Thursday, May 24, 2012

रात गई, बात गई

फिल्म 'लव आजकल' में सैफ अली खान वन नाइट स्टैंड को खूब इंजॉय करते हैं। फैशन में प्रियंका चोपड़ा भी एक पार्टी में इतना ज्यादा ड्रिंक कर लेती हैं कि एक अजनबी के साथ सेक्शुअल रिलेशन बना लेती हैं। जी हां, यह ट्रेंड इन दिनों मेट्रो सिटीज़ में तेजी से पॉप्युलर हो रहा है। यूथ किसी पार्टी या डिस्क में किसी अजनबी लड़के या लड़की से मिलते हैं और फिर उसके साथ एक नाइट बिताकर अगले दिन अपने-अपने रास्ते निकल लेते हैं। इस तरह की रिलेशनशिप को वन नाइट स्टैंड कहते हैं। इस बारे में रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि वन नाइट स्टैंड जैसे रिलेशन बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन साथ में सावधानी बरतना भी जरूरी है। दरअसल, इस तरह के रिलेशन बनाने का एक ही मोटिव होता है और वह सिर्फ और सिर्फ इंजॉयमेंट। वैसे, मीडिया में जॉब कर रहे रोहित कहते हैं कि वन नाइट स्टैंड आप किसी के भी साथ कर सकते हैं, लेकिन उसके साथ सेक्शुअली रिलेशन बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह आपको रेप या दूसरे किसी इशू में ना फंसा दे। इसलिए अगर आप ध्यान रखेंगे कुछ चीजों का, तो किसी प्रॉब्लम में नहीं फंसेंगे।

नाम हो सीक्रेट
लव आजकल में सैफ एक लड़की के साथ वन नाइट स्टैंड करता है और उसका नाम भी नहीं पूछता। जी हां, वन नाइट स्टैंड का पहला रूल है कि आप एक-दूसरे के लिए पूरी तरह अनजान हों और आप दोनों को एक-दूसरे का नाम पता नहीं होना चाहिए। चाहे आप उसके साथ वह एक रात बहुत ही इंजॉय करें, लेकिन आप दोनों अपना नाम सीक्रेट ही रखें। आप उसे बेबी, स्वीटी, डियर वगैरह कह सकते हैं।

इन्फर्मेशन ना लें
आपने उसके साथ नाइट खूब इंजॉय की हो या उसके साथ समय बिताकर आपको लगे कि आपको उसके बारे में कुछ पता होना चाहिए। अगर आपके मन में ऐसा ख्याल आता है, तो उसे भूल जाएं। कई बार यंगस्टर्स वन नाइट स्टैंड करने के बाद मॉर्निंग में अपने-अपने घर जाने लगते हैं, तो अक्सर लड़के- लड़की का फोन नंबर पूछने की गलती कर देते हैं। उन्हें लगता है कि लड़की उनके बारे में क्या सोचेगी, जैसी फीलिंग्स आप अपने मन से निकाल दें।

सेंटी ना हों
आपने रात को एक अजनबी लड़के या लड़की के साथ टाइम बिताने के दौरान जो बातें की, उन्हें वहीं भूल जाएं। कई लड़के नेक्स्ट डे अपने दोस्तों से बातें शेयर करते हैं, जो कि सही नहीं है। इससे आपके दोस्त या कॉलीग उस लड़के या लड़की की पहचान कर सकते हैं। यानी लड़के या लड़की ने आपको कुछ बातें शेयर भी की हैं, तो उन्हें दूसरों के सामने ना कहें।

बहाने ना बनाएं
आपने रात को तो खूब इंजॉय किया, लेकिन जैसे ही सुबह हुई तो आप बहाने बनाने लगे कि आपके पैरंट्स आने वाले हैं या फिर आपको कहीं जाना है वगैरह। दरअसल, इस तरह के बहानों से लड़के या लड़की को यही लगेगा कि आपका मतलब पूरा हुआ और अब आप उससे पल्ला झाड़ रहे हैं।

कैजुअल रहें
आप लड़के या लड़की से पार्टी में मिले या फिर किसी दोस्त ने मिलवाया हो, लेकिन जब आप उसके साथ वन नाइट स्टैंड करें, तो उसके साथ अपना बिहेव कैजुअल रखे। इससे वह आपके साथ रिलेशन बनाते समय ऑकवर्ड फील नहीं करेगा।

ना हों वियर्ड
आप जब किसी से प्यार नहीं करते हैं और उसके साथ रिलेशन बनाते हैं, तो अक्सर पार्टनर वियर्ड हो जाते हैं। इसलिए रिलेशनशिप बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि आपका बिहेवियर नॉर्मल हो।

महिलाएं आपस में होती हैं सेक्शुअली अट्रैक्ट

महिलाएं केवल पुरुषों की ओर ही आकर्षित नहीं होतीं। सच यह है कि ज्यादातर महिलाएं दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षित होती हैं। एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि आधी से अधिक महिलाएं दूसरी महिलाओं की ओर अट्रैक्ट होती हैं।

इस रिसर्च की मानें तो औरतें होमो और हेट्रो सेक्शुअल, दोनों होती हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। बाई-सेक्सुअल होने की प्रवृत्ति उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में बढ़ती जाती है।

