Tuesday, May 26, 2009

गर लेना हो होम लोन

जमीन की कीमतों में आए ठहराव और तमाम बैंकों द्वारा होम लोन की ब्याज दरों में की जा रही कटौती के चलते यह सही वक्त है, जब आप होम लोन लेकर

अपने घर का सपना साकार कर सकते हैं। क्या तरीका है होम लोन लेने का? कितनी अमाउंट का लोन आपको मिल सकता है? लोन लेने के लिए किन-किन कागजात की जरूरत होगी? एक्सर्पट्स से बात करके होम लोन से जुड़े ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशे हैं प्रभात गौड़ ने-

कितनी तरह के होम लोन

घर खरीदने के लिए लोन : घर खरीदने के लिए लिया जाने वाला लोन। होम लोन का मतलब आमतौर पर इसी लोन से लगाया जाता है।

घर में इंप्रूवमंट के लिए लोन : अगर आप घर को रेनोवेट कराना चाहते हैं या कुछ मरम्मत आदि करानी है, तो यह लोन लिया जा सकता है।

कंस्ट्रक्शन लोन : आपके पास प्लॉट (जमीन) पहले से हो तो उस पर मकान बनाने के लिए लिया जाने वाला लोन।

कन्वर्जन लोन : मान लीजिए आप जिस मकान में रह रहे हैं, उसके लिए आपने होम लोन लिया है। अब आप दूसरा घर खरीदना चाहते हैं, जिसके लिए आपको और पैसे की जरूरत है। कन्वर्जन लोन के माध्यम से पुराना लोन नए घर के लोन पर ट्रांसफर हो जाता है। इसमें जो एक्स्ट्रा पैसे की जरूरत होती है, वह भी शामिल होता है। ऐसा करने से कस्टमर पुराने लोन को चुकाने में दिए जाने वाले प्रीपेमंट चार्ज से बच जाता है।

लैंड परचेज लोन : मकान बनाने या सिर्फ इनवेस्टमंट की नजर से अगर आप जमीन खरीद रहे हैं तो लैंड परचेज लोन ले सकते हैं।

किसे मिल सकता है लोन

लोन की शुरुआत होते वक्त लोन लेने वाले की उम्र कम-से-कम 21 साल होनी चाहिए।

लोन मचुअर होते वक्त उम्र 65 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

लोन लेने वाला या तो सैलरीड हो या सेल्फ एंम्प्लॉयड (अपना कारोबार आदि) हो। अगर कोई प्रॉबेशन पर है तो वह होम लोन का हकदार नहीं है।

कितना मिल सकता है लोन

बैंक आमतौर पर कुल मासिक बचत का करीब 40 गुना लोन देते हैं। सैलरी के रूप में आप महीने में जितनी रकम घर ले जाते हैं, उसमें से घरेलू खर्च में काम आने वाली रकम और किसी दूसरे लोन के लिए चुकाई जा रही ईएमआई की रकम को भी घटा दिया जाता है। इस तरह जो रकम मिलती है, उसका 40 गुना लोन मिलता है। अगर आप बिजनेस में हैं तो आपकी आमदनी नेट प्रॉफिट से मानी जाएगी, न कि कुल टर्नओवर से। वैसे, अलग-अलग बैंकों का अलग-अलग फॉर्म्युला होता है और लोन की रकम प्रॉपर्टी की कीमत पर भी निर्भर करती है। ज्यादातर बैंक प्रॉपर्टी की कीमत का 80 से 85 फीसदी तक लोन दे देते हैं, लेकिन यह सब बैंक पर निर्भर करता है। प्रॉपर्टी की कीमत प्रॉपर्टी की असली कीमत और रजिस्ट्री पर आने वाला खर्च भी शामिल होता है।

लोन लेने का प्रोसेस

1. एप्लिकेशन भरना

जरूरी डॉक्यूमंट्स के साथ ऐप्लिकेशन फॉर्म जमा किया जाता है। जरूरी कागजात ये हैं :

आइडेंटिटी प्रूफ : वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट, फोटो क्रेडिट कार्ड आदि में से कोई एक।

रेजिडेंस प्रूफ : राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, रेंट अग्रीमंट।

इनकम प्रूफ : अगर अपना काम है तो इनकम टैक्स रिटर्न की पिछले तीन साल की कॉपी, अगर नौकरी करते हैं तो फॉर्म 16 और पिछले तीन महीने की सैलरी स्लिप, पिछले छह महीने की बैंक स्टेटमंट।

एम्प्लॉयमंट डीटेल : अगर नौकरी करते हैं और आपकी कंपनी जानी-मानी नहीं है तो कंपनी का लेटर।

प्रोसेसिंग फीस : ऐप्लिकेशन फॉर्म जमा करने के वक्त बैंक कस्टमर से प्रोसेसिंग फीस भी चार्ज करता है। यह अमूमन लोन की कुल रकम का आधे से 1 फीसदी होता है। कुछ बैंक प्रोसेसिंग फीस नहीं भी लेते हैं।

