Sunday, September 13, 2009

सेक्स के लिए ठोक-बजाकर पुरुष चुनती हैं महिलाएं

एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है कि महज आनंद के लिए सेक्स करने के वास्ते पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक ठोक


बजा कर चयन करती हैं।

जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित ब्रिटेन की ब्रुनेल यूनिवर्सिटी द्वारा कराए गए मनोवैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक रात बिताने के लिए किसी महिला का चयन करने के मामले में जर्मनी के पुरुष अमेरिकी और इटैलियन पुरुषों की तुलना में अधिक उत्सुक होते हैं।

अध्ययन के दौरान अमेरिका, जर्मनी और इटली में 400 से अधिक छात्रों और इतनी ही संख्या में छात्राओं से इस बारे में सवाल पूछे गए। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि किसी पुरुष या महिला का शारीरिक आकर्षण उसके साथ उसके फ्लैट में जाने या हमबिस्तर होने में क्या भूमिका निभाता है।

रिसर्चर्स ने बताया कि उनसे हल्के बदसूरत, साधारण आकर्षक या बेहद आकर्षक लोगों को रैंकिंग देने को कहा गया। पुरुषों और महिलाओं ने इस बारे में अलग-अलग राय दी।

अध्ययन के दौरान पुरुष साधारण या अपवाद स्वरूप सुंदर महिलाओं को पसंद करते नजर आए। वहीं दूसरी ओर, महिलाओं ने उन पुरुषों के फ्लैट में जाने या उनके साथ हमबिस्तर होने की इच्छा जताई जो बेहद आकर्षक हैं।

चेहरे से ज्यादा ब्रेस्ट पर टिकती हैं पुरुषों की नजरें

पुरुष किसी महिला की खूबसूरती का पैमाना


उसके चेहरे से नहीं बल्कि ब्रेस्ट की खूबसूरती से आंकते हैं। जी हां , यह सच है। हाल ही में किए गए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पुरुष की निगाहें महिलाओं के चेहरे की बजाय सबसे पहले उनके ब्रेस्ट पर टिकती हैं। सिर्फ 20 फीसदी पुरुष ही पहली निगाह में चेहरा देखते हैं।


' डेली मेल ' में छपी एक खबर के मुताबिक न्यू जीलैंड के वेलिंगटन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व वाली एक इंटरनैशनल रिसर्च टीम ने पाया है कि करीब 50 फीसदी पुरुषों की पहली नजर महिलाओं के ब्रेस्ट पर पड़ती है। यही नहीं पुरुष महिलाओं के शरीर के किसी अन्य हिस्से के मुकाबले ज्यादा समय तक ब्रेस्ट ही देखते हैं।

रिसर्च में पाया गया है कि पहली नजर में करीब एक तिहाई कमर और नितंब , जबकि 20 फीसदी से कम लोग चेहरा देखते हैं।

हालांकि , दावा किया गया है कि इसका कारण क्रमानुगत विकास हो सकता है , क्योंकि बड़े ब्रेस्ट और पतली कमर वाली महिलाओं में महिला हॉर्मोन ओस्ट्रोजेन का स्तर ज्यादा होता है और वैसी महिलाओं की प्रजनन क्षमता ज्यादा होती है।

शोध में रिसर्चरों ने एक ही महिला की विभिन्न विषयों पर 6 तस्वीरें पेश कीं , जिनमें आकार को डिजीटल तरीके से बढ़ाया या घटाया जा सकता था। उन्होंने उन हिस्सों को रिकॉर्ड किया जिन्हें पुरुषों ने पहले देखा , कितनी बार देखा और कितने समय तक देखते रहे। यह सब दर्ज करने के लिए उन्होंने 2 कैमरों और मिरर का इस्तेमाल किया , ताकि आंख की गतिविधि को मापा जा सके।

रिसर्चरों ने कहा कि पुरुषों ने ब्रेस्ट देखने में ज्यादा समय लगाया और अन्य हिससे के मुकाबले वहां उनकी नजरें ज्यादा टिकी रहीं।

पति संतुष्ट नहीं कर पाते, क्या करूं?

मैं एक शादीशुदा लड़की हूं।

हमारी
शादी को एक साल हो चुका है। शादी से पहले मैं किसी और लड़के से प्यार करती थी। उससे मेरी शादी नहीं हो पाई। मैंने शादी के बाद अपने पति को बहुत प्यार दिया है। वह भी मुझे बहुत प्यार करते हैं। लेकिन कुछ टेंशन के चलते वह मुझे शादीशुदा जिंदगी का सुख नहीं दे पा रहे हैं।

मैं उनको भरपूर प्यार देती हूं। वह मुझसे संतुष्ट भी हैं। मैंने उनको कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनसे संतुष्ट नहीं हूं। शायद इसी कारण हमारा बच्चा भी नहीं ठहर रहा है। मैं एक वर्किन्ग लेडी हूं। अपने इस आंतरिक तनाव के कारण मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के बारे में सोचने लग जाती हूं। मेरे कई और पुरुष मित्र भी हैं। मैं अपने को उनकी और आकर्षित होता महसूस कर रही हूं। हालांकि मैं यह बिल्कुल नहीं चाहती। समझ नहीं आता कि मैं क्या करूं। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।
सारिका , दिल्ली

हमारी एक रीडर अपनी इस समस्या पर आपसे कुछ सुझाव चाहती हैं। अगर आपके पास कोई सलाह , कोई सुझाव हो तो ज़रूर बताएं। हो सकता है , आपकी एक छोटी - सी सलाह उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दे।

महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं?

