Wednesday, April 14, 2010

अच्छे फोरप्ले के टिप्स

पुरूष और महिला के लिए सेक्स की जरूरतें अलग अलग होती है. दोनों में स्वभाव से लेकर जीन तक का भेद होता है, और यदि दोनों के बीच सामंजस्य का अभाव हो तो उन्हें सेक्स जीवन से आनंद प्राप्त नहीं हो पाता. सेक्स के लिए अच्छा फोरप्ले काफी आवश्यक है, और अच्छे फोरप्ले के लिए आवश्यक है कि युगल की आपसी समझ परिपक्व हो.

सर्वश्रेष्ठ कुछ नहीं
यदि आप सोचते हैं कि फोरप्ले का कोई सर्वाधिक उपयुक्त तरीका हो सकता है तो वह गलत है. सेक्स में सर्वश्रेष्ठ जैसा कुछ नहीं होता. समय, माहौल और रूचि के हिसाब से बदलाव ही सबसे आवश्यक है. इसलिए हर समय ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए यह व्याख्यायित नहीं किया जा सकता. सही यह रहता है कि आप कुछ भी ऐसा ना करें जो अवास्तविक लगे. अपनी गलतियों से सीखें और अपने व्यवहार में बदलाव करें. जानने की कोशिश करें कि आपके साथी को क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं.

होश ना खोएँ
जोश में होश ना खोएँ. पुरूष स्वभाव से अधिक आक्रामक और सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं. परंतु उनके लिए जरूरी है कि वे अपनी महिला मित्र से उचित व्यवहार करें. फोरफ्ले को सेक्स का एक अंग मानें ना कि सेक्स से पहले की आवश्यक क्रिया. अपनी पत्नी या महिला मित्र के सम्मान का ध्यान रखें और उन्हें यह अहसास कराएँ कि उनके साथ बिताए जा रहे पल यादगार हैं.

छेड़छाड़
चुँकि फोरप्ले का कोई निश्चित मानदंड नहीं होता, आप कई तरीकों से इसका आनंद ले सकते हैं. हल्की फुल्की छेड़छाड़ भी इसमें शामिल है. ध्यान यह रखें कि इससे आपके साथी को कोई परेशानी ना हो और ना ही आसपास के लोगों को.

पसंद नापसंद
अच्छे सेक्स जीवन के लिए आवश्यक है कि एक दूसरे की रूचि का ध्यान रखें और महत्व दें. इसलिए कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके मित्र या पत्नी को रास ना आए.

कितनी देर?
सेक्स में समय का नहीं बल्कि संतुष्टि का महत्व होता है. इसलिए यह मानना कि अमुक देर तक का फोरप्ले काफी होता है ठीक नहीं है. यह एक शारीरिक और मानसिक संतुलन और मिलन की क्रिया है. इसलिए इसका भरपूर आनंद उठाएँ और घड़ी को नजरअंदाज करें.

अच्छे सेक्स जीवन के लिए जोगिंग!

तो क्या जोगिंग का सीधा संबंध सेक्स जीवन से हो सकता है? कहना मुश्किल है परंतु एक नए अभ्यास के अनुसार जो लोग नियमित जॉगिंग करते हैं उनका सेक्स जीवन ऐसा ना करने वाले लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक अच्छा होता है.

ब्रिटेन में किए गए एक सर्वे के नतीजे इसी ओर इशारा करते हैं. इस सर्वे में 1000 जोगिंग करने वाले लोगों और 1000 ऐसा नहीं करने वाले लोगों से सवाल पूछे गए थे. सु राइडर केर नामक एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा करवाए गए इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि हर 10 में से 1 जॉगर दिन में एक बार सेक्स में लिप्त होते हैं. इसके अलावा 3% जॉगर्स ने स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 2 बार यौनक्रिडा करते हैं.

परंतु जो लोग जॉगिंग नहीं करते उनका सेक्स जीवन इतना सक्रीय नहीं होता है. जॉगिंग नहीं करने वाले प्रति 100 में से 4 लोगों ने माना कि वे महिने में एकाध बार ही कामक्रिडा में लिप्त होते हैं.