बात पते की : कुछ बैंक प्रोसेसिंग फीस को लेकर फ्लेक्सिबल होते हैं, इसलिए इस पर मोलभाव करके फीस को कम कराया जा सकता है। लोन अप्लाई करते वक्त ज्यादा से ज्यादा प्रूफ पेश करें। इससे आपका केस स्ट्रॉन्ग होता है।

2. पर्सनल वेरिफिकेशन

ऐप्लिकेशन जमा करने के एक या दो दिन बाद बैंक आपके द्वारा दी गई सभी सूचनाओं को वेरिफाइ करता है। कस्टमर की इनकम, अड्रेस, आइडेंटिटी आदि जांचने का काम किया जाता है।

बात पते की : इस प्रॉसेस में बैंक कई बार कॉल करके आपका वेरिफिकेशन कर सकता है। इसलिए इस प्रोसेस को पूरा करने के लिए थोड़ा वक्त निकालकर रखें और बार-बार कॉल आने पर चिढ़ें नहीं।

3. हरी झंडी

आपके द्वारा दी गई जानकारी और उसके वेरिफिकेशन से अगर बैंक संतुष्ट है तो वह आपके लोन को हरी झंडी दिखा देगा, नहीं तो उसे रिजेक्ट कर देगा। वैसे अगर ऐप्लिकेशन रिजेक्ट की जा रही है तो बैंक आमतौर पर बैंक इसकी कोई वजह नहीं बताते। कस्टमर की रीपेमंट कपैसिटी का आकलन करके यह भी तय कर लिया जाता है कि उसे कितना अमाउंट सैंक्शन होगा।

4. ऑफर लेटर

इसके बाद बैंक तमाम सूचनाओं के साथ कस्टमर को ऑफर लेटर देता है, जिसकी एक कॉपी को साइन करके कस्टमर बैंक को लौटाता है।

बात पते की : ऑफर लेटर में दी गई लोन अमाउंट, अवधि और ब्याज दर को चेक कर लें कि क्या वह वही है जो आपके साथ तय की गई थी। ब्याज की दर पर कुछ मोलभाव किया जा सकता है।

5. प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन

इसके बाद बैंक आपकी प्रॉपर्टी की कानूनी वैधता को चेक करता है। अपने लीगल डिपार्टमंट की मदद से बैंक प्रॉपर्टी के सभी ओरिजनल डॉक्यूमंट्स को वेरिफाई करके यह सुनिश्चित करता है कि प्रॉपर्टी हर तरीके से कानूनी है। इसके बाद बैंक अपने एक्सपर्ट्स को साइट पर भेजकर भी प्रॉपर्टी का वेरिफिकेशन कराता है और उसके बाद वैल्यूअर प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन करता है।

बात पते की : यह महत्वपूर्ण पॉइंट है। हर कस्टमर को कराना चाहिए। कई बार बैंक लीगल वेरिफिकेशन के लिए कस्टमर से चार्ज करते हैं। इसके लिए मोलभाव कर सकते हैं। अगर लीगल वेरिफिकेशन के बाद बैंक लोन ओके कर देता है तो कस्टमर को खुश हो जाना चाहिए, क्योंकि इसका मतलब है कि उसके द्वारा ली जा रही प्रॉपर्टी कानूनी रूप से पूरी तरह सेफ है। उसमें कोई धोखा नहीं है।

6. अग्रीमंट साइन

इसके बाद लोन अग्रीमंट साइन हो जाता है और कस्टमर के नाम पर प्रॉपर्टी के ट्रांसफर होने के ओरिजनल कागजात बैंक में जमा हो जाते हैं। इसके बाद बैंक इस बात के सबूत मांगता है कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लोन के अलावा जो रकम आपको देनी है, वह आपने पे कर दी है। बैंक कस्टमर से 36 पोस्ट-डेटेड चेक भी जमा कराता है जिनसे रीपेमंट होता रहे।

बात पते की : ध्यान रखें कि लोन अमाउंट का जो चेक बैंक इश्यू करेगा, वह प्रॉपर्टी बेचने वाले के नाम होगा, कस्टमर के नाम नहीं। ज्यादातर बैंक उसी दिन से ब्याज लेना शुरू कर देते हैं, जिस दिन चेक इश्यू होता है। आपको चेक कब सौंपा गया, इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए जिस दिन चेक इश्यू हो कोशिश करनी चाहिए कि उसी उसे बैंक से ले लिया जाए। प्रॉपर्टी के ऑरिजनल कागजात बैंक में जमा हो जाते हैं, इसलिए इन कागजात की फोटोस्टेट कॉपी अपने पास जरूर रख लें। कई बार बैंक प्रॉपर्टी के कागजात खो देते हैं। ऐसे में बैंक यह कह सकता है कि उसके पास कागज जमा ही नहीं कराए गए। इसलिए जिस वक्त आप प्रॉपर्टी के ऑरिजनल कागजात जमा कराएं तो बैंक से उसका सटिर्फिकेट भी ले लें।