महिलाएं पुरुषों के साथ सेक्स


सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी में शांति बनी रहे , या वह बिना वजह के सिरदर्द से बचना चाहती हैं। महिलाओं की लिस्ट में रोमैंस और पेशन की जगह काफी पीछे है। महिलाओं पर हुई एक स्टडी पर बाज़ार में आई किताब तो कुछ ऐसा ही कहती है।

तस्वीरों में : किस्म- किस्म के कामसूत्र

टेक्सस यूनिवर्सिटी में साइकॉलजी के प्रोफेसर्स सिंडी मेस्टन और डेविड बस की लिखी किताब - वाय वुमेन हेव सेक्स ( महिलाएं सेक्स क्यों करती हैं ? ) में करीब 200 कारणों को हाईलाइट किया गया है। इस किताब के लिए रिसर्च के दौरान एक महिला ने तो यहां तक स्वीकार किया कि वह सेक्स सिर्फ इसलिए करती हैं ताकि उसके पति अपने स्पर्म बाहर निकाल सके।

रिसर्च के दौरान देखा गया कि ज्यादातर पुरुषों को महिलाएं सेक्सुअली अट्रैक्टिव लगती हैं , जबिक महिलाओं को पुरुषों में ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती। रिसर्च के दौरान प्रोफेसर मेस्टन ने 1000 महिलाओं का इंटरव्यू किया , जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के साथ सोने के सैकड़ों कारण बताए।

पहली डेटिंग, तो लड़के क्या करें

डेटिंग का मतलब है एक दूसरे को समझने की कसरत। लेकिन जब आप पहली डेटिंग पर जा रहे हों, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है:




जब बात पहले डेट पर जाने की हो, तो झिझकना एक सामान्य-सी बात है। लेकिन जब बात फर्स्ट इंप्रेशन की हो, तो आपका झिझकना ठीक नहीं। फर्स्ट डेट पर कुछ खासों बातों का खयाल रखना जरूरी होता है, ताकि सामने वाले को आप इंप्रेस कर सके और उसके बारे में काफी कुछ पता कर सकें।

फर्स्ट डेट पर कभी भी उसके पिछले प्यार के बारे में न पूछें। वास्तव में, इसे तो तब तक अवॉइड करना चाहिए, जब तक कि वह खुद इस टॉपिक को नहीं छेड़ती। ऐसा संभव है कि उसका पिछला प्यार दुख पहुंचाने वाला रहा हो या फिर वह अभी भी उसे प्यार कर रही हो। ऐसे में पहले ही दिन का मजा किरकिरा करना ठीक नहीं।

किसी लड़की की रुचियों के बारे में जानने का ट्रिकी फॉर्म्युला यह है कि आप उससे पिछले ट्रैवल डेस्टिनेशन के बारे में बात करें और पूछें कि भविष्य में वह कहां जाना चाहती है। अगर वह ऐसे किसी प्लेस की जानकारी आपको देती है, जहां वह जाना चाहती है तो आप वहां चलने का ऑफर उसे दे सकते हैं। इस टॉपिक पर बातचीत का बड़ा फायदा यह है कि आपको एक-दूसरे के कल्चरल बैकग्राउंड और नए एडवेंचर्स के प्रति खुले नजरिए का पता चल जाएगा।

उससे उसके दोस्तों के बारे में पूछिए। अगर आप उन दोस्तों को नहीं जानते हैं, तब भी वह अपने दोस्तों और उनसे मिलने के बारे में आपको खुशी-खुशी बताएगी। उसके दोस्तों की जानकारी से आप उसके बारे में भी काफी कुछ समझ पाएंगे।

अगर आप पहले डेट पर किसी बार या रेस्तरां में हैं, तो आप यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि खाने-पीने के मामले में उसकी रुचि क्या है। और यह भी कि कहीं वह अल्कोहल तो नहीं लेती।

जब आप बात कर रहे हों, तो करियर और एजुकेशन की बातें क्यों छोड़ी जाएं? ऐसे में एकेडमिक अचीवमेंट और जॉब की बातें आपको उसे समझने और उत्साहित करने में मदद करेंगी।

आप उसकी हॉबिज के बारे में बात कर सकते हैं। वह क्या पसंद करती है? खेल में उसकी कितनी दिलचस्पी है? किस तरह का संगीत पसंद है? इन सवालों के जवाब से आपको यह पता चलेगा कि आपके बीच कितना बेहतर बॉन्ड बन सकता है।

बहरहाल, इन सबके बावजूद एक बात हमेशा याद रखें और वह कि एक ही मुलाकात में आप किसी के बारे में सब कुछ नहीं जान सकते हैं। इसलिए सब्र रखें और कुछ चीजें बाद के दिनों के लिए भी छोड़ दें।

पिल्स का नेगेटिव असर नहीं

ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के बारे में मिथ है कि इनका सेवन रोकने के बाद प्रेग्नेंसी रेट पर गलत प्रभाव पड़ता है। लेकिन इस बारे हुई स्टड

ीज का कुछ और ही मानना है। महिलाओं द्वारा ली जाने वाली कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का उनकी प्रेग्नेंसी रेट पर का कोई असर नहीं पड़ता। दरअसल, किसी भी महिला के प्रेग्नेंसी रेट का इससे कोई लेना-देना नहीं होता कि वह कितने समय तक उसने पिल्स लीं और इस दौरान कौन-से हार्मोन उसके शरीर में गए।

यह तथ्य ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स पर रिसर्च कर रही एक यूरोपीय कंपनी की एक स्टडी में उभर कर सामने आया। यह स्टडी लगभग 60,000 यूरोपीय महिलाओं पर की गई थी। गौरतलब है कि इनमें से 21 फीसदी महिलाएं पिल्स का सेवन बंद करने के एक साइकिल बाद ही प्रेग्नेंट हो गईं। इतना ही नहीं, शेष महिलाओं में तीन साइकिल्स के बाद यह रेट 45.7 तक पहुंच गया। जबकि एक साल यानी 13 साइकिल्स के बाद बची हुई कुल महिलाओं में से 79.4 महिलाएं भी प्रेग्नेंट हो गईं।

साथ ही, रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि पिल्स का सेवन रोकने के बाद हर पांच में से एक महिला, जो कि पहले बारह महीनों में कंसीव नहीं कर पाई, उनमें से 45 फीसदी महिलाओं ने दूसरे साल में कंसीव कर लिया। इस तरह से लगभग 88.3 महिलाएं सफलतापूर्वक मां बनने में कामयाब रहीं।

इसी विषय पर हुए अन्य शोधों में यह बात भी सामने आई है कि लंबे समय तक पिल्स लेने वाली महिलाओं में कम समय के लिए पिल्स लेने वाली महिलाओंकी अपेक्षा प्रेग्नेंसी रेट कम पाया जाता है। लेकिन यहां यह जानना रोचक होगा कि इसकी असली वजह पिल्स का अधिक सेवन नहीं, बल्कि उनकी बढती हुई उम्र होती है। 35 वर्ष से अधिक उम्र व स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में आमतौर पर यह दर कम ही पाई जाती है। इतना ही नहीं, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का प्रेग्नेंसी रेट पर कोई नेगेटिव इफेक्ट नहीं होता।

स्वाइन फ्लू से डरते हैं? तो यह पढिए

इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वाइन फ्लू एक घातक बिमारी है, लेकिन यह भी सच है कि स्वाइन फ्लू का इलाज सम्भव है और थोड़ी सी सावधानी स्वाइन से बचा सकती है. लेकिन दुनिया में कई ऐसी बिमारियाँ हैं जो स्वाइन फ्लू से कहीं घातक है, लेकिन उनकी उतनी चर्चा नहीं होती जितनी स्वाइन फ्लू की होती है.

