एक नई स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि वे कौन सी चीजें हैं जिनसे लगभग सभी संस्कृतियों में किसी महिला को शारीरिक तौर पर खूबसूरत माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की सुंदरता के ये अहम पैमाने हैं जवां लुक, लंबाई, पतली छरहरी कमर और लंबी बांहें हैं।
न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी, हॉन्गकॉन्ग पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी और तियानजिन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों की एक इंटरनैशनल टीम ने इस बारे में स्टडी की। टीम ने दावा किया है कि शरीर की बनावट से महिलाओं की सुंदरता को आंकने से जुड़ी यह अब तक की सबसे बड़ी स्टडी है।
स्टडी में शामिल प्रोफेसर रॉब बूक्स ने कहा कि सुंदरता को लेकर की गई ज्यादातर स्टडीज धड़, कमर और नितंबों के आकार के आकलन पर ही आधारित रही हैं। लेकिन हमने अपनी स्टडी में पाया है कि बांहों की लंबाई और आकार भी सुंदरता के मामले में एक बड़ा पैमाना हैं। यह पूरे शरीर की बनावट और वजन में एक तरह से चार चांद लगाने का काम करता है। इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) और एचडब्ल्यूआर (हिप-टू-वेस्टरेश्यो) किसी भी महिला में आकर्षण के सबसे बडे़ पैमानों में से हैं।
Sunday, December 19, 2010
मैंने क्यों की शादी?
शादी को किसी भी इंसान की जिंदगी में नई शुरुआत माना जाता है, लेकिन आगे चलकर यह बेहद उबाऊ हो जाती है। एक सर्वेक्षण की मानें तो शादी के 10 साल के बाद जिंदगी बोझिल महसूस होने लगती है।
ब्रिटेन में हुए एक नए सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि शादी के 10 साल के बाद पति और पत्नी के बीच उस तरह का तालमेल नहीं रह जाता, जैसा शादी के ठीक बाद होता है। इस सर्वेक्षण में 3,000 शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं से उनकी राय ली गई और फिर इस नतीजे पर पहुंचा गया।
स्थानीय समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार, शोधकर्ताओं का कहना है कि पति और पत्नी एक-दूसरे को उस समय उबाऊ लगने लगते हैं, जब शादी को 10 साल पूरे हो जाते हैं। शादी के एक दशक पूरा होने के बाद पति-पत्नी के बीच पहले जैसा उत्साह नहीं रह जाता और वे रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी महसूस करने लगते हैं।
एक सर्वेक्षण के अनुसार, 'हर पांचवे दम्पति को यौन जीवन में भी निराशा लगने लगती है। सर्वेक्षण में शामिल 12 फीसदी लोगों का यह कहना है कि उन्हें याद नहीं कि पिछली बार उनके साथी ने कब उनकी तारीफ की थी। कई लोगों ने यह माना कि वे अक्सर सोचते हैं कि उन्होंने इस साथी (पति या पत्नी) से शादी क्यों की?'
ब्रिटेन में हुए एक नए सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि शादी के 10 साल के बाद पति और पत्नी के बीच उस तरह का तालमेल नहीं रह जाता, जैसा शादी के ठीक बाद होता है। इस सर्वेक्षण में 3,000 शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं से उनकी राय ली गई और फिर इस नतीजे पर पहुंचा गया।
स्थानीय समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार, शोधकर्ताओं का कहना है कि पति और पत्नी एक-दूसरे को उस समय उबाऊ लगने लगते हैं, जब शादी को 10 साल पूरे हो जाते हैं। शादी के एक दशक पूरा होने के बाद पति-पत्नी के बीच पहले जैसा उत्साह नहीं रह जाता और वे रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी महसूस करने लगते हैं।
एक सर्वेक्षण के अनुसार, 'हर पांचवे दम्पति को यौन जीवन में भी निराशा लगने लगती है। सर्वेक्षण में शामिल 12 फीसदी लोगों का यह कहना है कि उन्हें याद नहीं कि पिछली बार उनके साथी ने कब उनकी तारीफ की थी। कई लोगों ने यह माना कि वे अक्सर सोचते हैं कि उन्होंने इस साथी (पति या पत्नी) से शादी क्यों की?'
बीवी है खूबसूरत, तो बेटी होगी
क्या आप भी बेटी चाहते हैं? अगर हां, तो अपने लिए एक सुंदर पार्टनर तलाश कीजिए। क्योंकि एक शोध के मुताबिक सुंदर दिखने वाले जो
ड़ों की बेटी पैदा होने की संभावना ज्यादा होती है।
रिप्रोडक्टिव साइंसेज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सुंदर औरतों और मर्दों में कम सुंदर दिखने वालों की तुलना में बेटी होने की संभावना ज्यादा होती है।
लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स की विकासवादी मनोविज्ञानी एस. कानजवा ने मार्च 1958 में ब्रिटेन में जन्मे 1700 बच्चों का अध्ययन किया है। उन्होंने सभी बच्चों के बारे में उनके जीवन के अनेक स्तरों का अध्ययन किया। अध्ययन में यह देखा गया कि स्कूल और कॉलेज में इन बच्चों को उनके शिक्षकों ने सुंदर कहा या बदसूरत। और 45 साल की उम्र में इन्हीं लोगों से उनके बच्चों और बच्चों के लिंग के बारे में पूछा गया।
सभी आंकड़ों को जमा करने के बाद कानजवा ने पाया कि अध्ययन के लिए लिए गए नमूने वाले लोगों में से 84 प्रतिशत लोगों को बेटे और बेटियां दोनों हुई, जबकि जो लोग खूबसूरत नहीं थे उन्हें बेटे ज्यादा हुए।
कानजवा ने कहा कि आम तौर पर सुंदर होना कन्या शिशु तय करने के लिए एक मजबूत निर्धारक है। औसतन बदसूरत लोगों में से 56 में बेटे के माता-पिता बनने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