बोइज़ी स्टेट यूनिवर्सिटी ने अपने इस रिसर्च में 484 हेट्रोसेक्शुअल महिलाओं को शामिल किया है, जिनमें से 60 पर्सेंट महिलाओं ने दूसरी महिलाओं की ओर अट्रैक्ट होने की बात मानी, जबकि 45 पर्सेंट महिलाओं ने कबूला कि वह महिला को किस कर चुकी हैं। सर्वें में शामिल 50 पर्सेंट महिलाओं ने कहा कि वह दूसरी किसी महिला के साथ सेक्स के ख्यालों में खोई रहती हैं।

बोइज़ी स्टेट यूनिवर्सिटी में साइकॉलजी की एक प्रफेसर एलिज़ाबेथ मॉर्गन कहती हैं कि स्ट्रेट महिलाओं ( जो विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होती हैं) में भी दूसरी महिलाओं के प्रति दोस्ती से कुछ ज्यादा का भाव रहता है।

कहा गया है कि अधिकतर महिलाओं की फ्रेंडशिप किसी रोमांटिक रिलेशनशिप के बहुत करीब होती है। डेली मेल को दिए बयान में प्रफेसर ने यह भी कहा कि महिलाएं एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ी होती हैं, जो उनके बीच यौन संबंधों और रोमांटिक भावना को पैदा करने का मौका देती है।

सेक्शुअल क्राइम में आगे हैं भारतीय मर्द

भारतीय समाज के लिए एक और शर्मनाक खबर है। भारत में हर चार में से करीब एक पुरुष अपने जीवन में एक न एक बार सेक्शुअल क्राइम (यौन अपराध) करता है और हर पांच में से एक पुरुष अपनी पत्नी (या पार्टनर) को सेक्स करने के लिए जबरदस्ती करता है। यह बात किसी फौरी आकलन में नहीं कही गई है, ब्लकि एक इंटरनैशनल एजेंसी के सर्वे में भारतीय पुरुषों द्वारा खुद कबूल की गई है।

इंटरनैशनल मेन ऐंड जेंडर ईक्वलिटी सर्वे का हालिया स्टडी से भारतीय पुरुषों के बारे में यह खुलासा होता है। इंटरनैशनल स्तर पर देखा जाए तो सेक्शुअल वायलेंस में सबसे कम अपराध जिन जगहों पर देखा गया, उनमें ब्राजील ( 2% पुरुषों ने स्वीकारा) और चिली, क्रोशिया, मेक्सिको और रवांडा ( 9% से कम पुरुषों ने स्वीकारा) का नाम रहा।

लिंग समानता और व्यवहार के मुद्दे पर यह सर्वे दुनिया के चार विकासशील देशों में किया गया था। इंटरनैशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन विमिन ( ICRW ) के भारत और अमेरिका के रिसर्चरों और ब्राजील के इंस्टि्टयूटो प्रोमुंडो ने करीब 8 हजार पुरुषों और 3,500 महिलाओं पर यह सर्वे किया। सर्वे में 18 से 59 साल के लोगों को शामिल किया गया।

लिंग संबंधी न्याय करने वालों की सूची में पहले नंबर पर रहा क्रोशिया (82 परसेंट) जबकि ब्राजील, चिली और मेक्सिको से 50 परसेंट पुरुष इस श्रेणी में आए। इन देशों में सबसे कम विकास करने वाले देश रवांडा की हालत भी हमसे बेहतर पाई गई, यानी करीब 30 परसेंट पुरुष महिलाओं के प्रति न्यायसंगत रहने वालों की सूची में आए।

65% से ज्यादा भारतीय पुरुष मानते हैं कि महिलाओं को परिवार को एक साथ जोड़े रखने के लिए हिंसा बरदाश्त करनी चाहिए और कभी कभी महिलाएं पिटने वाले काम करती हैं। दुनिया भर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में अपनी योग्यता का परचम फहराने वाले भारतीय पुरुष 'लिंग संबंधी न्याय के पक्षधर' के पैमाने पर काफी नीचे नजर आए। मात्र 17 परसेंट पुरुष ही इस कैटिगरी में शामिल हो पाए। सर्वे में शामिल 6 देशों में से भारत के पुरुष सबसे निचले पायदान पर खड़े हैं। 24 परसेंट पुरुषों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने जीवन में कभी न कभी सेक्शुअल वायलेंस किया है।

सर्वे में चौकांऊ तथ्य यह भी रहा कि हालांकि पुरुष घरों में मार पिटाई करते हैं लेकिन घर के बाहर वह आपराधिक कामों या मार पिटाई से दूर रहते हैं। घर के बाहर, केवल 4 परसेंट पुरुष लूट पाट और 7 परसेंट किसी प्रकार के हथियार के जरिए मार पीट करते हैं। ICRW के दिल्ली स्थित एशिया क्षेत्र के निदेशक रवि वर्मा ने कहा, 'भारतीय युवा पुरुष भी महिलाओं के प्रति नहीं बदल रहा है और उसमें महिलाओं की अपेक्षा धीमे बदलाव हो रहे हैं। वे अब भी पुराने जमाने में जी रहे हैं।'

सर्वे के लिए भारत में जिनका इंटरव्यू किया गया, उनमें से सेक्शुअल वायलेंस के संबंध में स्वीकारोक्ति करने वाले 1000 पुरुष तो अकेले दिल्ली से थे।

6 पार्टनर के साथ सोते हैं...