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार से लगभग 40 बच्चों की मौत हो गई थी लेकिन यह खबर कभी सुर्खी नहीं बन पाई.

और अब एक नई बिमारी का पता चला है जिसे मंकी मलेरिया कहा जाता है. इस बिमारी की वजह से मलेशिया के लोगों की जान के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है. पहले यह माना जाता था कि यह बिमारी सिर्फ बंदरों को ही होती है लेकिन अब इस बिमारी के से इंसानों के ग्रस्त होने के मामले सामने आ रहे हैं. और इस तरह से पाँचवें प्रकार की मलेरिया का उद्भव हुआ है.

दुनिया में मलेरिया से प्रति वर्ष 10 लाख लोगों की मौत होती है. लेकिन अब मलेरिया अफ्रीका और एशिया महाखंड में रहने वाले लोगों के जीवन का एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए इस बात की इतनी चर्चा नहीं होती.

मलेरिया के विभिन्न प्रकारों में से मलेरिया फाल्सीपारम सबसे घातक होता है. लेकिन यह नई किस्म की मलेरिया जिसे पी. नोलेसी कहा गया है भी काफी घातक है.

पी. नोलेसी या जिसे मंकी मलेरिया भी कहा जाता है कि किटाणुँ शरीर में हर 24 घंटें के बाद फिर से पनपते रहते हैं, और इसलिए इसलिए यह रोग काफी घातक साबित हो सकता है.

अभी तक इस रोग से ग्रस्त लोगों के कम मामले ही प्रकाश में आए हैं, परंतु चिकित्सकों का मानना है कि चुँकि इसके लक्षण आप पी. मलेरिया जैसे ही होते हैं इसलिए इसे आम मलेरिया ही समझ लिया जाता है.

क्यों होते हैं सास बहु के झगड़े

यह वर्षों से होता आया है और शायद आगे भविष्य में भी होता रहेगा. हम बात कर रहे हैं सास बहु की लड़ाई की. जी नहीं, यह बालाजी के किसी धारावाहिक से संबंधित लेख नहीं है, परंतु वास्तविक जीवन की एक सच्चाई है. एक ऐसी सच्चाई जिसकी वजह से लाखों वैवाहिक जीवन प्रभावित हैं और अब इसके पीछे की वजह जान ली गई है.

वजह ऐसी नहीं है जो किसी को पता ना हो परंतु इस बार इस बात की पुष्टि की गई है कि आखिर सास और बहु में किसी चीज को लेकर टकराव होता है और क्या इस टकराव को टाला जा सकता है?

अपनी नई पुस्तक में प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. टेरी एप्टर ने लिखा है कि पत्नी अथवा गर्लफ्रेंड भले ही कितना भी चाह ले की वह अपनी सास की तरह बनेगी परंतु उनके मन में एक दुराग्रह होता ही है और वह इससे बाहर नहीं आ पाती.

एप्टर ने आगे लिखा है कि आम तौर पति सास बहु के झगड़े में मूक दर्शक बन जाते हैं जबकि उनको उनके बीच के विवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभानी चाहिए.

अपनी शोध के लिए एप्टर ने 200 लोगों के साक्षात्कार लिए जिनमें से 49 जोड़े थे. शोध से पता चला कि करीब दो तिहाई महिलाओं को शिकायत थी कि उनकी अपनी सास से नहीं बनती. डॉ. एप्टर के अनुसार दोनों महिलाएँ सोचती हैं कि वे एक दूसरे को जानती और समझती हैं पर वास्तविकता कुछ और ही होती है.

डॉ. एप्टर के अनुसार तनाव के अधिकतर मामलों की जड़ मात्र गलतफहमी होती है लेकिन उन गलफहमियो को दूर नहीं किया जाता और इससे तनाव बढता रहता है. दोनों महिलाओं का मूल उद्देश्य अधिपत्य हासिल करना होता है जो इंसान के जिन में है.

Saturday, September 12, 2009

बच्चों के जन्म के बाद प्यार को जीवंत रखने के 5 तरीके


बच्चों के जन्म के बाद की दुनिया अलग ही होती है. कहते हैं बच्चों के जन्म से दाम्पत्य जीवन की नई शुरूआत होती है.

बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.

प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.

साथ में फिल्म देखें:

बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.

साथ में टहलने जाएँ:

यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.

खेल खेलें:

बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.

साथ खाना खाएँ:

यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.

एकांत ढूंढे:

छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.

दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.

अपने अंतरंग जीवन से बोरियत को दूर करें

क्या आपको लग रहा है कि आपका वैवाहिक जीवन निरसता से भर रहा है. तो आप इन कुछ उपायों को आज़मा कर देख सकते हैं. कुछ शीर्ष मनोवैज्ञानिकों ने वैवाहिक जीवन में समरसता बनाए रखने के आसान उपाय बताए हैं:
अपने प्रेम का इज़हार करना सीखें:
कभी कभी छोटी छोटी सी बातें भी बड़ा असर कर जाती है. जब आप ऑफिस में हों तो अपने मोबाइल से अपनी पत्नी के मोबाइल पर छोटा सा एसएमएस कर दें कि आपको उनकी याद आ रही है. इस तरह का प्रेम भरा संदेश जादू कर जाएगा. इस बात को कोई भी समझ सकता है कि ऑफिस के व्यस्तों पलों में किसी को अपने साथी की याद नहीं आती पर फिर भी यह एसएमएस जरूर्र असर दिखाता है.