उनका मानना है कि हम बच्चों के लिंग को सुंदरता के साथ जोड़कर जिस लिंग के बच्चे चाहें पैदा कर सकते हैं। मर्दों के लिए यह बात हमेशा आसान रहती है क्योंकि वे शादी के रिश्ते में हों या फिर अफेयर की बात हो अपने लिए एक सुंदर पार्टनर ही खोजते हैं।
मगर औरतें सिर्फ अफेयर के लिए ही सुंदरता को देखती हैं, लंबे समय के बंधन के लिए वे हमेशा पैसे, सामाजिक स्थिति जैसी चीजों को देखती हैं।
रिप्रोडक्टिव साइंसेज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सुंदर औरतों और मर्दों में कम सुंदर दिखने वालों की तुलना में बेटी होने की संभावना ज्यादा होती है।
लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स की विकासवादी मनोविज्ञानी एस. कानजवा ने मार्च 1958 में ब्रिटेन में जन्मे 1700 बच्चों का अध्ययन किया है। उन्होंने सभी बच्चों के बारे में उनके जीवन के अनेक स्तरों का अध्ययन किया। अध्ययन में यह देखा गया कि स्कूल और कॉलेज में इन बच्चों को उनके शिक्षकों ने सुंदर कहा या बदसूरत। और 45 साल की उम्र में इन्हीं लोगों से उनके बच्चों और बच्चों के लिंग के बारे में पूछा गया।
सभी आंकड़ों को जमा करने के बाद कानजवा ने पाया कि अध्ययन के लिए लिए गए नमूने वाले लोगों में से 84 प्रतिशत लोगों को बेटे और बेटियां दोनों हुई, जबकि जो लोग खूबसूरत नहीं थे उन्हें बेटे ज्यादा हुए।
कानजवा ने कहा कि आम तौर पर सुंदर होना कन्या शिशु तय करने के लिए एक मजबूत निर्धारक है। औसतन बदसूरत लोगों में से 56 में बेटे के माता-पिता बनने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
उनका मानना है कि हम बच्चों के लिंग को सुंदरता के साथ जोड़कर जिस लिंग के बच्चे चाहें पैदा कर सकते हैं। मर्दों के लिए यह बात हमेशा आसान रहती है क्योंकि वे शादी के रिश्ते में हों या फिर अफेयर की बात हो अपने लिए एक सुंदर पार्टनर ही खोजते हैं।
मगर औरतें सिर्फ अफेयर के लिए ही सुंदरता को देखती हैं, लंबे समय के बंधन के लिए वे हमेशा पैसे, सामाजिक स्थिति जैसी चीजों को देखती हैं।
रिफ्रेश होगी सेक्स लाइफ
सेक्स करने से पहले आपको और आपके पार्टनर के बीच सेक्स से जुड़ी कुछ चीजों को लेकर आपसी समझ होना बेहद जरूरी है। एक- दूसरे के बारे में जाने- समझे बिना फिजकल रिलेशन बनाने से आप सेक्स को इंजॉय नहीं कर सकते। यानी कि आप एक- दूसरे को जितना ज्यादा जानेंगे, उतने ही अच्छे संबंध बना पाएंगे। आइए आपको बताते हैं कुछ जरूरी बातें, जो बेहतर रिलेशन बनाने के लिए बेहद जरूरी हैं:
कहीं भी, कभी भी
इस बात को कतई झुठलाया नहीं जा सकता है कि पुरुष कभी भी, कहीं भी सेक्स के लिए तैयार हो जाते हैं। दरअसल, सेक्स को लेकर उनकी सोच महिलाओं की तरह नहीं होती। इसलिए आपका पार्टनर जब भी सेक्स की डिमांड करता है, तो उसे पूरी करने की पूरी कोशिश करें। ध्यान रखें कि पुरुष रोमांस और सेक्स को अलग- अलग रखकर चलते हैं। उनके लिए इन दोनों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं होता। इसलिए अगर आपका पार्टनर फिजिकल रिलेशन चाहता है और उसका मूड रोमांस का नहीं है, तो भी उसको पूरा सहयोग दें। उनके इस अंदाज से इस निष्कर्ष पर न पहुंचे कि वह आपसे प्यार नहीं करता।
यू आर सेक्सी
सेक्स के दौरान अपने एक्सप्रेशन को छुपाएं नहीं। पार्टनर को हग करने से लेकर किस करने तक में उसका सहयोग करें। अगर आप बेड पर अपने पार्टनर की हेल्प नहीं करतीं, तो आपका रियल लाइफ में अच्छा होना मायने नहीं रखता। अच्छे सेक्स के लिए अपनी फेमिनन एनर्जी को बनाए रखें। अगर आप सेक्स के दौरान सुस्त रहेंगी, तो सेक्स संबंधों को भरपूर इंजॉय नहीं कर पाएंगी। अगर आपको अच्छा महसूस हो रहा है, तो अपनी फीलिंग्स खुलकर जाहिर करें।
बी ओपन
एक जरूरी चीज जो आपके लिए समझनी जरूरी है कि वह आपका दिमाग नहीं पढ़ सकते। इसलिए आप अपने पार्टनर से कुछ चाहती हैं, तो खुलकर जाहिर करें। बाद में यह शिकायत करना कि आपको तो हर चीज समझानी पड़ती है, गलत है। खुलकर उनको बताएं कि फिजिकल होने के दौरान आपको क्या पसंद है और क्या नहीं। यहीं नहीं, अपने ऐसे बॉडी पार्ट्स के बारे में भी बताएं, जिन्हें उनका छूना आपको अच्छा लगता है। इससे आपके साथ आपके पार्टनर को भी इस बात को लेकर संतुष्टि रहेगी कि वह जो कर रहे हैं, वह आपको अच्छा लग रहा है।
डोंट इग्नोर फैंटेसी
पुरुषों के दिमाग में सेक्स को लेकर नई - नई फैंटेसी चलती रहती है। उनको अपनी ओर आकर्षित करने का सबसे आसान तरीका है कि आप उनकी फैंटेसी को पूरी करने में उनका साथ दें। लेडीज को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि पुरुषों की सेक्स में उनसे ज्यादा रुचि होती है और वे इसे खुलकर जाहिर भी करते हैं। यही नहीं , वे सेक्स को अपनी फैंटेसी के मुताबिक करने की इच्छा भी जाहिर करते हैं। जबकि महिलाएं अपनी इच्छा बताती ही नहीं हैं और अगर बताती हैं , तो बहुत कम शब्दों में जाहिर करती हैं। लेकिन इस संकोच से बाहर निकल आइए और खुलकर अपने पार्टनर को बताएं कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं। अगर आप उनको खुलकर नहीं बताएंगे , तो आपका पार्टनर कैसे समझ पाएगा कि आपको फिजिकल रिलेशनशिप के दौरान क्या अच्छा लगता है ? अगर नहीं कह पा रही हैं , तो अपने ऐ क्शन या इंडिकेशन से उनको अपने ड्रीम ऐ क्शन सीन समझा सकती हैं।
वैराइटी जरूरी है