एक नए सर्वे ने खुलासा किया है कि भारतीय महिला और पुरुष दोनों औसतन 6 पार्टनर के साथ सोते हैं।

मौका था नैशनल कॉन्डम वीक का, जिसमें ड्यूरेक्स के साथ हुए इस सर्वे में शॉकिंग आकड़े का खुलासा हुआ है। डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चार में से एक भारतीय पुरुष ने अपने अफेयर की बात स्वीकार की, जबकि 12 पर्सेंट लोगों ने बेडरूम में इंजॉय करने की बात को स्वीकारा है।

भारत की तुलना में ऑस्ट्रेलियन पुरुष औसतन 24 पार्टनर के साथ सोते हैं, जबकि महिलाएं औसतन 11 पार्टनर के साथ सोती हैं। यदि चीनी पुरुषों और महिलाओं की बात करें तो वे इस मामले में भारतीय से थोड़े पीछे हैं, क्योंकि वे औसतन 5 पार्टनर के साथ हमबिस्तर होते हैं।

सर्वे ने यह भी खुलासा किया है कि यूके में नवयुवकों की आधी जनसंख्या अपनी वर्जिनिटी खोने के बाद कॉन्डम का इस्तेमाल करती है। अमेरिका के 40 प्रतिशत युवा और फ्रांस के 35 प्रतिशत युवा कॉन्डम का इस्तेमाल कम पसंद करते हैं, जबकि ग्रीस के 66 पर्सेंट, थाईलैंड के 65 पर्सेंट और साउथ कोरिया के 65 पर्सेंट लोग इस मामले में सतर्क रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

साइकलिंग घटाए सेक्स का इन्जॉयमेंट

एक रिसर्च बताती है कि महिलाओं के लंबे समय तक जिम में साइकलिंग करने का असर उनकी सेक्सुअल इन्जॉयमेंट पर पड़ता है। अब आप देखें कि आपको क्या चूज करना है। टोन्ड लोअर बॉडी के लिए जिम में देर तक साइकलिंग करना आपके लिए घाटे का सौदा भी हो सकता है। दरअसल, एक रिसर्च बताती है कि जिम में रेग्युलर साइकलिंग करने वाली महिलाओं के पेल्विक एरिया में सेंसेशन कम हो जाता है। इससे उन्हें पूरा सेक्सुअल इन्जॉयमेंट नहीं मिलता।

गौरतलब है कि यह रिसर्च येल यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने 48 महिलाओं पर की है। इसके नतीजे बताते हैं कि जिम में यूज होने वाली साइकिल का हैंडलबार नॉर्मल साइकिल से बहुत नीचे होने की वजह से इसका सीधा इफेक्ट सैक्सुअल प्लेजर पर पड़ता है। दरअसल, हैंडबार की लो पोजिशन ऐसी होती है, जिससे सारा प्रेशर जेनिटल एरिया की नर्व्स और ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। लंबे समय तक पड़ने वाला यह प्रेशर बाद में सेक्सुअल सेंसेशन को कम कर देता है।

क्या हुआ रिसर्च में
रिसर्च में शामिल सभी महिलाओं से हर हफ्ते 10 मील की दूरी तक साइकलिंग करवाई गई। एक महीने तक से रिजल्ट नोट किए गए। यही नहीं, जब महिलाओं को स्टेशनरी मशीन पर साइकिलिंग करवाई, तो उनको जेनिटल एरिया में किसी भी तरह की टिंगलिंग, सॉरेन या सेंसुएशन के बारे में तुरंत बताने को कहा गया। यही नहीं, रिसर्चर्स ने पेल्विक एरिया में किसी भी तरह की सेंसुएशन को नोट करने के लिए प्रेशर मैप भी यूज किया।

इस सेंसेशन को माइक्रोज में नापा गया। साइंटिस्टों ने पाया कि हैंडलबार की लो पोजिशन की वजह से जब महिलाएं सीट पर बैठती हैं, तो सीट पर प्रेशर बढ़ जाता है, जबकि वैजाइनल के अंदरूनी हिस्से में प्रेशर कम पड़ता है, जिससे जेनिटल सेंसुएशन कम हो जाती है। इस प्रोसेस के रेग्युलर होने का असर सेक्सुअल सेंसेशन पर पड़ता है।

वैसे, 2006 में भी इस यूनिवर्सिटी की ओर से साइकलिंग और जेनिटल सेंसुएशन के कम होने पर रिसर्च की गई थी, लेकिन तब इसकी सही वजह वे नहीं जान पाए थे।

Face Book करवाए तलाक ?

यह क्या कर रहे हैं आप? सात फेरे ले चुके हैं, फिर भी एफबी स्टेटस में सिंगल लिखा है। इससे पहले कि आपके पार्टनर को इस पर गुस्सा आ जाए, अपने स्टेटस को अपडेट कर लें, वरना डिवोर्स के केस में कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

और इस बात को कतई मजाक में ना लें, क्योंकि अपने पति के ऐसा ना करने पर 28 साल की एक साउथ इंडियन महिला ने इसी वजह से डिवोर्स का केस फाइल किया है। और वह भी शादी के दो महीनों के अंदर!