इस सर्वे से और भी कई रोचक जानकारियाँ प्राप्त हुई. उदाहरण के लिए प्रति 10% पुरूष जॉगर दौड लगाते समय सेक्स के बारे में सोचते है परंतु महिलाओं में यह दर मात्र 5% ही है. करीब 50% महिलाएँ दौड़ लगाते समय सेक्स के बारे में नहीं सोचती बल्कि यह सोचती हैं कि इस कसरत से उनके स्वास्थ्य पर क्या सकारात्मक असर होगा.

करीब 25% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि वे मानते हैं कि जॉगिंग करने के लिए जाने से वे अन्य महिलाओं के साथ फ्लर्ट कर सकेंगे. 75% पुरूष जॉगर ने स्वीकार किया कि जॉगिंग के दौरान उन्होनें अपरिचित महिलाओं से वार्तालाप किया है.

इस सर्वे से पता चलता है कि जॉगिंग को लेकर पुरूष और महिलाओं की मान्यताएँ और प्राथमिकताएँ काफी हद तक अलग अलग है.

अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छा सेक्स!


सेक्स मानसिक तनाव को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए अति उपयोगी है. परंतु इसके अलावा भी कई ऐसे स्वास्थ्यकारी गुण हैं जो सेक्स से जुड़े हैं. स्खलन के दौरान हमारा शरीर कई ऐसे हार्मोन प्रवाहित करता है जिससे शरीर निरोगी रहता है.

दर्द से मुक्ति:
सेक्स सबसे अच्छे पेन किलर में से एक है. स्खलन के दौरान हमारा शरीर एंड्रोफाइंस छोडता है जो रीढ की हड्डी का दर्द कम करता है इसके अलावा कमर दर्द से भी राहत मिलती है.

रक्त प्रवाह:
स्खलन के दौरान हमारा रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, सांसे तेज चलने लगती है और रक्तचाप बढ जाता है. दिमाग को अधिक मात्रा में प्राणवायु मिलती है. इससे हमारा शरीर सुदृढ और निरोगी रहता है.

तनाव मुक्ति:
सेक्स से डिप्रेशन और तनाव से मुक्ति मिलती है. स्खलन के दौरान सेरोटोनिन और एंड्रोफाइंस प्रवाहित होते हैं जो खुशी के हार्मोन हैं. इससे हमें सुखद अनुभव होता है. तनाव से मुक्ति मिलती है.

सबसे अच्छी कसरत:
सेक्स सबसे अच्छी कसरत होती है. इससे स्नायू मजबूत बनते हैं. कैलरी का नाश होता है और कोलेक्स्ट्रोल नियंत्रित रहता है. कमर दर्द, घूटनों के दर्द और हाथों और पैरों की मजबूती के लिए सेक्स से अच्छी कसरत और कोई नही है.

लिपस्टिक बताएगी सेक्स का सही समय!


क्या आप अपनी पत्नी या महिला मित्र के साथ कुछ अंतरंग पल बिताना चाहते हैं परंतु इस असमंजस में हैं कि इस बारे में पहल करें कि नहीं तो अब आपकी सुविधा के लिए यह लिपस्टिक काम में आ सकती है. शर्त इतनी है कि आपकी पत्नी के होठों पर वह लिपस्टिक लगी हुई हो.

कैलिफोर्निया की एक कम्पनी ने एक अनोखी लिपस्टिक बनाई है, जो उसे लगाने वाली महिला के बदल रहे "मूड" के हिसाब से खुद का रंग बदल लेती है. इससे पुरूष यह जान पाता है कि उसकी पत्नी या महिला मित्र भी अंतरंग पलों का आनंद लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार है या नहीं है.

इस लिपस्टिक को लगाने वाली महिला जब भी उत्तेजना का अनुभव करती है तो लिपस्टिक का रंग गहरा हो जाता है. सामान्य स्थितियों में उसका रंग हल्का ही रहता है. इस आधार पर महिला की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

यही नहीं इस लिपस्टिक के साथ एक कलर चार्ट भी आता है, जिससे पुरूषों को और भी सुविधा प्राप्त हो जाती है. वे अपनी पत्नी के होठों के रंग का मिलान उस चार्ट पर प्रदर्शित रंगो से कर उस हिसाब से अनुमान लगा पाते हैं कि उनकी पत्नी सेक्स के लिए कितनी तैयार है.