जिस तरह रोजमर्रा में वैराइटी की जरूरत होती है , वैसे ही सेक्स में भी वैराइटी बनाए रखें। एक जैसी ऐ क्टविटीज अपनाने से आप लंबे समय तक सेक्स को एंजॉय नहीं कर सकती। इसलिए इसमें भी नए - नए रास्ते तलाशते रहें। अगर आपका पार्टनर कोई नई पॉजिशन सजस्ट करे , तो उनको गौर से सुनें , समझें और अपनाएं। नहीं , मुझे नहीं जानना व समझना जैसी आदतों को बदल डालें। नई चीजों को एक बार जरूर ट्राई करें। बाद में उन्हें लाइफ में अपनाना और न अपनाना तो आपके अपने हाथ में ही है।
झगड़ों का सल्यूशन
सेक्स आपके प्यार व फीलिंग्स को अपने पार्टनर को जाहिर करने का सबसे आसान तरीका है। इसमें बनी गर्मजोशी आपके प्यार को दर्शाती है। किसी भी रिलेशनशिप में लड़ाई और वाद - विवाद होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन आप इन झगड़ों को पल भर में अपने प्यार से मिटा सकते हैं। बल्कि आपको यह जानकर सरप्राइज होगा कि किसी विवाद के बाद आपका प्यार दोगुना हो जाता है। हालांकि शुरू में आपको इस इमोशनल अटैचमेंट का अंदाजा नहीं होगा , लेकिन आगे चलकर आपको इस प्यार की गहराई पता चलेगी। अगर आपको ऐसा लगता है कि चीजों का समाधान केवल लड़ाई है , तो अब यह सोच बदल डालें। इस तरीके को अपनाएं , फिर आप देखेंगे कि आपकी कई दिक्कतें खुद - ब - खुद सॉल्व होती जा रही हैं।
कहीं भी, कभी भी
इस बात को कतई झुठलाया नहीं जा सकता है कि पुरुष कभी भी, कहीं भी सेक्स के लिए तैयार हो जाते हैं। दरअसल, सेक्स को लेकर उनकी सोच महिलाओं की तरह नहीं होती। इसलिए आपका पार्टनर जब भी सेक्स की डिमांड करता है, तो उसे पूरी करने की पूरी कोशिश करें। ध्यान रखें कि पुरुष रोमांस और सेक्स को अलग- अलग रखकर चलते हैं। उनके लिए इन दोनों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं होता। इसलिए अगर आपका पार्टनर फिजिकल रिलेशन चाहता है और उसका मूड रोमांस का नहीं है, तो भी उसको पूरा सहयोग दें। उनके इस अंदाज से इस निष्कर्ष पर न पहुंचे कि वह आपसे प्यार नहीं करता।
यू आर सेक्सी
सेक्स के दौरान अपने एक्सप्रेशन को छुपाएं नहीं। पार्टनर को हग करने से लेकर किस करने तक में उसका सहयोग करें। अगर आप बेड पर अपने पार्टनर की हेल्प नहीं करतीं, तो आपका रियल लाइफ में अच्छा होना मायने नहीं रखता। अच्छे सेक्स के लिए अपनी फेमिनन एनर्जी को बनाए रखें। अगर आप सेक्स के दौरान सुस्त रहेंगी, तो सेक्स संबंधों को भरपूर इंजॉय नहीं कर पाएंगी। अगर आपको अच्छा महसूस हो रहा है, तो अपनी फीलिंग्स खुलकर जाहिर करें।
बी ओपन
एक जरूरी चीज जो आपके लिए समझनी जरूरी है कि वह आपका दिमाग नहीं पढ़ सकते। इसलिए आप अपने पार्टनर से कुछ चाहती हैं, तो खुलकर जाहिर करें। बाद में यह शिकायत करना कि आपको तो हर चीज समझानी पड़ती है, गलत है। खुलकर उनको बताएं कि फिजिकल होने के दौरान आपको क्या पसंद है और क्या नहीं। यहीं नहीं, अपने ऐसे बॉडी पार्ट्स के बारे में भी बताएं, जिन्हें उनका छूना आपको अच्छा लगता है। इससे आपके साथ आपके पार्टनर को भी इस बात को लेकर संतुष्टि रहेगी कि वह जो कर रहे हैं, वह आपको अच्छा लग रहा है।
डोंट इग्नोर फैंटेसी
पुरुषों के दिमाग में सेक्स को लेकर नई - नई फैंटेसी चलती रहती है। उनको अपनी ओर आकर्षित करने का सबसे आसान तरीका है कि आप उनकी फैंटेसी को पूरी करने में उनका साथ दें। लेडीज को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि पुरुषों की सेक्स में उनसे ज्यादा रुचि होती है और वे इसे खुलकर जाहिर भी करते हैं। यही नहीं , वे सेक्स को अपनी फैंटेसी के मुताबिक करने की इच्छा भी जाहिर करते हैं। जबकि महिलाएं अपनी इच्छा बताती ही नहीं हैं और अगर बताती हैं , तो बहुत कम शब्दों में जाहिर करती हैं। लेकिन इस संकोच से बाहर निकल आइए और खुलकर अपने पार्टनर को बताएं कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं। अगर आप उनको खुलकर नहीं बताएंगे , तो आपका पार्टनर कैसे समझ पाएगा कि आपको फिजिकल रिलेशनशिप के दौरान क्या अच्छा लगता है ? अगर नहीं कह पा रही हैं , तो अपने ऐ क्शन या इंडिकेशन से उनको अपने ड्रीम ऐ क्शन सीन समझा सकती हैं।
वैराइटी जरूरी है
जिस तरह रोजमर्रा में वैराइटी की जरूरत होती है , वैसे ही सेक्स में भी वैराइटी बनाए रखें। एक जैसी ऐ क्टविटीज अपनाने से आप लंबे समय तक सेक्स को एंजॉय नहीं कर सकती। इसलिए इसमें भी नए - नए रास्ते तलाशते रहें। अगर आपका पार्टनर कोई नई पॉजिशन सजस्ट करे , तो उनको गौर से सुनें , समझें और अपनाएं। नहीं , मुझे नहीं जानना व समझना जैसी आदतों को बदल डालें। नई चीजों को एक बार जरूर ट्राई करें। बाद में उन्हें लाइफ में अपनाना और न अपनाना तो आपके अपने हाथ में ही है।
झगड़ों का सल्यूशन
सेक्स आपके प्यार व फीलिंग्स को अपने पार्टनर को जाहिर करने का सबसे आसान तरीका है। इसमें बनी गर्मजोशी आपके प्यार को दर्शाती है। किसी भी रिलेशनशिप में लड़ाई और वाद - विवाद होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन आप इन झगड़ों को पल भर में अपने प्यार से मिटा सकते हैं। बल्कि आपको यह जानकर सरप्राइज होगा कि किसी विवाद के बाद आपका प्यार दोगुना हो जाता है। हालांकि शुरू में आपको इस इमोशनल अटैचमेंट का अंदाजा नहीं होगा , लेकिन आगे चलकर आपको इस प्यार की गहराई पता चलेगी। अगर आपको ऐसा लगता है कि चीजों का समाधान केवल लड़ाई है , तो अब यह सोच बदल डालें। इस तरीके को अपनाएं , फिर आप देखेंगे कि आपकी कई दिक्कतें खुद - ब - खुद सॉल्व होती जा रही हैं।
चुंबक वाली ब्रा!