औरंगाबाद में दायर हुई इस पिटिशन में महिला ने कहा है कि शादी के दो महीने बाद भी उसके पति ने फेसबुक पर अपना स्टेटस नहीं बदला है और ना ही उन्होंने फेसबुक पर अपनी मैरिज अनाउंस की है। इसलिए वह अपने पति पर बिलीव नहीं कर सकती और उससे अलग होना चाहती है।

हालांकि, उसके पति ने यह सफाई दी है कि शादी के बाद अपने फर्नीचर बिजनेस में बिजी होने की वजह से वह काफी दिनों से फेसबुक चेक नहीं कर पाए हैं और इसी कारण स्टेटस अपडेट नहीं सके। यही नहीं, उसके उसने जज से गुजारिश की है कि अगर यह डिवोर्स रोक दिया जाता है, तो वह अब अपना स्टेटस अपडेट कर देंगे या फिर फेसबुक अकाउंट ही डी-ऐक्टिवेट कर देंगे।

हालांकि महिला अपनी बात पर टिकी है। दोनों की ये दलील सुनकर फिलहाल कोर्ट ने कपल को छह महीने की काउंसिलिंग का डिसिजन दिया है।

अब इनके केस का फैसला तो छह महीने बाद होगा, लेकिन एफबी एडिक्ट लोग जान लें कि फेसबुक को एविडेंस मानते हुए डिवोर्स की मांग करने का यह पहला केस नहीं है। गौरतलब है कि पिछले दो सालों में बिहेवियर बेस्ड डिवोर्स पिटिशन में 50 पर्सेंट तक बढ़ी हैं, जिनमें एविडेंस के तौर पर फेसबुक को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है।

जब बच्चा पूछे...

बच्चे कई बार सेक्स संबंधित ऐसे सवाल पैरंट्स से पूछ बैठते हैं , जिनका जवाब देना उलझन भरा काम होता है। कई बार मां-बाप ऐसे सवालों को टाल जाते हैं तो कई बार बच्चों को डांट देते हैं। दोनों ही चीजें बच्चे के मानसिक विकास के लिए नुकसानदायक हैं। फिर क्या करें ? बच्चे के ऐसे हर सवाल का खास तरीके से जवाब दें।

4-9 साल के बच्चों के सवाल

बच्चे कहां से आते हैं ? मैं कहां से आया ? पड़ोस वाली आंटी का पेट बड़ा क्यों है ?( प्रेगनेंट महिला को देखकर)
यह एक ऐसा सवाल है , जो इस उम्र के लगभग हर बच्चे के दिमाग में उठता है। ऐसे सवाल पूछने पर बच्चे को डांटना या उसकी बात को आई-गई करना ठीक नहीं है , क्योंकि इस जिज्ञासा को अगर आपने शांत नहीं किया तो वह कहीं और से जानने की कोशिश करेगा और ऐसे में बहुत मुमकिन है कि वह भ्रमित हो जाए। इस उम्र के बच्चे कुदरत और जानवरों के उदाहरणों से किसी बात को अच्छी तरह समझ लेते हैं।

ऐसे में , इस सवाल का जवाब देने के लिए आप उसे कहीं गार्डन या बाहर वॉक पर ले जाएं। फूलों का उदाहरण देकर समझाएं कि कैसे वे पैदा होते हैं और फिर मां के शरीर से अलग होकर खुद अपनी बढ़ोतरी करते हैं। आप उसे सीधे-सीधे यह भी कह सकते हैं कि तुम्हारी मां के शरीर में एक खास अंग है , जिसे गर्भाशय कहते हैं। तुम वहीं से आए हो। इस उम्र में जन्म की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताने की जरूरत नहीं है और न ही ऐसी कोई बात बच्चे को कहें कि वह भगवान के यहां से आया या उसे किसी साधु बाबा के यहां से लाए थे। उसे साफ-साफ बताएं कि वह मां के शरीर से पैदा हुआ है। प्रेग्नेंट महिला के बारे में भी बता सकते हैं कि इसी तरह उन आंटी के शरीर से भी एक बेबी पैदा होगा।

अरे , इसमें सबकी फोटो है , मेरी क्यों नहीं है ? ( पैरंट्स की शादी की ऐल्बम देखकर)
इस सवाल को हैंडल करने के कई तरीके हो सकते हैं। 4-6 साल के बच्चों को असली बात समझा पाना मुश्किल है। इस सवाल का जवाब कुछ इस तरह दे सकते हैं कि तुम्हें तब तक मां-पापा इसे दुनिया में लाए ही नहीं थे। भ्रमित करने वाले जवाब देने से बचना चाहिए।

लड़कियों और लड़कों के प्राइवेट पार्ट्स अलग-अलग क्यों होते हैं ? ( कई बार बच्चे एक-दूसरे के कपड़ों में झांकते हैं और उनकी जिज्ञासा बढ़ती है।)
इतनी छोटी उम्र में आप बच्चे को शरीर के अंगों की जानकारी नहीं दे सकते। इसलिए उसे समझाएं कि दुनिया में हर शख्स अलग होता है और अलग ही दिखाई देता है। ईश्वर ने हर शख्स को अलग-अलग बनाया है और इसीलिए उनके शरीर की बनावट भी अलग होती है। मसलन लड़कों के शरीर की बनावट अलग होती है और लड़कियों के शरीर की अलग। इसी तरह कुत्ता , बिल्ली , गाय , भैंस और भी तमाम जीव अपने आप में खास होते हैं। तुम लड़के हो और तुम्हारे अंग लड़कियों से अलग बनाए गए हैं।

घर में रखे या ऐड में देखकर सैनिटरी नैपकिन के बारे में पूछना कि यह क्या है ?
सैनिटरी नैपकिंस के बारे में पूछने पर बच्चों को बता सकते हैं कि ये नैपकिन हैं। जैसे नाक या हाथ पोंछने के लिए तुम सामान्य नैपकिन का इस्तेमाल करते हो , उसी तरह शरीर के प्राइवेट पार्ट्स को पोंछने और उन्हें साफ रखने के लिए मां इनका इस्तेमाल करती है। ये नैपकिन उन नैपकिन से थोड़े अलग होते हैं जिनका इस्तेमाल तुम करते हो , लेकिन इनका काम वही है। इस उम्र में इससे ज्यादा बच्चे को बताने की जरूरत नहीं है।