इस लिपस्टिक की कीमत 12 पाउंड के आसपास है और यह लिपस्टिक ब्रिटिश और अमेरिकी सेलिब्रिटियों के बीच काफे लोकप्रिय है. लेकिन आप शायद इस लिपस्टिक को सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय शायद ही लगाना चाहें.

5 बातें जो अंतरंग क्षणों को बदरंग बना देती हैं


अपने साथी के साथ अंतरंग क्षणों का आनंद लेते समय आसपास के वातावरण और चीजों का ध्यान ना रखा जाए तो ये अंतरंग क्षण बदरंग हो जाते हैं. कुछ बातें तो ऐसी है जो एकदम सामान्य लग सकती हैं, लेकिन इनका काफी बुरा असर हो सकता है.

मोबाइल फोन पर बात:
सोचिए जब आप अपने साथी के साथ प्रेम का आनंद ले रहे हों और फोन की घंटी बज जाए! कभी कभी कॉल इतना महत्वपूर्ण होता है कि उसे काटा भी नहीं जा सकता और बात करनी ही पड़ती है. लेकिन यह आप दोनों के मूड को बिगाड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखता. इसलिए जब आप अपने साथी के साथ हों तो मोबाइल फोन या तो स्विच ऑफ कर दें या फिर वोइसमेल चालू कर दें.

तेज संगीत:
हो सकता है आपको संगीत पसंद हो, यह भी हो सकता है कि आपके साथी को भी संगीत पसंद हो, लेकिन अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले तेज संगीत आप दोनों के मूड को खराब कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को अंतरंग क्षणों का आनंद उठाने से पहले खुद को तैयार करने में समय लगता है और इस दौरान तेज संगीत इसमें बाधा ही उत्पन्न करता है. इसलिए अच्छा हो कि धीमा संगीत बजाएँ अथवा तो आपस में ही बात करें.

हड़बड़ी:
प्रेम में हडबडी के लिए कोई स्थान नहीं है. यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक तेजी से उत्तेजना प्राप्त करते हैं लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू रखना प्रेम में अति आवश्यक होता है. शुरूआत में ही अत्यधिक उत्तेजना का प्रदर्शन आपकी साथी के मूड को खराब कर देगा और उन्हें लगेगा कि आपको सिर्फ सेक्स से मतलब है.

जबरदस्ती:
यह बात पुरूषों के व्यवहार पर लागू होती है. चुँकि पुरूष अपेक्षाकृत अधिक तेजी से उत्तेजित होते हैं, यदि वे अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाएँ तो लगभग जबरदस्ती करने लगते हैं, जो कि गलत है. यदि महिला साथी तैयार ना हों तो उनकी भावनाओं को समझकर “शुभरात्री’ कहना सही रहेगा. क्योंकि जबरदस्ती से भरी गई हामी भविष्य के लिए कड़वाहट छोड़ जाती है.

बेवजह शर्म:
यह बात महिलाओं पर अधिक लागू होती है. बेवजह की शर्म अंतरंग पलों को बिगाड़ सकती हैं, इसलिए अपने साथी के साथ खुलकर पेश आएँ और अपनी ईच्छाओं के बारे में बात कीजिए.

बच्चों के जन्म के बाद कैसे रखें "प्रेम" को जीवंत

बच्चों के जन्म के बाद की दुनिया अलग ही होती है. कहते हैं बच्चों के जन्म से दाम्पत्य जीवन की नई शुरूआत होती है.

बच्चों के जन्म के बाद दंपत्ति का जीवन उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगता है. बच्चों के जन्म के तुरंत बाद से अभिभावकों को कुछ वर्षों तक उनकी 24 घंटें देखभाल करनी होती है. ऐसे में उनका अपना निजी जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. सवाल यह है कि बच्चों के जन्म के बाद खुद के लिए समय कैसे निकाला जाए और कैसे दांपत्य जीवन में खुशी और रोमांच को बरकरार रखा जाए.

प्रस्तुत है पाँच ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप बच्चों के बीच भी अपने लिए समय निकाल पाएंगे और दांपत्व जीवन के खास क्षणों का आनंद ले पाएंगे.