7. बैंक से चेक आना

अगर प्रॉपर्टी रहने के लिए तैयार है तो लोन का भुगतान एक बार में ही हो जाता है। लेकिन अगर मकान बन रहा हो तो लोन अमाउंट का भुगतान कई हिस्सों में होता है। अगर भुगतान कई हिस्सों में होना है तो बैंक पहले हिस्से के भुगतान के बाद तुरंत ईएमआई शुरू नहीं करता। ईएमआई तब शुरू होती है, जब पूरे अमाउंट का भुगतान हो जाता है। ऐसे में बैंक भुगतान की गई रकम पर तब तक साधारण ब्याज चार्ज करता है, जब तक पूरी रकम का डिस्बर्समंट नहीं हो जाता। इसे प्री-ईएमआई कहा जाता है। इसके लिए बैंक आमतौर पर छह पोस्टडेटेड चेक लेते हैं।

बात पते की : प्रीईएमआई समय से अदा करना सुनिश्चित करें, नहीं तो बैंक लेट फीस चार्ज कर सकता है। किस्त की अदायगी बिल्डर को करने के फौरन बाद उससे ली गई रसीद को बैंक में जमा कराएं।

फिक्स्ड रेट या फ्लोटिंग?

फिक्सड रेट: फिक्स्ड रेट पर लोन लेने से कस्टमर को पूरी अवधि के दौरान बराबर ईएमआई देनी होती है। अगर एक्सपर्ट्स आने वाले समय में ब्याज में बढ़ोतरी की संभावना जाहिर कर रहे हैं तो फिक्स्ड रेट पर लोन लेना ठीक है।

फायदे : इस पर बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव और घटती-बढ़ती ब्याज दरों का कोई असर नहीं होता। हमेशा के लिए एक-सी ईएमआई फिक्स हो जाती है। सुरक्षा का भाव रहता है।

नुकसान : यह फ्लोटिंग रेट के मुकाबले 1 से 2.5 फीसदी ज्यादा होती है। अगर कभी ब्याज दरों में गिरावट आ जाए तो भी कस्टमर की ईएमआई में कमी नहीं होती। कई बार फिक्स्ड रेट पूरी अवधि के लिए न होकर सिर्फ कुछ सालों के लिए होता है। कुछ साल बाद इसमें बढ़ोतरी कर दी जाती है। इस पॉइंट को बैंक से साफ कर लें।

फ्लोटिंग रेट: फ्लोटिंग रेट होम लोन एक बेस रेट और फ्लोटिंग एलिमंट का मिक्सचर होते हैं। अगर बेस रेट में अंतर आएगा तो फ्लोटिंग रेट में भी अंतर आ जाएगा। लोन की अवधि के दौरान यह घटता-बढ़ता रहता है।

फायदे : फिक्स्ड रेट के मुकाबले अमूमन 1 से ढाई फीसदी कम होता है यानी पैसे की सेविंग होती है। बढ़ते-बढ़ते कभी-कभी यह फिक्स्ड रेट से ऊपर भी निकल सकता है, लेकिन ऐसा कुछ समय के लिए ही होता है। कुछ समय बाद यह रेट फिर से फिक्स्ड रेट से नीचे आ जाता है।

नुकसान : ईएमआई में बदलाव होता रहता है, जिसके चलते बजटिंग में दिक्कत होती है।

बात पते की : होम लोन लेने वाले तकरीबन 90 फीसदी लोग फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेते हैं, फिर भी बजटिंग सुरक्षा और सरटेनिटी अगर आपकी प्रायॉरिटी हैं तो फिक्स्ड रेट चुन सकते हैं।

कैसे चुनें बैंक
लोन किस बैंक से लेना है, इसका फैसला करते वक्त इन पॉइंट्स को ध्यान में रखें

1. ब्याज की दर कम-से-कम हो।

2. बैंक द्वारा लिया जाने वाला प्रॉसेसिंग चार्ज कम-से-कम हो।

3. अगर समय से पहले लोन की रकम का पूरा भुगतान कर रहे हैं तो बैंक कोई पेनल्टी न वसूलता हो।

4. कोई और छिपे हुए चार्ज न हों।

लोन का रीपेमंट
1. पोस्ट डेटेड चेक : बैंक में 36 पोस्ट-डेटेड चेक जमा करा दिए जाते हैं, जिनसे खुद-ब-खुद ईएमआई की रकम बैंक को मिल जाती है।

2. सीधे एंप्लॉयर से : कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह सुविधा देते हैं। इस व्यवस्था में कंपनी कर्मचारी की सैलरी से ईएमआई की रकम काटकर बैंक को दे देती है और बाकी सैलरी कर्मचारी के अकाउंट में आ जाती है।

3. कैश पेमंट : ईएमआई आप ड्राफ्ट या कैश की मदद से हर महीने भी बैंक में जमा करा सकते हैं। हालांकि, कुछ बैंक ऐसी सुविधा नहीं देते।