कॉन्डम क्या होता है ? ( टीवी आदि में ऐड देखकर)
कॉन्डम के बारे में बच्चे की जिज्ञासा बेहद नॉर्मल है। अगर घर में कॉन्डम को छिपाकर भी रखा जाए तो भी इस बात की पूरी संभावना है कि बच्चे टीवी ऐड या सड़कों पर लगे विज्ञापनों के जरिए इस शब्द से परिचित हो चुके हों और इस बारे में आपसे जानने की कोशिश करें। इतने छोटे बच्चों को बता सकते हैं कि जैसे हाथों को किसी बीमारी से बचाने के लिए हम ग्लव्स पहन लेते हैं , उसी तरह कॉन्डम भी एक ग्लव्स की तरह होता है , जो पुरुषों को बीमारियों से बचाता है। अगर बच्चा 10-12 साल के आसपास है तो उसे यह भी कह सकते हैं कि कॉन्डम सेक्स के दौरान पुरुषों को बीमारी से बचाने और बेबी होने से रोकने के काम आता है। सेक्स शब्द का प्रयोग करने से घबराएं नहीं , क्योंकि बच्चे को शिक्षा देने के लिए एक-न-एक दिन इस शब्द का इस्तेमाल करना ही है।

कुत्ता या दूसरे किसी जानवर को मैथुन करते देखकर कि ये क्या कर रहे हैं ?
ऐसी स्थिति आमतौर पर नहीं आती लेकिन कभी-कभार ऐसा हो भी सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चों के पूछने पर यह कह सकते हैं कि ये आपस में खेल रहे हैं।

9-14 साल के बच्चों के सवाल

मेरे शरीर में ये अचानक बदलाव क्यों आ रहे हैं ? मसलन दाढ़ी मूंछ आना , प्राइवेट पार्ट्स पर बाल , मुहांसों की शुरुआत आदि।
10 साल की उम्र किसी बच्चे को यौवन के बारे में जानकारी देने का सही समय है। बच्चों को सबसे पहले इस बात का एहसास दिलाया जाए कि उनके शरीर में जो भी बदलाव आ रहे हैं , वे बिल्कुल नॉर्मल हैं और जरूरी भी। उन्हें बताएं कि तुम्हारे शरीर के विभिन्न अंगों पर आने वाले बाल , आवाज में आने वाला बदलाव , मुंहासे निकलना आदि सभी कुछ नॉर्मल है और ऐसा हॉर्मोनल बदलाव की वजह से हो रहा है। ऐसा सभी के साथ होता है। हमारे साथ भी ऐसा हुआ था। लड़कियों और लड़कों दोनों में ही ऐसे बदलाव आते हैं , हालांकि कुछ चीजें लड़कों और लड़कियों दोनों में अलग-अलग हो सकती हैं।

पीरियड्स क्या होते हैं ?
यह जानना जरूरी है कि लड़कियों को पीरियड्स की जानकारी उस समय ही दे दी जानी चाहिए , जब उनके पीरियड्स शुरू नहीं हुए हों और होने वाले हों। यह ऐसा सवाल है , जिसका जवाब मां को बेटी के पूछने से पहले ही दे देना है। ऐसी अवस्था कौन-सी होगी , इसका फैसला मां से बेहतर कोई नहीं कर सकता , फिर भी आमतौर पर 10 साल की उम्र यह सब जानकारी देने के लिए ठीक है। इस बारे में जानकारी देने का काम मां खुद करे या फिर स्कूलों में इंस्ट्रक्श्नल बुक्स और विडियो के जरिए भी यह जानकारी अच्छे ढंग से दी जा सकती है। उन्हें बताया जा सकता है कि यह नॉर्मल है और सभी लड़कियों के साथ ऐसा होता है। बेटियों के साथ मां अपना पर्सनल अनुभव भी शेयर कर सकती हैं और उन्हें सभी बातें विस्तार से बता सकती हैं। मां उन्हें बता सकती हैं कि उनके साथ भी जब ऐसा हुआ था , तो उन्हें भी अजीब-सा लगा था और दर्द भी हुआ लेकिन बाद में यह बिल्कुल नॉर्मल चीज बन गई।

नाइटफॉल क्या होता है ? मास्टरबेशन करना गलत है क्या ?
आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यौवन थोड़ी देर से आता है। मसलन जहां यह सब जानकारी देने का वक्त लड़कियों में 9 साल है , वहीं लड़कों को इस बारे में 11-12 साल की उम्र में बता देना चाहिए। नाइटफॉल या मास्टरबेशन ऐसी बातें हैं , जिनके बारे में आपका बच्चा अगर आपसे पूछ रहा है तो हो सकता है वह इन चीजों से गुजर चुका हो। नाइटफॉल के बारे में आप उसे समझा सकते हैं - नाइटफॉल होना बिल्कुल नॉर्मल और प्राकृतिक है और इस बात का संकेत है कि तुम यौवन अवस्था में हो। तुम्हारे शरीर में हर वक्त सीमेन बनता रहता है और जब यह ज्यादा इकट्ठा हो जाता है तो सोते वक्त बाहर निकल जाता है। ज्यादातर लड़कों को ऐसा होता है। इसी तरह यही सीमेन जब अपने आप प्राइवेट पार्ट्स को टच करके बाहर निकाला जाता है , तो उसे मास्टरबेशन कहते हैं। सीमेन किसी भी तरह से बाहर निकले , उससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता और न ही ऐसा करने से कोई कमजोरी आती है , लेकिन अति तो हर चीज की बुरी होती है। वैसे भी इस उम्र में मन को तमाम दूसरी क्रिएटिव चीजों में लगाना चाहिए , मसलन संगीत , आर्ट , कोई खेल आदि। ऐसा करने से तुम्हारा विकास भी होगा और मन बार-बार उस ओर नहीं भागेगा।