या फिर कभी कभी एक छोटी सी पर्ची पर “आई लव यू’ जैसा छोटा सा संदेश लिखकर छोड़ दें. इसका भी काफी असर होगा.

पिकनिक पर जाएँ:
पर सिर्फ आप दो और कोई नहीं. यदि आप सयुंक्त परिवार में रहते हैं तो यह थोड़ा सरल हो जाता है क्योंकि आप अपने बच्चों को घर पर आसानी से छोड़कर जा सकते हैं. अन्यथा जब आपके बच्चे छुट्टियों में कहीं गए हुए हों तब यह कार्यक्रम बनाया जा सकता है.

लेकिन इस पिकनिक को मात्र आप दोनों तक सीमित रखें और प्यार का भरपूर आनंद लें.

प्यार भरे उपहार:
उपहार जरूरी नहीं कि महंगे ही हों. एक चॉकलेट भी अपना कमाल दिखा सकती है. परंतु इन छोटे छोटे उपहारों से कुछ पल बेहद हसीन और सुहावने हो जाते हैं.

आपसी समझ:
यह सबसे जरूरी है. आप दोनों में यदि बेहतरीन तालमेल है तो आपके जीवन का हरपल खुशनुमा हो जाता है, क्योंकि दोनों को ही एक दूसरे की कमज़ोरी पता होती है और दृढता भी. आपसी समझ को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ. एक दूसरे के बीच की झिझक को दूर करें, फिर चाहे वह सेक्स संबंधित बातें ही क्यों ना हो. मनोचिकित्सक मनोज शेखावत के अनुसार सेक्स संबंधित बातों का खुलकर आदान प्रदान पति और पत्नी के बीच की झिझक को ना केवल मिटाता बल्कि उन्हें एक दूसरे के करीब भी लाता है.

जानिए क्या है ‘सेक्स” का सही समय


क्या आप जानते हैं सेक्स का सही समय क्या है? बात अजीब लग सकती है लेकिन ब्रिटेन के नागरिकों की बात करें तो रात 10.15 बजे का समय सेक्स के सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि करीब आधे ब्रिटिशर इस समय अपने प्रेमी के साथ अंतरंग क्षण बीता रहे होते हैं.

सेक्स के लिए दूसरा सबसे उपयुक्त समय है
शुक्रवार रात 9 बजे


द डेली एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार कुछ संशोधकों ने करीब 5000 लोगों का सर्वे कर उपरोक्त नतीजा निकाला. लेकिन रात 10.15 का समय ही सेक्स के लिए उपयुक्त क्यों? अधिसंख्य ब्रिटिश पुरूषों का जवाब था – ताकि रात 10.30 बजे फूटबाल की हाईलाइट्स बिना किसी व्यवधान के देखी जा सके!

इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सेक्स के लिए दूसरा सबसे उपयुक्त समय है शुक्रवार रात 9 बजे और तीसरा सबसे उपयुक्त समय है रविवार सुबह 9.30 बजे.

लेकिन क्या अंतरंग क्षणों को पहले से तय समय में बांधा जा सकता है. यह सर्वे कराने वाली साइट के प्रवक्ता का कहना है कि – इस सर्वे से पता चलता है कि प्यार खत्म हो गया है. अब लोग अपनी सुविधा के अनुसार सेक्स करते हैं. आज लोगों की जिंदगी में सेक्स का अधिक महत्व नहीं रह गया है.

Tuesday, September 1, 2009

रिलेशनशिप रहेगी सदा जवां

कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो शादीशुदा जिंदगी को आप आसानी से जवां बनाए रख सकते हैं। आइए देखें कौन सी बातें हैं ये :


सेक्स न भूलें
हमेशा इस बात का ध्यान रखिए कि सेक्स कभी भी आपकी प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर ना हो। इसके लिए आपको पहले से ही यह तय करना होगा कि आपके प्यार करने का वक्त क्या होगा। भले ही यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन सेक्सुअल लाइफ को स्मूद रखने के लिए हैं।

तारीफ करें
अपने पार्टनर को रोजाना किसी न किसी बात के लिए कॉम्प्लिमेंट देते रहें। इससे आपकी रिलेशनशिप को सपोर्ट मिलेगा। साथ ही इससे आपकी उन दिनों की यादें ताजा बनी रहेंगी, जब आप शादी से पहले एक-दूसरे के साथ छिप-छिपकर रोमांटिक वक्त बिताया करते थे।

मददगार बनें
घर का काम किसी भी कपल के बीच झड़प की वजह बन सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप पहले ही अपना काम बांट लें। इससे आप साथ में काम करेंगे और बहस भी नहीं होगी। खास बात यह है कि अगर आप घर के काम में पत्नी की मदद करेंगे, तो उसकी सेक्स इच्छा बढ़ जाएगी। दरअसल, घर का काम महिलाओं की सेक्स इच्छा कम करने की इकलौती वजह है।

स्पेशल बेडरूम
आपका बेडरूम आपके सपनों की दुनिया की तरह होना चाहिए। उसका लुक ऐसा होना चाहिए मानो वह आपको इंवाइट कर रहा हो। इसके लिए आप रूम में सेंट वाली कैंडल्स और अपनी पिक्चर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि बेडरूम में लैपटॉप, टीवी और किसी भी दूसरे काम पर बैन होना चाहिए।

डिस्कस करें
अगर आप अपने किसी फ्यूचर प्लान को लेकर सहमत नहीं हैं, तो इस पर डिस्कशन किया जा सकता है। ध्यान रहे कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने से बात बिगड़ सकती है। इसलिए आपसी प्रॉब्लम्स को प्यार से ही सुलझाने की कोशिश करें।

रोमांस विद डांस
कभी-कभी लाइट म्यूजिक पर डांस करना आपको फिर से पुराने दिनों की याद दिला सकता है। साथ में डांस करने से आपके दिमाग के साथ बॉडी का भी मिलन होता है। इस तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज से बॉडी में डोपेमाइन रिलीज होता है और खुशियों में बढ़ोतरी होती है। इसका असर आपको बेडरूम में देखने को मिलेगा।

वह क्या है जो विवाह को टिकाए रखता है?