4. ईसीएस : ईएमआई अदा करने का कारगर तरीका है। इस व्यवस्था में ईएमआई की रकम हर महीने आपके बैंक अकाउंट से अदा की जाती रहती है।

प्रीपेमंट/प्रीक्लोजर
लोन ली गई रकम का प्रीपेमंट जब चाहे तब किया जा सकता है। आप चाहें तो कुछ रकम वक्त से पहले अदा कर दें और चाहें तो पूरी रकम। कुछ बैंक कहते हैं कि कुछ निश्चित बार ही आप प्रीपेमंट कर सकते हैं। कुछ समय पहले तक प्रीपेमंट करने पर बैंक कुछ फीस चार्ज करते थे, लेकिन अब बढ़ते कॉम्पिटीशन के चलते कुछ बैंकों ने यह फीस चार्ज करना बंद कर दिया है। आमतौर पर यह फीस आउटस्टैंडिंग रकम का 2 फीसदी होती है।

जब लोन का पूरा पेमंट हो जाए (चाहे प्रीपेमंट के जरिये या फिर वक्त पर) तो बैंक से अपनी प्रॉपर्टी के ऑरिजनल पेपर्स ले लें। साथ ही बैंक से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी लें। कई बार बैंक एक सर्टिफिकेट भी जारी कर देते हैं कि प्रॉपर्टी अब मॉर्गिज में नहीं है। अगर आपका लोन सैंक्शन होते वक्त गारंटर्स भी थे तो बैंक उनके लिए अलग से सर्टिफिकेट इश्यू करेगा कि अब उनकी जिम्मेदारी खत्म हुई।

होम लोन का टैक्स बेनिफिट
होम लोन को लौटाने में जो ईएमआई दी जाती है, उसका कुछ हिस्सा प्रिंसिपल अमाउंट होता है और कुछ हिस्सा ब्याज। जो रकम ब्याज के रूप में अदा की जाती है उस पर इनकम टैक्स के सेक्शन 24 बी के तहत टैक्स में राहत मिलती है। इसकी सीमा डेढ़ लाख रुपये है। जो रकम प्रिंसिपल अमाउंट के तौर पर अदा की जाती है, उस पर 80सी के तहत छूट मिलती है। इसे एक लाख रुपये की सीमा के अंदर काउंट किया जाता है। इसके लिए बैंक द्वारा जारी किया गया सर्टिफिकेट पेश करना होता है, जिसमें बताया जाता है कि आपने पूरे साल के दौरान कितनी रकम प्रिंसिपल के तौर पर अदा की और कितनी ब्याज के तौर पर।

होम लोन का इंश्योरंस
अक्सर लोग इस डर के चलते होम लोन नहीं लेते कि अगर कोई अनहोनी हो गई तो लोन की रकम कौन चुकाएगा। इसके लिए इंश्योरंस कंपनियां कस्टमर द्वारा लिए गए होम लोन का इंश्योरंस ऑफर करती हैं। होम लोन का इंश्योरंस कराने के बाद अगर कस्टमर की असमय मौत हो जाती है तो बची हुई रकम का भुगतान इंश्योरंस कंपनी करती है। इंश्योरंस के प्रीमियम के तौर पर दी जा रही रकम पर इनकम टैक्स में छूट भी मिलती है। कंपनियां कई तरह के ऑप्शंस देती हैं, फिर भी आमतौर पर दो तरह के प्लान हैं।

सिर्फ इंश्योरेंस प्लान : इसमें लोन रीपेमंट की अवधि के दौरान मौत हो जाने पर रीपेमंट की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। लेकिन, अगर एक बार आपका रीपेमंट पूरा हो गया तो इंश्योरंस खत्म हो जाता है और कस्टमर को कंपनी की तरफ से सिर्फ सम अश्योर्ड ही मिलता है। बोनस आदि कुछ नहीं मिलता। इस तरह की स्कीमों में प्रीमियम की रकम कम होती है।

इंश्योरंस के साथ इनवेस्टमंट प्लान : इसमें होम लोन के रिस्क कवर के साथ इनवेस्टमंट संबंधी फायदे भी मिलते हैं। रीपेमंट पूरा हो जाने के बाद कस्टमर को सम अश्योर्ड के साथ उस वक्त तक बोनस भी मिलता है। इस तरह की पॉलिसीज में प्रीमियम की रकम थोड़ी ज्यादा होती है।

बात पते की : कई बैंक होम लोन देते वक्त होम लोन के इंश्योरंस की व्यवस्था भी साथ ही कर देते हैं यानी आपकी ईएमआई में होम लोन के इंश्योरंस के प्रीमियम की रकम भी जोड़ ली जाती है। कुछ बैंकों के इंश्योरंस कंपनियों से टाईअप होते हैं। ऐसे में बैंक से होम लोन लेते वक्त ही होम लोन के इंश्योरंस की बात भी कर लेनी चाहिए। अगर आपका लाइफ इंश्योरंस है, फिर भी लोन का इंश्योरंस कराना चाहिए।