महिलाओं के लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं है। दरअसल, महिलाओं की लॉन्जरी बनाने वाली एक फ्रेंच कंपनी ने ऐसी ब्रा तैयार की हैं जिनमें हुक या बटन नहीं लगे होंगे बल्कि चुंबक लगी होंगी।
ब्रिटेन में एक डिपार्टमेंटल स्टोर सेल्फरिजेस में इस नई तरह की ब्रा बिक्री के लिए कुछ ही दिनों में पेश की जानी है जिसमें हुक नहीं होते बल्कि कुछ खास तरह की मैग्नेट लगी हैं। ये छोटे, न दिखाई देने वाले ऐसे मैग्नेट होंगे जो हुक की तरह ही ब्रो को होल्ड करने का काम करेंगे। यह जानकारी दी है news.com.au. ने। ब्रा के साथ कंपनी आपको क्लिप ऑन, क्लिप ऑफ पैंटी भी देगी जिसकी साइड्स में मैग्नेटिक स्ट्रिप्स लगी होंगी। इनकी ऑनलाइन बिक्री भी इसी सप्ताह शुरू हो जाएगी।
इस ब्रा को तैयार किया है फ्रेंच डिजाइनर लैटिटिया स्कमबर्गर ने। इस ब्रा पैंटी सेट का वजन होगा 165 पॉउंड। जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ सालों में लॉन्जरी जगत में इससे बड़ा इन्वेंशन कोई नहीं रहा होगा। ब्रा खोलने की मशक्कत से अब महिलाओं और उनके पार्टनर्स को शायद छुटकारा मिल जाएगा।
Wednesday, April 14, 2010
अच्छे फोरप्ले के टिप्स
पुरूष और महिला के लिए सेक्स की जरूरतें अलग अलग होती है. दोनों में स्वभाव से लेकर जीन तक का भेद होता है, और यदि दोनों के बीच सामंजस्य का अभाव हो तो उन्हें सेक्स जीवन से आनंद प्राप्त नहीं हो पाता. सेक्स के लिए अच्छा फोरप्ले काफी आवश्यक है, और अच्छे फोरप्ले के लिए आवश्यक है कि युगल की आपसी समझ परिपक्व हो.
सर्वश्रेष्ठ कुछ नहीं
यदि आप सोचते हैं कि फोरप्ले का कोई सर्वाधिक उपयुक्त तरीका हो सकता है तो वह गलत है. सेक्स में सर्वश्रेष्ठ जैसा कुछ नहीं होता. समय, माहौल और रूचि के हिसाब से बदलाव ही सबसे आवश्यक है. इसलिए हर समय ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए यह व्याख्यायित नहीं किया जा सकता. सही यह रहता है कि आप कुछ भी ऐसा ना करें जो अवास्तविक लगे. अपनी गलतियों से सीखें और अपने व्यवहार में बदलाव करें. जानने की कोशिश करें कि आपके साथी को क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं.
होश ना खोएँ
जोश में होश ना खोएँ. पुरूष स्वभाव से अधिक आक्रामक और सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं. परंतु उनके लिए जरूरी है कि वे अपनी महिला मित्र से उचित व्यवहार करें. फोरफ्ले को सेक्स का एक अंग मानें ना कि सेक्स से पहले की आवश्यक क्रिया. अपनी पत्नी या महिला मित्र के सम्मान का ध्यान रखें और उन्हें यह अहसास कराएँ कि उनके साथ बिताए जा रहे पल यादगार हैं.
छेड़छाड़
चुँकि फोरप्ले का कोई निश्चित मानदंड नहीं होता, आप कई तरीकों से इसका आनंद ले सकते हैं. हल्की फुल्की छेड़छाड़ भी इसमें शामिल है. ध्यान यह रखें कि इससे आपके साथी को कोई परेशानी ना हो और ना ही आसपास के लोगों को.
पसंद नापसंद
अच्छे सेक्स जीवन के लिए आवश्यक है कि एक दूसरे की रूचि का ध्यान रखें और महत्व दें. इसलिए कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके मित्र या पत्नी को रास ना आए.
कितनी देर?
सेक्स में समय का नहीं बल्कि संतुष्टि का महत्व होता है. इसलिए यह मानना कि अमुक देर तक का फोरप्ले काफी होता है ठीक नहीं है. यह एक शारीरिक और मानसिक संतुलन और मिलन की क्रिया है. इसलिए इसका भरपूर आनंद उठाएँ और घड़ी को नजरअंदाज करें.
सर्वश्रेष्ठ कुछ नहीं
यदि आप सोचते हैं कि फोरप्ले का कोई सर्वाधिक उपयुक्त तरीका हो सकता है तो वह गलत है. सेक्स में सर्वश्रेष्ठ जैसा कुछ नहीं होता. समय, माहौल और रूचि के हिसाब से बदलाव ही सबसे आवश्यक है. इसलिए हर समय ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए यह व्याख्यायित नहीं किया जा सकता. सही यह रहता है कि आप कुछ भी ऐसा ना करें जो अवास्तविक लगे. अपनी गलतियों से सीखें और अपने व्यवहार में बदलाव करें. जानने की कोशिश करें कि आपके साथी को क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं.