साथ में फिल्म देखें:

बच्चे छोटें हों तो उन्हे साथ लेकर फिल्म देखने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता. परंतु आप घर पर डीवीडी के माध्यम से तो फिल्म देख ही सकते हैं. आपका नवजात शिशु जब सो जाए तो अपने ड्राइंगरूम को सिनेमा घर बनाइए. पोपकार्न के साथ किसी नई फिल्म का मजा लीजिए और इन पलों को साथ गुजारिए. कोशिश करिए की आप हर पल का आनंद उठाएँ.

साथ में टहलने जाएँ:

यदि आपके मातापिता आपके साथ ही रहते हैं तो बच्चों के सोने के बाद आप टहलने जा सकते हैं. आपके माता पिता आपके बच्चे का ख्याल रख लेंगे. मोर्निंग वाक तो सम्भव नहीं परंतु इवनिंग वाक पर तो जाया जा ही सकता है. रात गहराते समय अपने पति के साथ टहलने निकलें और बीच रास्ते में आइसक्रीम का आनंद भी उठाया जा सकता है.

खेल खेलें:
बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेल खेलना भी आनंददायक होता है. वैसे भी कभी कभी अपने अंदर सोए बच्चे को जगाना बुरी बात तो नहीं. तो क्यों ना ऐसा करें कि कभी कभी बच्चे बनकर अपने बच्चों के साथ खेल खेलें. इससे आपको काफी सुकून भी मिलेगा.

साथ खाना खाएँ:
यदि आप दोनों कामकाजी व्यक्ति हैं तो सप्ताह में कम से कम दो दिन साथ में खाना अवश्य खाएँ. शनिवार के दिन आप घर में ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं. इससे भी जीवन में कुछ बदलाव महसूस किया जा सकता है.

एकांत ढूंढे:

छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ ही सोते हैं. लेकिन उनके सोने के बाद आप अपने लिए एकांत के कई स्थान ढूंढ सकते हैं. आपका ड्राइंग रूम, रसोई घर, तथा कोई दूसरा कमरा आपके काम आ सकता है. बात इतनी सी है कि आप उन पलों का आनंद लें. बस इतना ध्यान अवश्य रखें कि आपकी आवाजों से बच्चे ना उठ जाएँ.

दरअसल बात इतनी सी है कि आप अपने जीवन के हर पल का आनंद उठाएँ. बच्चों के जन्म के बाद अपने आप से शिकायत करने की बजाय क्यों ना हम कोई बीच का रास्ता चुनकर आनंद उठाएँ. ऐसा हो सकता है बशर्ते आप ऐसा चाहते हों.

एक जीवनकाल में 14 सेक्स साथी - पुरूषों की चाह


एक मनोचिकित्सक की शोध के अनुसार पुरूष अपने पूरे जीवनकाल में कम से कम 14 अलग अलग “सेक्स साथी’ की जरूरत महसूस करते हैं, जबकि महिलाएँ एक या दो. डॉ. लुआन ब्रिजेनडाइन ने अपनी पुस्तक “Male Brain: A Breakthrough Understanding Of How Men And Boys Think” में पुरूषों के सेक्स संबंधित व्यवहार और इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक और अनुवांशिक कारणों के बारे में लिखा है.

इस पुस्तक में कई ऐसी बातें लिखी गई हैं जो काफी चौंकाने वाली हैं. शायद इसलिए डॉ. ब्रिजेनडाइन कहती हैं कि – इसका अर्थ यह नहीं है कि पुरूषों को बलात्कार करने का एक और बहाना मिल जाए. यह सही है कि पुरूष जिनेटिक तौर पर सेक्स के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं परन्तु उन्हें भी अपनी बायोलोजिक “कमी” के बारे में बात करने का अधिकार जरूर है.
इस पुस्तक में इसी बात की पुष्टि की गई है जो हमेशा से मानी जाती रही है – पुरूष सेक्स को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं, वे अपनी भावनाओं को छिपा कर रखते हैं और वे धोखा देने में माहिर होते हैं.

डॉ. ब्रिजेनडाइन का मानना है कि पुरूषों के शरीर में मौजूद टेस्टोस्टेरोन उनमें एक प्रकार के नशे का संचार करते हैं – जिससे पुरूष सेक्स के प्रति उत्साहित रहते हैं. पुरूष के दिमाग का वह हिस्सा जो सेक्स की भावना जगाता है, वह महिलाओं के दिमाग के उसी प्रकार के हिस्से से करीब ढाई गुना अधिक बडा होता है.