5 कॉमन मिस्टेक्स
टॉप-अप लोन लेना: टॉप-अप लोन होम लोन के साथ दिया जाने वाला एडिशनल लोन होता है, जिसका मकसद मकान के इंटीरियर डेकोरेशन और इसी तरह के दूसरे खर्चों को पूरा करना होता है। कुछ बैंक होम लोन के साथ टॉप-अप लोन का भी ऑफर देते हैं। लोग आमतौर पर इन लोन को ले लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि टॉप-अप लोन को पर्सनल लोन के तौर पर ट्रीट किया जाता है, जिसकी ब्याज की दर होम लोन की दर से कहीं ज्यादा होती है।

नेगेटिव अमॉर्टाइजेशन: नेगेटिव अमॉर्टाइजेशन की स्थिति तब आती है जब किसी खास अवधि में बैंक लोन की किस्त कम कर देते हैं। इस तरह की सुविधा वाला लोन यंग प्रफेशनल्स के लिए ऑफर किया जाता है। इसमें शुरुआती बरसों में सिर्फ ब्याज की रकम वसूलकर ईएमआई को कम दिखा दिया जाता है। दो साल बाद आपको पता चलता है कि प्रिंसिपल के रूप में आपने कुछ भी अदा नहीं किया है और इस तरह आपके द्वारा वापस की जाने वाली राशि लगभग ज्यों की त्यों बनी रहती है।

प्रॉपर्टी किसी के नाम, लोन किसी के नाम
अक्सर लोग किसी और के नाम पर मौजूद प्रॉपर्टी पर लोन लेने की गलती कर देते हैं। इसे इस उदाहरण से देखिए। मिस्टर शर्मा की मां के नाम कुछ जमीन थी। उन्होंने उस जमीन पर घर बनाने के लिए होम लोन अपने नाम पर ले लिया। ऐसी गलती न करें। अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो आपको होम लोन पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा।

कल के बल पर लोन
कई बार यंग प्रफेशनल्स इस उम्मीद में कूवत से ज्यादा लोन ले लेते हैं कि आने वाले वक्त में उनकी आमदनी बढ़ जाएगी, लेकिन आजकल के माहौल में इस बात की कोई गारंटी नहीं कि आने वाले साल में आपकी आमदनी बढ़ ही जाएगी। ऐसे में कल आमदनी बढ़ जाने के भरोसे लिए गए लोन की रीपेमंट करना मुश्किल काम हो सकता है।

बैंक चुनने में जल्दबाजी
कई बार प्रॉपर्टी का चुनाव करने से पहले ही लोग लोन लेने के लिए बैंक से बात करना शुरू कर देते हैं। पहले प्रॉपर्टी फाइनल करें, फिर बैंक से लोन की सैंक्शन लें। कई बैंक रहने के लिए तैयार मकान पर ही लोन देते हैं। इसके अलावा, याद रखें कि बैंकों की सभी टर्म नेगोशिएबल होती हैं। बैंक का फैसला कई बैंकों से जानकारी लेने के बाद ही करें, तो अच्छा है।

बड़ा धोखा है क्रेडिट कार्ड में...

आज के दौर में क्रेडिट कार्ड फैशन स्टेटमेंट की बजाए एक जरूरत बन गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने

वाले लोग अक्सर तमाम शिकायतें करते नजर आते हैं। थोड़ी-सी लापरवाही और कुछ नासमझी के चलते लोग अक्सर धोखा उठा बैठते हैं। क्या हैं क्रेडिट कार्ड से जुड़े सामान्य घपले? कार्ड यूज करते वक्त एक आम कस्टमर को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है? आमतौर पर लोग क्या गलतियां करते हैं? इसी के बारे में जानते हैं

क्रेडिट कार्ड से संबंधित शिकायतें करने के लिए लोगों को आमतौर पर लोगों के कस्टमर केयर का ही नंबर पता होता है, लेकिन अगर वहां सुनवाई न हो तो आगे भी शिकायत की जा सकती है। शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया पर आरबीआई, नई दिल्ली के रीजनल डायरेक्टर आर. गांधी से बातचीत की

क्रेडिट कार्ड से संबंधित शिकायतों की सुनवाई अगर संबंधित बैंक न करे तो क्या करें?