होश ना खोएँ
जोश में होश ना खोएँ. पुरूष स्वभाव से अधिक आक्रामक और सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं. परंतु उनके लिए जरूरी है कि वे अपनी महिला मित्र से उचित व्यवहार करें. फोरफ्ले को सेक्स का एक अंग मानें ना कि सेक्स से पहले की आवश्यक क्रिया. अपनी पत्नी या महिला मित्र के सम्मान का ध्यान रखें और उन्हें यह अहसास कराएँ कि उनके साथ बिताए जा रहे पल यादगार हैं.
छेड़छाड़
चुँकि फोरप्ले का कोई निश्चित मानदंड नहीं होता, आप कई तरीकों से इसका आनंद ले सकते हैं. हल्की फुल्की छेड़छाड़ भी इसमें शामिल है. ध्यान यह रखें कि इससे आपके साथी को कोई परेशानी ना हो और ना ही आसपास के लोगों को.
पसंद नापसंद
अच्छे सेक्स जीवन के लिए आवश्यक है कि एक दूसरे की रूचि का ध्यान रखें और महत्व दें. इसलिए कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके मित्र या पत्नी को रास ना आए.
कितनी देर?
सेक्स में समय का नहीं बल्कि संतुष्टि का महत्व होता है. इसलिए यह मानना कि अमुक देर तक का फोरप्ले काफी होता है ठीक नहीं है. यह एक शारीरिक और मानसिक संतुलन और मिलन की क्रिया है. इसलिए इसका भरपूर आनंद उठाएँ और घड़ी को नजरअंदाज करें.
अच्छे सेक्स जीवन के लिए जोगिंग!
तो क्या जोगिंग का सीधा संबंध सेक्स जीवन से हो सकता है? कहना मुश्किल है परंतु एक नए अभ्यास के अनुसार जो लोग नियमित जॉगिंग करते हैं उनका सेक्स जीवन ऐसा ना करने वाले लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक अच्छा होता है.
ब्रिटेन में किए गए एक सर्वे के नतीजे इसी ओर इशारा करते हैं. इस सर्वे में 1000 जोगिंग करने वाले लोगों और 1000 ऐसा नहीं करने वाले लोगों से सवाल पूछे गए थे. सु राइडर केर नामक एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा करवाए गए इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि हर 10 में से 1 जॉगर दिन में एक बार सेक्स में लिप्त होते हैं. इसके अलावा 3% जॉगर्स ने स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 2 बार यौनक्रिडा करते हैं.
परंतु जो लोग जॉगिंग नहीं करते उनका सेक्स जीवन इतना सक्रीय नहीं होता है. जॉगिंग नहीं करने वाले प्रति 100 में से 4 लोगों ने माना कि वे महिने में एकाध बार ही कामक्रिडा में लिप्त होते हैं.
इस सर्वे से और भी कई रोचक जानकारियाँ प्राप्त हुई. उदाहरण के लिए प्रति 10% पुरूष जॉगर दौड लगाते समय सेक्स के बारे में सोचते है परंतु महिलाओं में यह दर मात्र 5% ही है. करीब 50% महिलाएँ दौड़ लगाते समय सेक्स के बारे में नहीं सोचती बल्कि यह सोचती हैं कि इस कसरत से उनके स्वास्थ्य पर क्या सकारात्मक असर होगा.
करीब 25% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि वे मानते हैं कि जॉगिंग करने के लिए जाने से वे अन्य महिलाओं के साथ फ्लर्ट कर सकेंगे. 75% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि जॉगिंग के दौरान उन्होनें अपरिचित महिलाओं से वार्तालाप किया है.
इस सर्वे से पता चलता है कि जॉगिंग को लेकर पुरूष और महिलाओं की मान्यताएँ और प्राथमिकताएँ काफी हद तक अलग अलग है.
ब्रिटेन में किए गए एक सर्वे के नतीजे इसी ओर इशारा करते हैं. इस सर्वे में 1000 जोगिंग करने वाले लोगों और 1000 ऐसा नहीं करने वाले लोगों से सवाल पूछे गए थे. सु राइडर केर नामक एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा करवाए गए इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि हर 10 में से 1 जॉगर दिन में एक बार सेक्स में लिप्त होते हैं. इसके अलावा 3% जॉगर्स ने स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 2 बार यौनक्रिडा करते हैं.
परंतु जो लोग जॉगिंग नहीं करते उनका सेक्स जीवन इतना सक्रीय नहीं होता है. जॉगिंग नहीं करने वाले प्रति 100 में से 4 लोगों ने माना कि वे महिने में एकाध बार ही कामक्रिडा में लिप्त होते हैं.
इस सर्वे से और भी कई रोचक जानकारियाँ प्राप्त हुई. उदाहरण के लिए प्रति 10% पुरूष जॉगर दौड लगाते समय सेक्स के बारे में सोचते है परंतु महिलाओं में यह दर मात्र 5% ही है. करीब 50% महिलाएँ दौड़ लगाते समय सेक्स के बारे में नहीं सोचती बल्कि यह सोचती हैं कि इस कसरत से उनके स्वास्थ्य पर क्या सकारात्मक असर होगा.
करीब 25% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि वे मानते हैं कि जॉगिंग करने के लिए जाने से वे अन्य महिलाओं के साथ फ्लर्ट कर सकेंगे. 75% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि जॉगिंग के दौरान उन्होनें अपरिचित महिलाओं से वार्तालाप किया है.
इस सर्वे से पता चलता है कि जॉगिंग को लेकर पुरूष और महिलाओं की मान्यताएँ और प्राथमिकताएँ काफी हद तक अलग अलग है.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छा सेक्स!

सेक्स मानसिक तनाव को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए अति उपयोगी है. परंतु इसके अलावा भी कई ऐसे स्वास्थ्यकारी गुण हैं जो सेक्स से जुड़े हैं. स्खलन के दौरान हमारा शरीर कई ऐसे हार्मोन प्रवाहित करता है जिससे शरीर निरोगी रहता है.