क्या प्यार विवाह का सबसे महत्वपूर्ण अंग है? क्या प्यार की वजह से ही विवाह लम्बे समय तक टिकते हैं? यदि ऑस्ट्रेलिया में करवाए गए एक सर्वे के नतीजों पर गौर करें तो ऐसा नहीं है. इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि विवाह को बचाए रखने में प्यार का वस्तुत: कोई योगदान नहीं होता, वरन जो चीजें विवाह संबंध बनाए रखने में कारगर साबित होती हैं वे हैं उम्र, पहले के संबंध और धुम्रपान और शराब पीने जैसी आदतें.

यह शोध ऑस्ट्रेलिया नेशनल विश्वविद्यालय के संशोधकों ने की और इसके लिए 6 साल तक 2500 विवाहित अथवा एक साथ रह रहे जोड़ों के ऊपर नज़र रखी गई. इस संशोधन से पता चला कि वह एक चीज जो तय करती है कि जोड़े साथ में रहेंगे कि नहीं वह है – पैसे.

एक ऑस्ट्रेलियन अखबार की खबर के अनुसार एक सर्वे से जुड़े संशोधकों ने यह भी पाया कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाले कुल विवाह या लीव-इन-रिलेशनशिप के ¼ केस 6 साल के भीतर टूट जाते हैं. 25 वर्ष आते आते लगभग आधी शादियाँ टूट जाते है.

शोध में यह भी पाया गया कि यदि कोई पति अपनी पत्नी से 9 साल या अधिक बड़ा हो अथवा यदि किसी पुरूष ने 25 वर्ष आयु से पहले शादी की हो तो उनकी शादी टूटने के आसार दूगने अधिक होते हैं. इसके अलावा यदि किसी महिला को बच्चे प्राप्त करने की तीव्र आकांक्षा हो तो भी शादी अधिक नहीं टिकती.

यह शोध ऑस्ट्रेलिया के समाज के ऊपर आधारित है और पूरे विश्व की सोच को परिलिक्षित नहीं करता है. विशेषरूप से भारत जैसे देश की संस्कृति ऑस्ट्रेलिया की संस्कृति से काफी अलग है. इसलिए इन नतीजों को भारत के ऊपर भी लागू नहीं किया जा सकता.

स्वाइन फ्लू से शिशु को बचाएँ – स्तनपान कराएँ


क्या स्वाइन फ्लू से ग्रस्त माता को अपने शिशु को स्तनपान कराना चाहिए? जवाब है हाँ. और इसके पीछे की मूल वजह यह है कि यदि माता को स्वाइन फ्लू है तो बहुत सम्भव है कि उसके शिशु को भी यह बिमारी लग चुकी होगी चाहे वह उसे स्तनपान कराए या नहीं.

ब्रैस्टफीडिंग प्रोमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया और वर्ल्ड एलायंस फोर ब्रैस्टफीडिंग एक्शन ने स्वाइन फ्लू से ग्रस्त माता द्वारा स्तनपान कराए जाने का समर्थन किया है.

स्तनपान शिशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है. माता के दूध की वजह से शिशु का शरीर इस तरह के इंफैक्शन से लड़ने के लिए ताकत हासिल करता है. इसलिए इंफ्लूएंजा जैसी बिमारियों से बचाव के लिए स्तनपान कराना अतिआवश्यक है.

यदि माँ के शरीर में किसी खास बिमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता ना हो तो भी उसके दूध से शिशु वह क्षमता प्राप्त कर सकता है.

चिकित्सकों का तो यहाँ तक कहना है कि स्वाइन फ्लू के फैलाव के दौरान माता को स्तनपान कराने की मात्रा बढा देनी चाहिए.

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए शिशु के आसपास का वातावरण स्वच्छ रखना चाहिए और अपने हाथों को लगातार धोते रहना चाहिए. यह ध्यान रहे कि कम से कम लोग शिशु के पास जाए और जो भी उसे हाथ लगाए उसके हाथ धुले हुए हों.

फाँसी से पहले बलात्कार !

ईरान के बैसील मिलिशीया में फाँसी की सजा पाई युवती को तब तक फांसी नहीं दी जाती जब तक कि यह साबित ना हो जाए कि वह कुँआरी नहीं है.

खबर के अनुसार ईरान की जेलों में फांसी की सजा पाई कुँआरी कन्याओं के साथ पहले बलात्कार किया जाता है और फिर उन्हें फांसी दी जाती है. यह खुलासा इस मिलिशीया से जुड़े एक गार्ड ने किया. इस गार्ड ने एक अखबार को यह जानकारी दी कि जब वह 18 वर्ष का था तब एक सजा पाई लड़की के साथ उसका जबरदस्ती निकाह करवाया गया और उसने उस लड़की के साथ सहशयन किया, उसके बाद उस लड़की को फांसी दे दी गई.

ईरान के इस्लामिक कानून के अनुसार कुँआरी कन्या को फांसी नहीं दी जा सकती. इसलिए ऐसी किसी भी लड़की का पहले जबरदस्ती निकाह करवाया जाता है, जिसे वैध माना जाता है. और फिर उसे अपने कथाकथित दूल्हे के साथ सहशयन करवाया जाता है और फिर अगले दिन फांसी दी जाती है.

इस तरह से फांसी की सजा पाई युवतियों के लिए जिंदगी नर्क समान बन जाती है और उन्हें एक नहीं बल्कि कई सजाएँ मिल जाती है. उस गार्ड ने बताया कि इस अत्याचार से कई युवतियाँ मानसिक संतुलन भी खो देती हैं.

ईस्लामिक देशों में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है. और ईरान जैसे अपेक्षाकृत अधिक प्रगतिशील देश में ऐसे कानून का होना आश्चर्यजनक है.

70000 वर्ष पहले इंसान खत्म हो सकते थे!


सन 2008. पृथ्वी पर इंसानों की संख्या में खतरनाक स्तर तक वृद्धि हो रही है और यह वृद्धि कम होने के कोई आसार नजर नही आ रहे हैं. विज्ञान की प्रगति ने इंसानों की औसत आयु को बढा दिया है और मृत्युदर घट रहा है और जन्मदर लगातार बढ रहा है.

आज से 70000 वर्ष पहले. पृथ्वी पर मात्र 2000 इंसान बचे थे और वे तेजी से मृत्यु की ओर बढ रहे थे. इंसानों की नस्ल समाप्त होने की कगार पर थी.