ऐसे में बैंकिंग ओम्बड्समन के ऑफिस में शिकायत की जा सकती है। हर राज्य की रिजर्व बैंक अव इंडिया (आरबीआई) की ब्रांच में यह कार्यालय होता है। कई छोटे राज्यों में दो राज्यों की मिलाकर एक ही ब्रांच होती है। जैसे दिल्ली में दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की साझी ब्रांच आरबीआई में है। बैंकिंग ओम्बड्समन में शिकायत तभी दर्ज होगी, जब बैंक आपकी शिकायत पर एक महीने तक कोई कार्रवाई नहीं करता। बैंकिंग ओम्बड्मन में शिकायत या तो लिखित करें या फिर ई मेल करें। साथ ही अपने बैंक को की गई शिकायत की रिसीविंग भी जरूर लगाएं। बैंकिंग ओम्बड्समन की शिकायत ऑनलाइन भी की जा सकती है।

पता : बैंकिंग ओम्बड्समैन, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बिल्डिंग, दूसरी मंजिल, ६ संसद मार्ग, नई दिल्ली

फोन : 011-23725219

ईमेल: bonewdelhi@rbi.org.in

वेबसाइट: www.bankingombudsman.rbi.org.in

ओम्बड्समन के पास शिकायत करने के कितने दिन बाद कार्रवाई पूरी हो जाती है?

वैसे तो ओम्बड्समन के पास की गई शिकायत पर कार्रवाई की कोई टाइम लिमिट नहीं है। फिर भी आमतौर पर तीन महीने के अंदर मामलों का निपटारा हो जाता है।

बिल की ड्यू डेट से कितने दिन पहले कस्टमर को बिल मिल जाना चाहिए? क्या इस बारे में आरबीआई ने कोई नियम बनाए हैं?

आरबीआई ने ऐसे नियम तो नहीं बनाए हैं पर हर बैंक को अपने कस्टमर को इस बारे में पहले ही बता देना चाहिए। यह निर्देश आरबीआई ने सभी बैंकों को पहले से ही दे रखा है कि अपने कस्टमर्स को इस बारे में आगाह कर दे। जो बैंक ऐसा नहीं कर रहे, उनके बारे में आरबीआई के डिपार्टमंट ऑफ बैंकिंग सुपरविजन में शिकायत की जा सकती है।

लेट फीस और उस पर लगने वाले ब्याज के लिए क्या कोई सीलिंग है?

नहीं, सीलिंग का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इस बारे में अभी तक बैंकों पर ही छोड़ा गया है कि वे कितना सर्विस चार्ज या ब्याज लें। लेकिन उन्हें निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे इस बारे में शुरू में ही कस्टमर को अपनी शर्ते बता दें और पूरी पारदर्शिता से काम करें। नैशनल कंज्यूमर फोरम ने भी इस बारे में कुछ निर्देश दिए है लेकिन उन पर बैंकों द्वारा केस लड़ा जा रहा है।


इन दिनों क्रेडिट कार्ड रखना लग्जरी या फैशन से कहीं ज्यादा जरूरत बन गया है। यह सुविधाजनक और फायदेमंद दोनों है। लेकिन अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड को लेकर तमाम दिक्कतों का सामना भी कर रहे होते हैं।

क्रेडिट कार्ड कैसे-कैसे

कंपनियां आमतौर पर तीन तरह के कार्ड मुहैया कराती हैं - वीजा, मास्टर और एमैक्स। इन तीन कटिगरी में भी गोल्ड, सिल्वर और क्लासिक/इग्जेक्युटिव तीन सब-कटिगरी होती हैं। इन तीनों में मिलनेवाली सुविधाएं अलग-अलग होती हैं।

आमतौर पर गोल्ड कार्ड में सबसे ज्यादा इन्शुअरन्स कवर, बैगेज कवर, डिस्काउंट, रिवॉर्ड पॉइंट और दूसरी सुविधाएं दी जाती हैं। इस पर ब्याज भी सबसे कम वसूला जाता है, लेकिन इसकी फीस व सर्विस चार्ज सबसे ज्यादा होते हैं। कार्ड जारी करने के लिए यों तो कोई खास नियम नहीं हैं लेकिन साधारण कार्ड आमतौर पर उन लोगों के जारी किए जाते हैं, जिनकी सालाना कमाई कम-से-कम 70 हजार रुपये हो, जबकि गोल्ड कार्ड के लिए सालाना कमाई 1.80 लाख रुपये होनी चाहिए।

क्या हैं फायदे

हमेशा अपने साथ कैश लेकर चलना सुविधाजनक नहीं है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड सहूलियत भरी शॉपिंग कराता है। क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने कस्टमर्स को एक निश्चित अवधि के लिए फ्री क्रेडिट पीरिअड की सुविधा देती हैं। यह अवधि स्टेटमंट डेट से लेकर पेमंट डेट तक की होती है। आमतौर पर यह 20 दिन का वक्त होता है। इस अवधि में कोई ब्याज नहीं लगता।

आप क्रेडिट लिमिट के अंदर चेक जारी कर सकते हैं और फोन पर ही ड्राफ्ट का ऑर्डर भी दे सकते हैं। ग्लोबल कार्ड के जरिए आप दूसरे देश में खरीदारी कर रुपये में भुगतान कर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड कंपनियां दुकानों, होटेलों और एयर टिकिट आदि पर डिस्काउंट ऑफर करती हैं।