दर्द से मुक्ति:
सेक्स सबसे अच्छे पेन किलर में से एक है. स्खलन के दौरान हमारा शरीर एंड्रोफाइंस छोडता है जो रीढ की हड्डी का दर्द कम करता है इसके अलावा कमर दर्द से भी राहत मिलती है.
रक्त प्रवाह:
स्खलन के दौरान हमारा रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, सांसे तेज चलने लगती है और रक्तचाप बढ जाता है. दिमाग को अधिक मात्रा में प्राणवायु मिलती है. इससे हमारा शरीर सुदृढ और निरोगी रहता है.
तनाव मुक्ति:
सेक्स से डिप्रेशन और तनाव से मुक्ति मिलती है. स्खलन के दौरान सेरोटोनिन और एंड्रोफाइंस प्रवाहित होते हैं जो खुशी के हार्मोन हैं. इससे हमें सुखद अनुभव होता है. तनाव से मुक्ति मिलती है.
सबसे अच्छी कसरत:
लिपस्टिक बताएगी सेक्स का सही समय!

क्या आप अपनी पत्नी या महिला मित्र के साथ कुछ अंतरंग पल बिताना चाहते हैं परंतु इस असमंजस में हैं कि इस बारे में पहल करें कि नहीं तो अब आपकी सुविधा के लिए यह लिपस्टिक काम में आ सकती है. शर्त इतनी है कि आपकी पत्नी के होठों पर वह लिपस्टिक लगी हुई हो.
कैलिफोर्निया की एक कम्पनी ने एक अनोखी लिपस्टिक बनाई है, जो उसे लगाने वाली महिला के बदल रहे "मूड" के हिसाब से खुद का रंग बदल लेती है. इससे पुरूष यह जान पाता है कि उसकी पत्नी या महिला मित्र भी अंतरंग पलों का आनंद लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार है या नहीं है.
इस लिपस्टिक को लगाने वाली महिला जब भी उत्तेजना का अनुभव करती है तो लिपस्टिक का रंग गहरा हो जाता है. सामान्य स्थितियों में उसका रंग हल्का ही रहता है. इस आधार पर महिला की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
यही नहीं इस लिपस्टिक के साथ एक कलर चार्ट भी आता है, जिससे पुरूषों को और भी सुविधा प्राप्त हो जाती है. वे अपनी पत्नी के होठों के रंग का मिलान उस चार्ट पर प्रदर्शित रंगो से कर उस हिसाब से अनुमान लगा पाते हैं कि उनकी पत्नी सेक्स के लिए कितनी तैयार है.
इस लिपस्टिक की कीमत 12 पाउंड के आसपास है और यह लिपस्टिक ब्रिटिश और अमेरिकी सेलिब्रिटियों के बीच काफे लोकप्रिय है. लेकिन आप शायद इस लिपस्टिक को सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय शायद ही लगाना चाहें.
5 बातें जो अंतरंग क्षणों को बदरंग बना देती हैं

अपने साथी के साथ अंतरंग क्षणों का आनंद लेते समय आसपास के वातावरण और चीजों का ध्यान ना रखा जाए तो ये अंतरंग क्षण बदरंग हो जाते हैं. कुछ बातें तो ऐसी है जो एकदम सामान्य लग सकती हैं, लेकिन इनका काफी बुरा असर हो सकता है.
मोबाइल फोन पर बात:
सोचिए जब आप अपने साथी के साथ प्रेम का आनंद ले रहे हों और फोन की घंटी बज जाए! कभी कभी कॉल इतना महत्वपूर्ण होता है कि उसे काटा भी नहीं जा सकता और बात करनी ही पड़ती है. लेकिन यह आप दोनों के मूड को बिगाड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखता. इसलिए जब आप अपने साथी के साथ हों तो मोबाइल फोन या तो स्विच ऑफ कर दें या फिर वोइसमेल चालू कर दें.
तेज संगीत:
हो सकता है आपको संगीत पसंद हो, यह भी हो सकता है कि आपके साथी को भी संगीत पसंद हो, लेकिन अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले तेज संगीत आप दोनों के मूड को खराब कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले खुद को तैयार करने में समय लगता है और इस दौरान तेज संगीत इसमें बाधा ही उत्पन्न करता है. इसलिए अच्छा हो कि धीमा संगीत बजाएँ अथवा तो आपस में ही बात करें.
हड़बड़ी:
प्रेम में हडबडी के लिए कोई स्थान नहीं है. यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक तेजी से उत्तेजना प्राप्त करते हैं लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू रखना प्रेम में अति आवश्यक होता है. शुरूआत में ही अत्यधिक उत्तेजना का प्रदर्शन आपकी साथी के मूड को खराब कर देगा और उन्हें लगेगा कि आपको सिर्फ सेक्स से मतलब है.
जबरदस्ती:
यह बात पुरूषों के व्यवहार पर लागू होती है. चुँकि पुरूष अपेक्षाकृत अधिक तेजी से उत्तेजित होते हैं, यदि वे अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाएँ तो लगभग जबरदस्ती करने लगते हैं, जो कि गलत है. यदि महिला साथी तैयार ना हों तो उनकी भावनाओं को समझकर “शुभरात्री’ कहना सही रहेगा. क्योंकि जबरदस्ती से भरी गई हामी भविष्य के लिए कड़वाहट छोड़ जाती है.
बेवजह शर्म:
यह बात महिलाओं पर अधिक लागू होती है. बेवजह की शर्म अंतरंग पलों को बिगाड़ सकती हैं, इसलिए अपने साथी के साथ खुलकर पेश आएँ और अपनी ईच्छाओं के बारे में बात कीजिए.
बच्चों के जन्म के बाद कैसे रखें "प्रेम" को जीवंत
बच्चों के जन्म के बाद की दुनिया अलग ही होती है. कहते हैं बच्चों के जन्म से दाम्पत्य जीवन की नई शुरूआत होती है.
बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.
प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.
साथ में फिल्म देखें:
बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.
साथ में टहलने जाएँ:
यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.
खेल खेलें:
बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.
साथ खाना खाएँ:
यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.
एकांत ढूंढे:
छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.
दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.
बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.
प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.
साथ में फिल्म देखें:
बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.
साथ में टहलने जाएँ:
यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.
खेल खेलें:
बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.
साथ खाना खाएँ:
यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.