बच्चा कैसे पैदा किया जाता है ? मां के शरीर से वह बाहर कैसे आता है ?
इस उम्र तक आते-आते बच्चे की समझ इतनी विकसित हो जाती है कि वह बच्चा पैदा होने के बारे में थोड़ा-बहुत समझ ले। उसे बता सकते हैं कि बच्चा मां के पेट में होता है। जब बच्चा पैदा होने वाला होता है तो मां के पेट के अंत में मौजूद सर्विक्स फैलने लगती है। वहां की मांसपेशियां बच्चे को
बाहर धकेलने लगती हैं और बच्चा मां के प्राइवेट पार्ट के जरिए बाहर आ जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ घंटों का वक्त लग जाता है।

क्या मैं बच्चा पैदा कर सकती/सकता हूं ?
लड़कियों और लड़कों दोनों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या वे भी ऐसा कर सकते हैं। उन्हें इस सवाल का जवाब इस तरह दे सकते हैं - नहीं , तुम ऐसा नहीं कर सकते। बच्चा पैदा करने के लिए हमें शारीरिक , मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत और विकसित होना बहुत जरूरी है। अभी तुम्हारा शरीर उतना विकसित नहीं है। तुम्हारे शरीर के अंदर अभी वे सभी प्रक्रियाएं भी शुरू नहीं हुई हैं , जो बच्चा पैदा करने के लिए जरूरी हैं , लेकिन जब तुम बड़े हो जाओगे , तो तुम्हारा शरीर इस काम के लिए तैयार हो जाएगा।

बाल यौन शोषण(चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज)
बच्चों का यौन शोषण करने वाले लोग दिखने में सामान्य ही होते हैं , लेकिन देखा गया है कि ऐसे लोग बच्चों के साथ जरूरत से ज्यादा वक्त बिताते हैं और उनके साथ ज्यादा घुलने-मिलने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों को पकड़ना या उनकी पहचान कर पाना आसान नहीं है। कई बार ऐसे लोग आपके बेहद नजदीकी भी हो सकते हैं , जिन पर आप शक भी नहीं कर पाएंगे। ऐसे में बेहतर यही है कि बच्चे को बाल यौन शोषण के बारे में परिचित कराएं और उसे साफ-साफ बताएं कि अगर कोई भी उसके साथ ऐसी हरकत करता है तो वह फौरन आपको बताए।

ऐसे समझाएं बच्चे को
यौन शोषण से बच्चे खुद को बचा सकें , इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उन्हें पूरी सेक्स एजुकेशन ही दी जाए। देखिए , एक जागरूक और समझदार मां अपनी पांच साल की बेटी को कैसे बता रही है इस सबके बारे में। आप भी यह तरीका अपना सकते हैं:
- बेटा , टच तीन तरह के होते हैं। गुड टच , बैड टच और सीक्रेट टच।
- गुड टच वह टच होता है , जिससे तुम्हें खुशी मिलती है। जैसे कोई तुम्हें गले से लगा ले , तुमसे हाथ मिला ले , तुम्हारी पीठ थपथपा दे या हाई फाइव करे।
- दूसरी तरफ बैड टच तुम्हें परेशान करता है। इससे तुम्हें बुरा लगता है। मसलन कोई तुम्हें नोच ले , चिकोटी काट ले या किक मार दे।
- अब बात सीक्रेट टच की। सीक्रेट टच के दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा यह है कि यह टच तुम्हारे प्राइवेट पार्ट्स पर किया जाता है यानी शरीर के उन हिस्सों पर जो स्विम सूट पहनने के दौरान कवर हो जाते हैं। मोटे तौर पर ये तीन अंग हैं: सीना , बॉटम और आगे का हिस्सा। याद रखो , ये प्राइवेट हिस्से हैं और इन्हें देखने और टच करने का अधिकार किसी को नहीं है। सीक्रेट टच का दूसरा हिस्सा यह होता है कि ऐसा टच करने वाला व्यक्ति तुम्हें यह कहेगा कि इस बात को किसी को मत बताना। हो सकता है , वह तुम्हें डराए और धमकाए कि यह बात किसी को नहीं बतानी है।

यहां यह जानना जरूरी है कि नहलाते वक्त मां ऐसा कर सकती है। वह सीक्रेट टच नहीं है क्योंकि वह कभी नहीं कहती कि यह बात किसी को बताना मत। इसी तरह डॉक्टर अगर तुम्हें इन जगहों पर टच करते हैं , तो वह भी सीक्रेट टच नहीं है क्योंकि डॉक्टर भी यह कभी नहीं कहते कि यह किसी से कहना मत। हालांकि डॉक्टर तुम्हारे इन अंगों को चेक तभी कर सकते हैं , जब तुम्हारे मां या पापा में से कोई साथ हो। लेकिन अगर कोई शख्स तुम्हें ऐसी जगहों पर टच करे और तुम्हें धमकाए या कहे कि यह बात किसी को मत बताना तो यह बात तुम्हें फौरन अपने मम्मी या पापा को जरूर बतानी है।