पर्सनल एक्सिडंट कवर और बैगेज कवर आदि की सुविधा भी दी जाती है। बैगेज कवर ज्यादातर गोल्ड व इंटरनैशनल क्रेडिट कार्ड पर ही दिया जाता है।कई कंपनियां परचेज प्रॉटेक्शन भी देती हैं। ऐसे में कार्ड से खरीदी गई चीजों के खोने, चोरी होने या आग आदि से नष्ट हो जाने पर आपको उसका बिल नहीं भरना पड़ेगा।

क्रेडिट शील्ड होना भी फायदेमंद है। अगर कार्ड होल्डर की मौत हो जाए और उसके कार्ड पर यह सुविधा है तो उत्तराधिकारी को बिल में कुछ छूट मिल जाती है। कार्ड कंपनियां शॉपिंग पर रिवॉर्ड पॉइंट्स भी देती हैं।

क्या हैं नुकसान

क्रेडिट कार्ड कई बार फिजूल की शॉपिंग की वजह बनता है। खासकर ऐसे लोग कार्ड की बदौलत ज्यादा शॉपिंग कर लेते हैं, जिन्हें शॉपिंग की लत होती है। फ्री क्रेडिट पीरिअड के बाद लगने वाला ब्याज काफी ज्यादा होता है। कार्ड इश्यू करने के लिए कंपनियां आमतौर पर फीस लेती हैं, जो सालाना 400 रुपए से लेकर दो हजार रुपए तक हो सकती है। कार्ड बनवाने के लिए भी कई मामलों में सौ से लेकर एक हजार रुपये तक फीस होती है।

कई बार क्रेडिट कार्ड चोरी हो जाता है या खो जाता है। ऐसे में उसके मिसयूज का डर होता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले कस्टमर केयर को फोन करें और अपना कार्ड तुरंत बंद करा दें। इसके लिए एफआईआर या किसी और डॉक्युमंट की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर चोरी के बाद कार्ड से शॉपिंग की गई है या कोई और फ्रॉड किया गया है तो बैंक एफआईआर की कॉपी मांगता है। कार्ड खो जाने या चोरी हो जाने की सूचना देने के बाद लायबिलिटी फीस की एक अधिकतम सीमा निर्धारित है। ज्यादातर बैंकों के मामले में यह सीमा एक हजार रुपये है। लेकिन कार्ड खोने की रिपॉर्ट करने से पहले इसकी कोई सीमा नहीं है। यानी रिपॉर्ट किए जाने के वक्त तक चुराए गए या खोए हुए कार्ड से जो भी शॉपिंग की जाएगी, उसका भुगतान कार्ड होल्डर को करना होगा।

कार्ड कंपनियां आमतौर पर उस लायबिलिटी का जिक्र करती हैं, जो रिपॉर्ट करने के बाद होती है। रिपोर्ट करने से पहले की असीमित फीस को छिपा लिया जाता है।

आम समस्याएं और समाधान .
फॉर्म रिजेक्शन: कई बार कार्ड कंपनी कस्टमर के ऐप्लिकेशन फॉर्म को रिजेक्ट कर देती हैं। ऐसे में कंपनी कस्टमर को लेटर भेजकर सूचित करती है कि उसकी ऐप्लिकेशन कैंसल कर दी गई है। कई बार कंपनियां ये जानकारी नहीं देतीं। फिर कस्टमर द्वारा जमा कराए गए सेल्फ अटैस्टेड डॉक्युमेंट्स के मिसयूज का भी खतरा होता है। ऐप्लिकेशन रिजेक्ट होने पर कंपनी से अपने डॉक्यूमेंट वापस करने को कहें।

अनसॉलिसिटेड कार्ड: कई बार बिना अप्लाई किए ही क्रेडिट कार्ड बनकर आ जाता है। ऐसी हालत में कस्टमर को बैंक में शिकायत दर्ज करानी होगी कि उसकी सहमति बिना ही उसका क्रेडिट कार्ड बना दिया गया। अगर दो से तीन हफ्ते में बैंक का रिस्पॉन्स नहीं आता है तो बैंकिंग ओम्बड्समन को अप्रोच किया जा सकता है। बैंकिंग ओम्बड्समैन की साइट है www.bankingombudsman.rbi.org.in

बिल में देरी: कस्टमर्स को बिल अक्सर जमा होने की ड्यू डेट के बाद बिल मिलता है। ऐसे में कंपनियां लेट फीस चार्ज कर लेती हैं। नियमों के मुताबिक कार्ड यूजर को बिल जमा कराने की अंतिम तारीख से 15 दिन पहले मिल जाना चाहिए। अगर बिल में कुछ गड़बड़ है या बिल ज्यादा आया है तो कस्टमर बैंक से उस ज्यादा बिल का डॉक्युमेंटरी प्रूफ मांग सकता है।