एक जेनेटिक शोध के अनुसार 70000 वर्ष पर पहले दूनिया मे मात्र 2000 इंसान ही बचे थे और वे अफ़्रीका के सुदूर जंगलों मे रहते थे. भयंकर सूखे, विपरीत परिस्थितियों, हिंसक जानवरों के बढते प्रकोप और बाढ की वजह से इंसानों की नस्ल खत्म होने की कगार पर थी.

यह शोध अमरीका की स्टेनफॉर्ड विश्वविद्यालय ने की है. शोध के अनुसार इंसानों की पहली नस्ल का उद्भव अफ़्रीका के प्रदेशों मे हुआ था और फिर धीरे धीरे समग्र विश्व में उनका फैलाव हुआ था. इस शोध मे शामिल रेमबेम मेडिकल इंस्टिट्यूट के डोरोन बेहर, और आईबीएम के शेरोन रोसेट के अनुसार पत्थरयुग के शुरूआत के पहले इंसानों की बस्तियाँ छोटे छोटे समूहों मे विभाजित हो गई थी. लेकिन पत्थरयुग की शुरूआत के साथ ही इंसान एक दूसरे के सम्पर्क मे आने लगे और बडे समूह मे रहने लगे.

आज से करीब 1लाख 35 हजार साल पहले भयंकर सूखे ने इंसानों की बडी आबादी का नाश कर दिया था. और उनकी जनसंख्या काफी घट गई थी. और करीब 70000 साल पहले बहुत थोडी संख्या में ही इंसान बचे थे. लेकिन इसके बाद इंसानों के कुछ समूह अफ़्रीका के दुर्गम स्थलों से स्थानांतरित होकर दूनिया के दूसरे कोनों तक पहुँचने लगे और इससे उनका सुमूल नाश होने से बच गया.

आज दूनिया में करीब 6 अरब 60 करोड़ इंसान रहते हैं और कोई भारी विनाशलीला ही उनका खात्मा कर सकती है.

कैसे सेक्स है आपके स्वास्थ्य के लिए उपयोगी

सेक्स मानसिक तनाव को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए अति उपयोगी है. परंतु इसके अलावा भी कई ऐसे स्वास्थ्यकारी गुण हैं जो सेक्स से जुड़े हैं. स्खलन के दौरान हमारा शरीर कई ऐसे हार्मोन प्रवाहित करता है जिससे शरीर निरोगी रहता है.

दर्द से मुक्ति:
सेक्स सबसे अच्छे पेन किलर में से एक है. स्खलन के दौरान हमारा शरीर एंड्रोफाइंस छोडता है जो रीढ की हड्डी का दर्द कम करता है इसके अलावा कमर दर्द से भी राहत मिलती है.

रक्त प्रवाह:
स्खलन के दौरान हमारा रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, सांसे तेज चलने लगती है और रक्तचाप बढ जाता है. दिमाग को अधिक मात्रा में प्राणवायु मिलती है. इससे हमारा शरीर सुदृढ और निरोगी रहता है.

तनाव मुक्ति:
सेक्स से डिप्रेशन और तनाव से मुक्ति मिलती है. स्खलन के दौरान सेरोटोनिन और एंड्रोफाइंस प्रवाहित होते हैं जो खुशी के हार्मोन हैं. इससे हमें सुखद अनुभव होता है. तनाव से मुक्ति मिलती है.

सबसे अच्छी कसरत:
सेक्स सबसे अच्छी कसरत होती है. इससे स्नायू मजबूत बनते हैं. कैलरी का नाश होता है और कोलेक्स्ट्रोल नियंत्रित रहता है. कमर दर्द, घूटनों के दर्द और हाथों और पैरों की मजबूती के लिए सेक्स से अच्छी कसरत और कोई नही है.

मानसून में सेक्स: 5 तरीके खास पलों का आनंद लेने के


बरसात का मौसम है तो प्रेम की बातें होनी स्वाभाविक ही है! जब बारिश की फुआरें रोमांचित कर रही हों तो अपने साथी के साथ बाहर निकल जाएँ और इस मौसम का आनंद लें. मानसून के दौरान प्रेम और सेक्स का आनंद उठाने के कई तरिके हो सकते हैं. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

प्रेम में भीगना:
अपने साथी के साथ बारिश में भीगने का आनंद उठाएँ. और कुछ नहीं तो छत पर ही चले जाएँ. उसके बाद साथ स्नान का आनंद लें और साथ में प्रेम का भी.

लम्बी ड्राइव:
यदि आपको लोंग ड्राइव पसंद है तो मानसून के समय में तो इसका रोमांच दुगना हो जाता है. अपने साथी के साथ लोंग ड्राइव पर निकल जाएँ. ठंडे मौसम और बारिश की फुआरों के बीच प्यार भरी बातों का आनंद लें. उसके बाद आप दोनों ही जल्द से जल्द घर लौटना चाहेंगे!

गर्म अल्पाहार:
मानसून के मौसम में गर्म अल्पाहार का आनंद ही कुछ और होता है. प्रेम भरी बातों के बीच गर्मागर्म भुट्टे का आनंद उठाएँ. साथ खाएँ और आनंद उठाएँ.

ट्रेकिंग और केम्पिंग:
इस मौसम में ट्रेकिंग खतरनाक हो सकती है लेकिन इसका अपना रोमांच भी है. यदि ट्रेकिंग ना भी हो तो किसी दुरस्थ स्थान पर केम्प का मज़ा लिया जा सकता है. और भीगे मौसम में अलाव की गर्मी में आप प्रेम को नया आयाम भी दे सकते हैं.

गर्म मौसम और फिल्म:
सप्ताहांत है तो घर जल्दी आने की सोच सकते हैं और उसके बाद डीवीडी पर कोई रोमांटिक फिल्म साथ देखने का कार्यक्रम बना सकते हैं. फिल्म देखने के लिए अपने बेडरूम को चुनें और रजाई ओढकर फिल्म और "गर्म मौसम" में प्रेम का मज़ा लें.

फोरप्ले के दौरान की जाने वाली आम गलतियाँ


फोरप्ले, सेक्स का एक अहम हिस्सा है जब युगल अपने आप को उन अंतिम चरम क्षणों के लिए तैयार करते हैं. लेकिन फोरप्ले के दौरान कुछ ऐसी गलतियाँ हो सकती है जिससे आपके सेक्स जीवन में निरसता व्याप्त हो जाए. कुछ ऐसी ही गलतियाँ निम्नलिखित हैं.

