार 10- 15 बूंदें फायटोलका डिकंड्रा क्यू या फ्यूकस वेस क्यू की चौथाई कप पानी में लें। कैल्केरिया कार्ब की 4- 5 गोलियां भी दिन में तीन बार ले सकते हैं। ये दवाएं फैट कम करती हैं और नियमित रूप से लेने पर दो - तीन महीने में असर दिखने लगता है। इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं है , फिर भी डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर है। इन दवाओं को गंध से दूर रखना चाहिए। लेने से पहले 15 मिनट पहले या बाद में कुछ खाएं। इस दौरान कच्चे लहसुन प्याज का सेवन बंद कर दें। दवा लेने से पहले कुल्ला कर लें।

मशीनों का सहारा ( साइंटिफिक )
साइंटिफिक तकनीक का इस्तेमाल एक सपोर्ट सिस्टम के तौर पर किया जाता है। इसमें विभिन्न मशीनों द्वारा मसल एक्टिविटी , ब्लड सर्कुलेशन और शरीर की लचक बढ़ाई जाती है।

वाइब्रेशन : मशीन के जरिए शरीर पर वाइब्रेशंस दी जाती हैं। इससे मांसपेशियों की एक्टिविटी बढ़ती है , जिससे फैट बर्न होता है।

हीट थेरपी : शरीर पर पैड लपेटकर हीट दी जाती है। इससे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है , जो बेसिक मेटाबॉलिज्म रेट में इजाफा करता है।

अगर आप सिर्फ इन्हीं दोनों तरीकों से वजन कम करना चाहते हैं तो सही नहीं है , क्योंकि इससे स्किन ढीली होने का खतरा होता है। उसके लिए मसाज की सलाह दी जाती है। मशीनी तरीकों से वजन कम करने के लिए दो से तीन हजार रुपये चार्ज किए जाते हैं।

कितना शुद्ध है पीने का दूध...

आम आदमी दूध

की उपयोगिता को लेकर भले ही आश्वस्त हो , पर खुद मेडिकल प्रफेशनल्स में इस बारे में आम सहमति नहीं है। अब तक सिर्फ दूध के प्योर होने को लेकर ही सवाल उठते रहे हैं , पर दूध पीने के फायदों और उसके गुणों पर कोई शक - शुबहा नहीं था। अब यह स्थिति नहीं है। बेशक यह कहना मुश्किल है कि दूध हर उम्र , हर आदमी के लिए फायदेमंद ही होगा। दूध कितना पीया जाए और कौन - सा पीया जाए , इस पर भी विवाद है। पेश है खास रिपोर्ट :

कई तरह के दूध
आमतौर पर दूध में 85 फीसदी पानी होता है और बाकी हिस्से में ठोस तत्व यानी मिनरल्स फैट होता है। बाजार में गाय - भैंस के अलावा विभिन्न कंपनियों का पैकिट वाला दूध मिलता है। दूध प्रोटीन , कैल्शियम और राइबोफ्लेविन ( विटामिन बी -2) युक्त तो होता ही है , इसमें विटामिन , डी , के और समेत फॉस्फोरस , मैग्नीशियम , आयोडीन समेत कई मिनरल और फैट तथा एनर्जी भी होती है। इसके अलावा इसमें कई एंजाइम और लिविंग ब्लड सेल्स भी मिलते हैं। डाइटिशंस की मानें तो ये सब पोषक तत्व हमारी मांसपेशियों और हड्डियों के गठन में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रोटीन एंटीबॉडीज के रूप में काम करता है और हमें इन्फेक्शन से बचाता है।

1. गाय का दूध
गाय के दूध में प्रति ग्राम 3.14 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। योगाचार्य सुरक्षित गोस्वामी गाय के ताजा दूध को ही उत्तम मानते हैं। बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के आयुर्वेद के विभागाध्यक्ष डॉ . मेहर सिंह का भी मानना है कि गाय का दूध भैंस की तुलना में दिमाग के लिए अच्छा है। पर इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ . एच . एस . छाबड़ा के अनुसार कुछ स्टडी बताती हैं कि गाय के दूध से बेहतर है भैंस का दूध। उसमें कम कोलेस्ट्रॉल होता है और मिनरल ज्यादा होते हैं।

2. भैंस का दूध
भैंस के दूध में प्रति ग्राम 0.65 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में 92 फीसदी कैल्शियम , 37 फीसदी आयरन और 118 फीसदी फॉस्फोरस ज्यादा होता है।

3. पैकिट वाला दूध
इस तरह का दूध मदर डेयरी , अमूल , पराग जैसी कंपनियां सप्लाई करती हैं। इसमें विटामिन , आयरन और कैल्शियम ऊपर से भी मिलाया जाता है। इसमें भी कई तरह के जैसे फुल क्रीम , टोंड , डबल टोंड और फ्लेवर्ड मिल्क मिलते हैं। फुल क्रीम में फैट सबसे अधिक होता है। इन सभी की अपनी उपयोगिता है , पर डॉक्टरों की राय है कि बच्चों के लिए फुल क्रीम दूध बेहतर है तो बड़ों के लिए कम फैट वाला दूध। यहां पर हम सिर्फ मदर डेयरी के विभिन्न प्रकार के दूध और उनमें फैट की मात्रा की जानकारी दे रहे हैं :

1. फुल क्रीम : फैट 6 फीसदी

2. स्टैंडर्डाइज : फैट 4 फीसदी

3. टोंड : फैट 3 फीसदी

4. डबल टोंड : फैट 1.5 फीसदी

5. स्किम्ड : फैट 0.5 फीसदी

6. गाय : फैट 3.5 फीसदी

इनके अलावा बकरी का दूध , ऊंटनी का दूध , फ्लेवर्ड मिल्क और सोयाबीन का भी दूध होता है।