एक्सपर्ट पैनल
डॉ. सय्यारा अंसारी चाइल्ड साइकायट्रिस्ट , कोलंबिया एशिया अस्पताल
डॉ. समीर पारिख , साइकायट्रिस्ट , मैक्स हेल्थ केयर

एक्सपर्ट्स से पूछें
हर बच्चा अपने आप में यूनीक है और हर बच्चे के मन में उठने वाले सवालों का स्तर भी। हमने कई आम सवालों को छूने की कोशिश की है , फिर भी अगर आपका बच्चा कोई ऐसा सवाल पूछता है जिसका यहां जिक्र होने से रह गया है , तो आप हमें अपना सवाल हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकते हैं। मेल करें: sundaynbt@gmail.com पर। हमारे एक्सपर्ट आपको बताएंगे कि उस सवाल का सही जवाब बच्चे को कैसे दिया जाए। आपके सवाल हमें मंगलवार तक मिल जाने चाहिए।

कुछ उलझन भरी स्थितियां
- अगर बच्चा पैरंट्स को लवमेकिंग करते देख ले।
अगर बच्चा पैरंट्स को प्राइवेट पलों में देख ले , तो उसके मन पर इसका गहरा असर हो सकता है। ऐसे में उसे हर बात समझाना जरूरी है। अगर पैरंट्स ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि बच्चे के सामने आ सकें और बच्चा अचानक कमरे में आ जाता है , तो हड़बड़ाएं नहीं। उसे आराम से कह दें , बेटा अभी मां-पापा को प्राइवेट टाइम चाहिए। अभी अपने कमरे में चले जाओ , तो कुछ ही मिनट में हम आपसे बात करेंगे। बाद में बच्चे को समझाएं कि मां-पापा एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे। ऐसा करते वक्त हम दरवाजा बंद कर लेते हैं क्योंकि यह सब प्राइवेट होता है , लेकिन आज हम दरवाजा बंद करना भूल गए। अब बच्चे के रिएक्शन देखें। अगर बच्चा अभी भी परेशान है तो उसे समझाएं कि न तो उसने ऐसे अचानक आकर कोई गलती की है और न ही मां-पापा कोई गलत काम कर रहे थे। यह सब नॉर्मल है। कोशिश करें कि बच्चे के मन में कहीं भी यह भाव न पनपने पाए कि पापा मां को परेशान कर रहे थे।

- अगर टीवी देखते हुए कोई लवमेकिंग या किसिंग सीन आ जाता है।
टीवी देखते वक्त अगर अचानक किसिंग या लवमेकिंग सीन आ जाए तो हड़बड़ाएं नहीं और न ही टीवी बंद करने या चैनल बदलने की कोशिश करें। सहज भाव से उसे वैसे ही चलने दें और जब सीन खत्म हो जाए तो बच्चे को देखें। अगर वह असहज है या खुद ही उसके बारे में पूछ बैठता है तो इसे शिक्षा देने का एक मौका समझें। बच्चे को उसकी उम्र के मुताबिक , इस बारे में समझा सकते हैं। मसलन ये लोग आपस में प्यार कर रहे थे या यह दो बड़े लोगों के बीच प्यार करने का एक तरीका होता है। अगर आप असहज हो गए या चैनल बदला तो बच्चे पर गलत असर हो सकता है , लेकिन उसे सही सूचना देने से उस पर गलत असर कभी नहीं होगा।

- अगर बच्चा बड़ों को कपड़े बदलते या नहाते चुपचाप देखने की कोशिश करता है।
जिज्ञासा के चलते बच्चे छुपकर बड़ों को कपड़े बदलते या नहाते देखने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसा होना नॉर्मल है। ऐसे में , उन्हें समझाएं कि यह गलत बात हैं। किसी को भी छिपकर नहीं देखना चाहिए। उनसे कहें- तुम्हें भी यह अच्छा नहीं लगेगा कि तुम्हें कोई छिपकर देखे। इसलिए तुम्हें भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए। भूलकर भी बच्चे को डांटें नहीं। उसे यह एहसास न होने दें कि उसने कोई गलत काम कर दिया है। अगर बच्चे को थोड़ी समझ है तो इस मौके पर उसे पुरुष और स्त्री के अंगों के बारे में भी थोड़ी जानकारी दी जा सकती है।