एकांत ढूंढे:
छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.
दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.
एक जीवनकाल में 14 सेक्स साथी - पुरूषों की चाह

एक मनोचिकित्सक की शोध के अनुसार पुरूष अपने पूरे जीवनकाल में कम से कम 14 अलग अलग “सेक्स साथी’ की जरूरत महसूस करते हैं, जबकि महिलाएँ एक या दो. डॉ. लुआन ब्रिजेनडाइन ने अपनी पुस्तक “Male Brain: A Breakthrough Understanding Of How Men And Boys Think” में पुरूषों के सेक्स संबंधित व्यवहार और इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक और अनुवांशिक कारणों के बारे में लिखा है.
इस पुस्तक में कई ऐसी बातें लिखी गई हैं जो काफी चौंकाने वाली हैं. शायद इसलिए डॉ. ब्रिजेनडाइन कहती हैं कि – इसका अर्थ यह नहीं है कि पुरूषों को बलात्कार करने का एक और बहाना मिल जाए. यह सही है कि पुरूष जिनेटिक तौर पर सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं परन्तु उन्हें भी अपनी बायोलोजिक “कमी” के बारे में बात करने का अधिकार जरूर है.
इस पुस्तक में इसी बात की पुष्टि की गई है जो हमेशा से मानी जाती रही है – पुरूष सेक्स को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं, वे अपनी भावनाओं को छिपा कर रखते हैं और वे धोखा देने में माहिर होते हैं.
डॉ. ब्रिजेनडाइन का मानना है कि पुरूषों के शरीर में मौजूद टेस्टोस्टेरोन उनमें एक प्रकार के नशे का संचार करते हैं – जिससे पुरूष सेक्स के प्रति उत्साहित रहते हैं. पुरूष के दिमाग का वह हिस्सा जो सेक्स की भावना जगाता है, वह महिलाओं के दिमाग के उसी प्रकार के हिस्से से करीब ढाई गुना अधिक बडा होता है.
महिलाएँ जहाँ फोरप्ले को अधिक महत्व देती है वहीं पुरूषों के लिए सम्भोग का महत्व अधिक होता है. इसके पीछे का बायोलोजिकल कारण यह हो सकता है कि स्खलन के दौरान पुरूषों के दिमाग में भारी मात्रा में ओक्सिटोसिन छूटता है जो उनके लिए आनंद और दर्दनिवारक का कार्य करता है.
डॉ. ब्रेजेनडाइन के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि पुरूष अपनी महिला मित्र या पत्नी से प्रेम नहीं करते हैं या मात्र सेक्स ही चाहते हैं, परंतु उनकी बायोलोजिकल सरंचना उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती है.
स्वतंत्रताप्रेमी पुरूष और सहजीवन प्रेमी महिला की सेक्स आकांक्षाएँ
पुरूष और महिलाओं के विपरित स्वभाव का असर उनके प्रेम संबंधों पर भी पडता है. एक शोध से पता चला है कि महिलाएँ लम्बे काल के प्रेम संबंधों को अधिक महत्व देती है जबकि पुरूष क्षणिक संबंधों को जिसमें की सेक्स तो हो परंतु जिम्मेदारी ना हो. इस शोध के अनुसार इसके पीछे की वजह यह है कि पुरूष अपनी स्वतंत्रता को सर्वाधिक महत्व देते हैं जबकि महिलाएँ अपने लिए एक ऐसा साथी चुनने की कोशिश करती हैं जिसके साथ वह जीवन यापन कर सके.
वर्जिनीया, अमरीका की जैम्स मैडिसन विश्वविद्यालय की कैरोलीन ब्राडशो और उनके मित्रों ने इस विषय पर शोध की है. उन्होनें यह जानने की कोशिश की कि वह क्या है जो पुरूष और महिलाओं को डेटिंग करने के लिए अथवा कुछ पलों के लिए संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है.
पुरूष महिला के साथ संबंध स्थापित करने के लिए पहल करते हैं - वे उनको प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं, उनके साथ खाना खाने या कॉफी पीने जाते हैं, और अंत में उनके साथ यौन संबंध स्थापित करने का प्रयत्न करते हैं. दूसरी तरफ महिलाएँ अमूमन पहल नहीं करती और इंतजार करती हैं कि जिस पुरूष को वे पसंद करती हैं वह उन्हें प्रपोज करे. वह चाहती हैं कि वे अपने पुरूष प्रेमी के विषय मे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करें और इसके पीछे उनका उद्देश्य लम्बे काल तक चलने वाला सबंध स्थापित करना होता है.
परंतु पुरूष अमूमन इस तरह के संबंधो की बजाय हूक-अप सबंधों को महत्व देते हैं. हूक-अप यानी कि किसी पार्टी में किसी महिला से मिलना, छोटी बातचीत करना, उसे आकर्षित करना और अंत में यौन संबंध स्थापित करना. ऐसे संबंध अस्थायी होते हैं और यहाँ जिम्मेदारी का कोई महत्व नहीं होता.
ब्राडशो और उनकी टीम ने 150 महिलाओं और 71 पुरूष विद्यार्थियों का सर्वे किया. उनके सर्वे के नतीजों के अनुसार लम्बे काल का संबंध स्थापित करने के इच्छुक पुरूष और महिला दोनों हूक अप सबधों को महत्व नहीं देते परंतु ऐसा भी नहीं है कि इस तरह के संबंधों को एकदम भी महत्व नहीं दिया जाता. हूक सबंधों को लेकर पुरूषों में अधिक आकर्षण पाया गया. जहाँ 17% पुरूषों ने इसे वांछित करार दिया मात्र 2% महिलाएँ ही इसके लिए तैयार दिखी. दूसरी तरफ परम्परागत डेटिंग को 41% महिलाओं ने पसंद किया तो 20% पुरूष इसके लिए तैयार दिखे.
इसके पीछे सामाजिक और शारीरिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. पुरूष अनुवांशिक रूप से अपनी स्वतंत्रता को प्रेम करते हैं और इससे उन्हें ताकत का अहसास होता है इसलिए वे अल्पकालीन और बिना जिम्मेदारी वाले संबंधों को पसंद करते हैं.
वर्जिनीया, अमरीका की जैम्स मैडिसन विश्वविद्यालय की कैरोलीन ब्राडशो और उनके मित्रों ने इस विषय पर शोध की है. उन्होनें यह जानने की कोशिश की कि वह क्या है जो पुरूष और महिलाओं को डेटिंग करने के लिए अथवा कुछ पलों के लिए संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है.