जल्द निपटारा:
फोरप्ले सेक्स का एक हिस्सा है ना कि सेक्स के पहले का शुरूआती दौर. कई युगल, विशेषरूप से पुरूष, फोरप्ले के दौरान हडबडी दिखाते हैं. यहाँ यह समझना जरूरी है कि पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं को सेक्स के लिए तैयार होने में समय लगता है और अच्छा फोरप्ले उनके लिए बेहद जरूरी होता है. इसलिए फोरप्ले के दौरान हडबडी करने से बचना चाहिए. फोरप्ले यदि थोडा अधिक समय तक चले तो भी कोई हर्ज नहीं है बल्कि यह चरम क्षणों के दौरान आपके रोमांच को बढाता ही है.

काटना:
फोरप्ले के दौरान उत्तेजित होकर अथवा मजाक में अपने साथी के गले अथवा कान को काटना एक आम प्रवृति है. लेकिन इस दौरान ध्यान ना रखने से आपके साथी को चोट लग सकती है. कभी भी उत्साह में आकर होश ना खोएँ और ध्यान रखें की आपके काटने से साथी को चोट ना लगे.

नाखुनों का हमला:
महिलाओं के हाथों के नाखुन आम तौर पर बढे हुए होते हैं. प्रेम के क्षणों के दौरान महिलाएँ अपने नाखुनों का इस्तेमाल करती हैं. यहाँ भी ध्यान देने योग्य बात है कि उनके नाखुनों से कहीं उनके पुरूष मित्र को चोट ना लग जाए. यह ना केवल प्रेम के उन क्षणों को पलभर में समाप्त कर देता है बल्कि आपके रोमांचक पल दवाई लगाने में लग सकते हैं.

स्नायूओं का खिंचाव:
सेक्स एक अच्छी कसरत जरूर है, लेकिन कसरत भी एक हद तक ही उपयोगी होती है. कसरत करने का भी एक प्रकार होता है और उसका ध्यान ना रखने से चोट लग सकती है.

सेक्स के दौरान भी ध्यान रखें की उत्साह में आकर आप कोई इस तरह का आसन ना अपना लें जिससे आपके स्नायूओं पर अनावश्यक बोझ पडे और मोच तथा सूजन आ जाए.

नींद में खो जाना:
फोरप्ले छोटा ना हो यह जरूरी है, लेकिन इतना लम्बा भी ना हो कि आप चरम आनंद प्राप्त करने के लिए शयनकक्ष में जाएँ और जाते ही थकान के मारे सो जाएँ. यकीन मानिए, कई युगलों को यह परेशानी रहती है कि फोरप्ले के बाद वे दोनों इतना थक जाते हैं, नींद अपने आप आ जाती है. वैसे कोई भी यह नहीं चाहेगा.

5 बातें जो अंतरंग क्षणों को बदरंग बना सकती है

अपने साथी के साथ अंतरंग क्षणों का आनंद लेते समय आसपास के वातावरण और चीजों का ध्यान ना रखा जाए तो ये अंतरंग क्षण बदरंग हो जाते हैं. कुछ बातें तो ऐसी है जो एकदम सामान्य लग सकती हैं, लेकिन इनका काफी बुरा असर हो सकता है.

मोबाइल फोन पर बात:
सोचिए जब आप अपने साथी के साथ प्रेम का आनंद ले रहे हों और फोन की घंटी बज जाए! कभी कभी कॉल इतना महत्वपूर्ण होता है कि उसे काटा भी नहीं जा सकता और बात करनी ही पड़ती है. लेकिन यह आप दोनों के मूड को बिगाड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखता. इसलिए जब आप अपने साथी के साथ हों तो मोबाइल फोन या तो स्विच ऑफ कर दें या फिर वोइसमेल चालू कर दें.

तेज संगीत:
हो सकता है आपको संगीत पसंद हो, यह भी हो सकता है कि आपके साथी को भी संगीत पसंद हो, लेकिन अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले तेज संगीत आप दोनों के मूड को खराब कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले खुद को तैयार करने में समय लगता है और इस दौरान तेज संगीत इसमें बाधा ही उत्पन्न करता है. इसलिए अच्छा हो कि धीमा संगीत बजाएँ अथवा तो आपस में ही बात करें.

हड़बड़ी:
प्रेम में हडबडी के लिए कोई स्थान नहीं है. यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक तेजी से उत्तेजना प्राप्त करते हैं लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू रखना प्रेम में अति आवश्यक होता है. शुरूआत में ही अत्यधिक उत्तेजना का प्रदर्शन आपकी साथी के मूड को खराब कर देगा और उन्हें लगेगा कि आपको सिर्फ सेक्स से मतलब है.

जबरदस्ती:
यह बात पुरूषों के व्यवहार पर लागू होती है. चुँकि पुरूष अपेक्षाकृत अधिक तेजी से उत्तेजित होते हैं, यदि वे अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाएँ तो लगभग जबरदस्ती करने लगते हैं, जो कि गलत है. यदि महिला साथी तैयार ना हों तो उनकी भावनाओं को समझकर “शुभरात्री’ कहना सही रहेगा. क्योंकि जबरदस्ती से भरी गई हामी भविष्य के लिए कड़वाहट छोड़ जाती है.

बेवजह शर्म:
यह बात महिलाओं पर अधिक लागू होती है. बेवजह की शर्म अंतरंग पलों को बिगाड़ सकती हैं, इसलिए अपने साथी के साथ खुलकर पेश आएँ और अपनी ईच्छाओं के बारे में बात कीजिए.

अपने साथी से सीखें सेक्स की बातें!

सेक्स के संबंध में अनेकों किताबें तथा जानकारियाँ उपलब्ध हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं आपका साथी ही आपके लिए सबसे बड़ा सेक्स विशेषज्ञ हो सकता है. आप खुद एक दूसरे से काफी बातें सीख सकते हैं.