समझाते वक्त पैरंट्स रखें ध्यान
- बच्चे को सेक्स से संबंधित ज्ञान देने की कोई उम्र नहीं होती। यह हर बच्चे के स्तर पर निर्भर करता है। वैसे बच्चे की सेक्स एजुकेशन तभी शुरू हो जाती है , जब वह पालने में होता है।
- बच्चे जब भी सेक्स से संबंधित कोई सवाल पूछें तो उसे एक ऐसे मौके के तौर पर देखना चाहिए , जब आप बच्चे की सेक्स एजुकेशन की शुरुआत कर सकते हैं।
- बच्चे जब भी इस तरह के सवाल पूछें , तो कोशिश यह होनी चाहिए कि उनके इन सवालों के जवाब एकांत में दिए जाएं। अगर बच्चा किसी के सामने सवाल पूछ बैठता है तो उसे प्यार से कह दें कि इसके बारे में हम तुम्हें बाद में बताएंगे और फिर इस वादे को पूरा करें।
- किसी भी सवाल का जवाब इस अंदाज में न दिया जाए , जो बालक की भावनाओं को भड़काए या उत्तेजित करे।
- बच्चे के साथ सख्त और गैर-दोस्ताना रवैया न रखें। आप जो भी बता रहे हैं , वह उसके विकासकाल के मुताबिक होना चाहिए। वैसे ज्यादा ज्ञान भी दे देंगे तो उसका कोई नुकसान नहीं होगा। ज्ञान कभी हानिकारक हो ही नहीं सकता।
- बच्चा अगर शांत स्वाभाव का है तो उसे इस विषय की ज्यादा बातें बता सकते हें , जबकि चंचल बच्चों को थोड़ा कम ज्ञान देना ही ठीक रहता है।
- अगर कभी बच्चे के किसी सवाल का जवाब मालूम नहीं है या उसने कोई ऐसा प्रश्न पूछ डाला जिसका जवाब देने में आप झिझकते हैं या देना नहीं चाहते तो आप उससे कह सकते हैं - तुम्हारा सवाल बहुत अच्छा है , लेकिन हमें भी इसका जवाब पता नहीं है। हम इसका जवाब मालूम करने की कोशिश करेंगे और फिर तुम्हें बताएंगे।
- ध्यान रखें , मां-बाप का आपस में और बच्चे के प्रति जैसा बर्ताव होगा , बच्चा सेक्स संबंधी ज्ञान को उसी के अनुरूप लेगा। जिन मां-बाप के बीच प्रेम होता है और जो बच्चे को भी इस बात का एहसास कराते हैं कि वे उसे बहुत प्यार करते हैं , उनके बच्चों के सेक्स संबंधी ज्ञान में ज्यादा और बेहतरीन तरीके से बढ़ोतरी होती है।

मिट्टी से ठीक होता है गठिया रोग

बुंदेलखण्ड की धरती पर कई देवी-देवताओं के स्थान हैं और उनसे जुड़ी लोगों की आस्थाएं भी अलग-अलग हैं। इन्हीं में से एक है हमीरपुर जनपद के झलोखर गांव में भुवनेश्वरी देवी का अनूठा स्थान जहां न मंदिर है और न कोई मूर्ति। नीम के पेड़ के नीचे एक भारी-भरकम टीले पर विराजमान इस देवी स्थान के बारे में लोगों का मानना है कि यहां की मिट्टी लगाने मात्र से गठिया रोग ठीक हो जाता है। वैसे तो बुंदेलखण्ड की सूखी की धरती पर लोकी दाई, हरसोखरी दाई, चिथरी दाई, कथरी दाई, भुइयांरानी, काली दाई, पचनेरे बाबा, बरियार चौरा, कंडहा बाबा, मदना बाबा जैसे सैकड़ों देवी-देवताओं के देवस्थान हैं जिनसे ग्रामीणों की ही नहीं, शहरी लोगों की भी आस्था जुड़ी है। कई ऐसे देवस्थान हैं जिनके बारे में लोगों का मानना है कि यहां आने से विभिन्न गम्भीर बीमारियां ठीक होती हैं। झलोखर गांव के भुवनेश्वरी देवी के टीले पर चढ़ौना के रूप में कोई प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन यहां रविवार को भक्तों की भीड़ जमा होती है। ज्यादातर भक्त गठिया रोग से पीडि़त होते हैं। लोगों का मानना है कि एक नीम के पुराने पेड़ के नीचे विराजमान भुवनेश्वरी देवी स्थान के टीले की मिट्टी लगाने मात्र से गठिया बीमारी जड़ से दूर हो जाती है। देवी का पुजारी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार बिरादरी से ही नियुक्त करने की परम्परा है। पुजारी कालीदीन प्रजापति ने बताया कि गठिया से पीडि़त दूर-दूर के लोग यहां रविवार को आते हैं। इसी गांव के निर्भयदास प्रजापति ने बताया, वर्षो पहले गांव के प्रेमदास प्रजापति को देवी मां ने स्वप्न में कहा था कि उनका स्थान मिट्टी का ही यानी कच्चा रहेगा, ताकि गठिया रोग से पीडि़त लोग अपने बदन में इसे लगा कर चंगा हो सकें। सन् 1875 के गजेटियर में कर्नल टाड ने लिखा है,इस देवी स्थान के पास के तालाब की मिट्टी में गंधक और पारा मौजूद है जो गठिया रोग को ठीक करने में सहायक होता है। बांदा के अतर्रा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय के प्राचार्य डॉ. एस.एन. सिंह का कहना है कि मिट्टी में औषधीय तत्व हैं और नीम में तमाम आसाध्य बीमारियों को ठीक करने की क्षमता होती है, यही वजह है कि इस स्थान की मिट्टी लगाने से गठिया रोगियों को फायदा होता है। अतर्रा डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण दत्त चतुर्वेदी बताते हैं कि संस्कृत साहित्य के हिंदी रूपांतरित ग्रंथ मां भुवनेश्वरी महात्म्य के अनुसार यह स्थान उत्तर वैदिककालीन माना गया है और तालाब सूरज कुंड के नाम से विख्यात था। गत रविवार को इस स्थान पर पहुंचे गठिया रोग से पीडि़त सुल्तानपुर की रामश्री, प्रतापगढ़ की रामप्यारी और शाहजहांपुर की भगवनिया ने बताया कि वे यहां तीसरी-चौथी बार आए हैं, उन्हें काफी आराम मिला है। झलोखर गांव के जागेश्वर ने बताया कि यहां लगातार पांच रविवार तक आकर टीले की मिट्टी लगाने से गठिया बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है।