महिलाएँ जहाँ फोरप्ले को अधिक महत्व देती है वहीं पुरूषों के लिए सम्भोग का महत्व अधिक होता है. इसके पीछे का बायोलोजिकल कारण यह हो सकता है कि स्खलन के दौरान पुरूषों के दिमाग में भारी मात्रा में ओक्सिटोसिन छूटता है जो उनके लिए आनंद और दर्दनिवारक का कार्य करता है.

डॉ. ब्रेजेनडाइन के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि पुरूष अपनी महिला मित्र या पत्नी से प्रेम नहीं करते हैं या मात्र सेक्स ही चाहते हैं, परंतु उनकी बायोलोजिकल सरंचना उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती है.

स्वतंत्रताप्रेमी पुरूष और सहजीवन प्रेमी महिला की सेक्स आकांक्षाएँ

पुरूष और महिलाओं के विपरित स्वभाव का असर उनके प्रेम संबंधों पर भी पडता है. एक शोध से पता चला है कि महिलाएँ लम्बे काल के प्रेम संबंधों को अधिक महत्व देती है जबकि पुरूष क्षणिक संबंधों को जिसमें की सेक्स तो हो परंतु जिम्मेदारी ना हो. इस शोध के अनुसार इसके पीछे की वजह यह है कि पुरूष अपनी स्वतंत्रता को सर्वाधिक महत्व देते हैं जबकि महिलाएँ अपने लिए एक ऐसा साथी चुनने की कोशिश करती हैं जिसके साथ वह जीवन यापन कर सके.

वर्जिनीया, अमरीका की जैम्स मैडिसन विश्वविद्यालय की कैरोलीन ब्राडशो और उनके मित्रों ने इस विषय पर शोध की है. उन्होनें यह जानने की कोशिश की कि वह क्या है जो पुरूष और महिलाओं को डेटिंग करने के लिए अथवा कुछ पलों के लिए संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है.

पुरूष महिला के साथ संबंध स्थापित करने के लिए पहल करते हैं - वे उनको प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं, उनके साथ खाना खाने या कॉफी पीने जाते हैं, और अंत में उनके साथ यौन संबंध स्थापित करने का प्रयत्न करते हैं. दूसरी तरफ महिलाएँ अमूमन पहल नहीं करती और इंतजार करती हैं कि जिस पुरूष को वे पसंद करती हैं वह उन्हें प्रपोज करे. वह चाहती हैं कि वे अपने पुरूष प्रेमी के विषय मे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करें और इसके पीछे उनका उद्देश्य लम्बे काल तक चलने वाला सबंध स्थापित करना होता है.

परंतु पुरूष अमूमन इस तरह के संबंधो की बजाय हूक-अप सबंधों को महत्व देते हैं. हूक-अप यानी कि किसी पार्टी में किसी महिला से मिलना, छोटी बातचीत करना, उसे आकर्षित करना और अंत में यौन संबंध स्थापित करना. ऐसे संबंध अस्थायी होते हैं और यहाँ जिम्मेदारी का कोई महत्व नहीं होता.

ब्राडशो और उनकी टीम ने 150 महिलाओं और 71 पुरूष विद्यार्थियों का सर्वे किया. उनके सर्वे के नतीजों के अनुसार लम्बे काल का संबंध स्थापित करने के इच्छुक पुरूष और महिला दोनों हूक अप सबधों को महत्व नहीं देते परंतु ऐसा भी नहीं है कि इस तरह के संबंधों को एकदम भी महत्व नहीं दिया जाता. हूक सबंधों को लेकर पुरूषों में अधिक आकर्षण पाया गया. जहाँ 17% पुरूषों ने इसे वांछित करार दिया मात्र 2% महिलाएँ ही इसके लिए तैयार दिखी. दूसरी तरफ परम्परागत डेटिंग को 41% महिलाओं ने पसंद किया तो 20% पुरूष इसके लिए तैयार दिखे.

इसके पीछे सामाजिक और शारीरिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. पुरूष अनुवांशिक रूप से अपनी स्वतंत्रता को प्रेम करते हैं और इससे उन्हें ताकत का अहसास होता है इसलिए वे अल्पकालीन और बिना जिम्मेदारी वाले संबंधों को पसंद करते हैं.