प्यार की शुरूआत:
महिलाएँ अपने पुरूष मित्र से सीख सकती हैं कि प्यार की शुरूआत कैसे की जाए. पुरूष सेक्स के प्रति महिलाओं से अधिक आग्रही होते हैं. प्यार की शुरूआत अधिकतर मामलों में पुरूष की पहल से ही होती है. महिलाएँ यहाँ यह सीख सकती हैं कि कैसे अपने साथी को सेक्स के लिए मनाया जाए.

कई मामलों में ऐसा होता है कि महिलाएँ सेक्स के प्रति उदासीन नहीं होती परंतु शुरूआत करने से हिचकती हैं, यहाँ वे अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं कि सही समय पर सही तरीके से कैसे सेक्स का आग्रह किया जाए.

फोरप्ले ही सबकुछ है:
पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि कैसे फोरप्ले का आनंद उठाया जाए. पुरूष नैसर्गिक रूप से सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं, इसलिए वे फोरप्ले का पूरा आनंद नहीं उठा पाते और इससे उनकी महिला मित्र अथवा पत्नी को भी पूर्ण संतुष्टि नहीं मिलती.
महिलाएँ फोरप्ले का अधिक आनंद उठाती हैं और उनके लिए फोरप्ले सेक्स के जितना ही आवश्यक होता है. यहाँ पुरूष अपनी महिला मित्र से सीख सकते हैं कि फोरप्ले सेक्स से पहले की कसरत नहीं बल्कि सेक्स का अभिन्न अंग है.

नए विचार:
सेक्स में विवधता ना हो तो एक समय के बाद सेक्स के प्रति रूचि कम होने लगती है. दांपत्य जीवन के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. इसलिए सेक्स में विवधता बनाए रखनी चाहिए. यहाँ भी महिलाएँ अपने पुरूष साथी से सीख सकती हैं.

सेक्स में विवधता के लिए पुरूष अधिक आग्रही होते हैं और हमेशा कुछ नया करना चाह्ते हैं. महिलाएँ बदलाव तथा कुछ नया करने के प्रति उतनी उत्साहित नहीं होती. लेकिन सेक्स में बदलाव ना हो तो वह एक रोजमर्रा का काम बन जाता है. परंतु महिलाएँ अपने साथी की मदद से सेक्स के नए आयाम खोज सकती हैं.

संतोष है महत्वपूर्ण :
सेक्स पुरूष तथा महिला दोनों के लिए आवश्यक होता है और सुकून प्राप्त करना और देना प्यार के आधार स्तम्भ है. हम सब यह बात जानते हैं लेकिन पुरूष यहाँ महिलाओं से कम नम्बर पाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुरूष नैसर्गिक रूप से थोडे अधीर होते हैं. वे सेक्स से तुरंत आनंद प्राप्त करना चाहते हैं तथा अपनी संतुष्टि को प्राप्त करने के लिए अपनी साथी की संतुष्टि को भूल जाते हैं.

यहाँ भी पुरूष महिलाओं से सीख सकते हैं. आनंद और संतुष्टि आवश्यक है लेकिन केवल एक के लिए नहीं दोनों के लिए. आम तौर पर देखा गया है कि महिलाएँ अपने पुरूष मित्र की संतुष्टि के लिए अधिक आग्रही होती हैं बजाय स्वयं अपनी. इसलिए यदि दोनों एक दूसरे की संतुष्टि का पूरा ध्यान रखें तो सेक्स जीवन आनंदमयी हो जाता है.

आदर्श "सेक्स" साथी कैसे बनें?


यह बात सही है कि हर व्यक्ति की अपनी ईच्छाएँ और प्राथमिकताएँ होती हैं, इसलिए एक किसी एक व्यक्ति के लिए आदर्श "सेक्स" स्थितियाँ किसी अन्य के लिए कोई मायने नहीं रखती. परंतु फिर भी कुछ ऐसे छोटी छोटी बातें हैं, जिन पर ध्यान देने से सेक्स जीवन बेहतर हो सकता है.

यदि आप कुछ "आउट ऑफ बॉक्स" बातों को ध्यान रखें तो अपने साथी के साथ बिताए जाने वाले कुछ खास पल यादगार बने रहेंगे.

संतुष्टि देने का प्रयत्न:
सेक्स एक ऐसी क्रिया है, जिसमें मात्र प्राप्ति की आशा नहीं रखी जा सकती. इसलिए हमेशा प्रयत्न करें कि आपके साथी को पूर्ण संतुष्टि का अनुभव हो. यदि आप दोनों ऐसा सोचेंगे तो आपके वे पल यकीनन यादगार बनते रहेंगे.

हो सकता है कि कुछ सेक्सुअल चीजें आपको अच्छी ना लगती हों, परंतु आपके साथी को लगती हों, तो प्रयत्न करे कि कभी कभी आपके साथी की खुशी के लिए आप विविध प्रयोग करते रहें. जरूरी नही कि आप हमेशा ऐसा करें, परन्तु कभी कभी तो ऐसा किया ही जा सकता है.

स्वच्छता का ख्याल:
स्वच्छता का आग्रह सबका होता है. इसलिए अपने शरीर की जाँच करे और अनचाहे बालों को हटा दें. स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ देह "सेक्स" के लिए सर्वाधिक जरूरी है. उन लम्हों को और भी बेहतर बनाने के लिए सुगंधित इत्र का प्रयोग भी कर सकते हैं.

नवीनता बनाए रखें:
सेक्स को मात्र करने के लिए ना करें. सेक्स कोई दैनिन्दिनी का कार्य नहीं है. यह संतुष्टि और प्रजनन के लिए आवश्यक क्रिया है. इसलिए इन पलों का हमेशा आनंद लेना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि विविधता बनी रहे.

एक ही प्रकार की क्रिया और आसन से सेक्स एक नीरस क्रिया बन जाती है.

अपने वजन पर नजर रखें:
शरीर में "ठीक" व्यक्ति भी सेक्स का आनंद तो उठा ही सकते हैं, लेकिन फिर भी यह भी सत्य है कि यदि दोनों व्यक्तियों का शारीरिक वजन संतुलित हो.

तो चैक करें कि कहीं आपका वजन बढ तो नही रहा है! यदि बढता हुआ लगे, तो आज से ही कसरत करनी शुरू कर दीजिए. क्योंकि संतुलित वजन स्वास्थ्य और सेक्स दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है.