पुरूष महिला के साथ संबंध स्थापित करने के लिए पहल करते हैं - वे उनको प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं, उनके साथ खाना खाने या कॉफी पीने जाते हैं, और अंत में उनके साथ यौन संबंध स्थापित करने का प्रयत्न करते हैं. दूसरी तरफ महिलाएँ अमूमन पहल नहीं करती और इंतजार करती हैं कि जिस पुरूष को वे पसंद करती हैं वह उन्हें प्रपोज करे. वह चाहती हैं कि वे अपने पुरूष प्रेमी के विषय मे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करें और इसके पीछे उनका उद्देश्य लम्बे काल तक चलने वाला सबंध स्थापित करना होता है.
परंतु पुरूष अमूमन इस तरह के संबंधो की बजाय हूक-अप सबंधों को महत्व देते हैं. हूक-अप यानी कि किसी पार्टी में किसी महिला से मिलना, छोटी बातचीत करना, उसे आकर्षित करना और अंत में यौन संबंध स्थापित करना. ऐसे संबंध अस्थायी होते हैं और यहाँ जिम्मेदारी का कोई महत्व नहीं होता.
ब्राडशो और उनकी टीम ने 150 महिलाओं और 71 पुरूष विद्यार्थियों का सर्वे किया. उनके सर्वे के नतीजों के अनुसार लम्बे काल का संबंध स्थापित करने के इच्छुक पुरूष और महिला दोनों हूक अप सबधों को महत्व नहीं देते परंतु ऐसा भी नहीं है कि इस तरह के संबंधों को एकदम भी महत्व नहीं दिया जाता. हूक सबंधों को लेकर पुरूषों में अधिक आकर्षण पाया गया. जहाँ 17% पुरूषों ने इसे वांछित करार दिया मात्र 2% महिलाएँ ही इसके लिए तैयार दिखी. दूसरी तरफ परम्परागत डेटिंग को 41% महिलाओं ने पसंद किया तो 20% पुरूष इसके लिए तैयार दिखे.
इसके पीछे सामाजिक और शारीरिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. पुरूष अनुवांशिक रूप से अपनी स्वतंत्रता को प्रेम करते हैं और इससे उन्हें ताकत का अहसास होता है इसलिए वे अल्पकालीन और बिना जिम्मेदारी वाले संबंधों को पसंद करते हैं.
Wednesday, January 13, 2010
अच्छे सेक्स जीवन के लिए रखें सकारात्मक दृष्टिकोण
एक शोध ने साबित किया है कि यदि आप अपने शरीर के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं तो आपका सेक्स जीवन अपेक्षाकृत अधिक आनंददायक होगा, आपको यौन बिमारियाँ लगने की कम सम्भावना होगी और आप चरम-आनंद को आसानी से प्राप्त कर पाएंगे.
यह बात महिलाओं पर विशेष रूप से लागू होती है. सेंटर फोर सैक्सुअल हैल्थ प्रोमोशन की शोध ने सिद्ध किया कि जो महिलाएँ अपने शरीर के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं वे नियमित रूप से अपने शरीर का चैक-अप करवाती हैं, उसे स्वच्छ रखती हैं तथा उनका सेक्स जीवन भी खुशहाल होता है.
इस शोध से जुड़ी डेबी हर्बनिक के अनुसार – आम तौर पर देखा गया है कि महिलाएँ अपने शरीर से संतुष्ट नहीं होती जबकि उनसे संबंधित पुरूष इससे उलट सोच रखते हैं.
इस संस्थान ने 18 से 23 साल की उम्र की 362 महिलाओं और 241 पुरूषों से विभिन्न प्रकार के सवाल पूछ कर यह पता लगाया कि दोनों लिंग के लोग महिलाओं के शरीर के प्रति किस प्रकार का दृष्टिकोण रखते हैं. शोध के नतीजे बताते हैं कि महिलाओं के शरीर के प्रति पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक सकारात्मक सोच रखते हैं.
एक ब्रिटिश दैनिक को दिए साक्षात्कार में डेबी हर्बनिक ने बताया कि, महिलाओं का अपने शरीर के प्रति सही दृष्टिकोण होना काफी जरूरी है. और इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बचपन से ही जननांगो के प्रति अपने बच्चों को जागरूक करें.
इस शोध से जुड़ी डेबी हर्बनिक के अनुसार – आम तौर पर देखा गया है कि महिलाएँ अपने शरीर से संतुष्ट नहीं होती जबकि उनसे संबंधित पुरूष इससे उलट सोच रखते हैं.
इस संस्थान ने 18 से 23 साल की उम्र की 362 महिलाओं और 241 पुरूषों से विभिन्न प्रकार के सवाल पूछ कर यह पता लगाया कि दोनों लिंग के लोग महिलाओं के शरीर के प्रति किस प्रकार का दृष्टिकोण रखते हैं. शोध के नतीजे बताते हैं कि महिलाओं के शरीर के प्रति पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक सकारात्मक सोच रखते हैं.
एक ब्रिटिश दैनिक को दिए साक्षात्कार में डेबी हर्बनिक ने बताया कि, महिलाओं का अपने शरीर के प्रति सही दृष्टिकोण होना काफी जरूरी है. और इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बचपन से ही जननांगो के प्रति अपने बच्चों को जागरूक करें.
उदाहरण के तौर पर यदि छोटे बच्चे अपने जननांगो को छूते हैं तो उन्हें यह कहकर ना टोकें कि – यह गंदा है, छोड़ दो. बल्कि उन्हें समझाएँ कि जननांगो को ढक कर क्यों रखना चाहिए.
उन्हें यह समझाएँ कि बाकी शरीर की तरह उन्हें भी स्वच्छ रखना चाहिए. इसके अलावा जननांगो के भी सही नाम बच्चों को बताने चाहिए. जिस तरह से हम आँख, नाक, कान आदि अंगों के बारे में जानकारी देते हैं उसी तरह से जननांगो के बारे में भी सही समय पर उचित जानकारी दी जानी चाहिए.
इसके अलावा माताओं को चाहिए वे अपनी बेटी को यौन तथा जननांगो सबंधी सम्पूर्ण जानकारी दे.
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