कार्ड कैंसिलेशन: अगर कार्ड बंद कराना हो तो सबसे पहले कस्टमर को पूरा पेमंट करना चाहिए। उसके बाद कार्ड को चार हिस्सों में काटकर एक लिफाफे में बंद कर एटीएम में मौजूद बॉक्स में डाल दिया जाता है। लेकिन कई बार कार्ड कैंसल कराने की गुजारिश के बावजूद कार्ड के चालू रहने और फीस आने की शिकायतें आती रहती हैं। ऐसे में तुरंत बैंक से संपर्क करें और कार्ड बंद करवाएं।

लेट फीस: ड्रॉप बॉक्स में अंतिम तारीख को या उससे पहले चेक डाल देने पर भी कंपनियां लेट फीस लगा देती हैं, जबकि अगर कस्टमर ने ड्यू डेट से पहले चेक ड्रॉप बॉक्स में डाल दिया है तो उस पर लेट फीस नहीं लगाई जानी चाहिए। अगर ऐसा हो रहा है तो अपनी कंपनी से इस बारे में बात करें और लेट फीस को बिल में एडजस्ट कराएं।

ज्यादा बिल: कई बार कस्टमर्स के पास ज्यादा बिल भेज दिया जाता है। ज्यादा बिल आने पर कस्टमर केयर में कॉल करें और बिल के बारे में स्थिति साफ करें। इसके अलावा एक और बात ध्यान रखें। अगर आप अपना पेमंट कैश कर रहे हैं तो कई कार्ड कंपनियां फाइन लगा देती हैं, इसलिए इस बारे में पता कर लें और कोशिश करें कि पेमेंट चेक के माध्यम से ही किया जाए।

इग्जेक्युटिव सुविधा: कार्ड कंपनियों की तरफ से कई बार कस्टमर के पास फोन आता है कि क्या वे उनके बिल की पेमंट के लिए अपना इग्जेक्युटिव भेज दें। कस्टमर को यह सुविधाजनक लगता है और ज्यादातर लोग इसके लिए हामी भर देते हैं। कस्टमर के हां करते ही इग्जेक्युटिव पेमेंट लेने आ जाता है, लेकिन याद रहे इस सुविधा के लिए कई कंपनियां पैसे चार्ज कर लेती हैं।

इन्शुअरन्स प्रीमियम: कुछ प्रीमियम क्रेडिट कार्ड पर कई तरह का कवर भी होता है। अगर कंपनी कस्टमर को बताकर यह सुविधा दे रही है, तब तो ठीक है, लेकिन कई कंपनियां बिना बताए ही कस्टमर को इन्शुअरन्स कवर दे देती हैं और बिना कस्टमर को बताए प्रीमियम की रकम काटी जाती रहती है। कंपनियां इस बात की भी परवाह नहीं करती कि जिस कस्टमर को वह इन्शुअरन्स कवर दे रही हैं, उसने किसी को नॉमिनेट भी किया है कि नहीं।

कैसे करें शिकायत

क्रेडिट कार्ड से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें कस्टमरों को झेलनी पड़ती हैं। कोई भी समस्या होने पर कार्ड यूजर को तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। अगर शिकायत कॉल सेंटर में कराई जा रही है तो शिकायत दर्ज कराते वक्त शिकायत नंबर, डेट और उस व्यक्ति का नाम जरूर पता कर लें, जिसे आपने शिकायत लिखाई है। कई बार कस्टमर केयर पर शिकायत की सुनवाई न होने की शिकायतें आती हैं। ऐसे में सीनियर अधिकारी से बात करने को कहा जा सकता है। इग्जेक्युटिव उसी नंबर से आपकी कॉल आगे बढ़ा देते हैं। ऐसा न होने पर कंपनी की साइट्स पर दिए गए ईमेल व नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। अगर खुद बैंक में जाकर शिकायत लिखा रहे हैं तो शिकायत की रिसीविंग जरूर ले लें। आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक हर बैंक की एक शिकायत निवारण सेल होती है। शिकायतकर्ता अपने बैंक के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर से भी कॉन्टैक्ट कर सकता है। आरबीआई के मुताबिक इस अफसर का नाम बिल पर लिखा होना चाहिए। बैंक या कॉल सेंटर में दर्ज कराई गई शिकायत पर 30 दिन के अंदर कार्रवाई हो जानी चाहिए। अगर 30 दिन के अंदर बैंक की तरफ से कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया जाता, तो कस्टमर संबंधित ओम्बड्समन से कॉन्टैक्ट कर सकता है। यहां वह मानसिक पीड़ा, पैसे के नुकसान और हरजाने का दावा कर सकता है।

वायग्रा की तरह असर करता है तरबूज

अब तक सेक्स ड्राइव बढ़ाने के लिए लोग न जाने कौन-कौन से नुस्खे आजमाते थे और तरह-तरह की दवाइयों का उपयोग करते थे। लेकिन हाल म

ें हुई एक रिसर्च से पता चला है कि गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए खाए जाने वाला तरबूज सेक्स ड्राइव बढ़ाने के मामले में किसी वायग्रा से कम नहीं।

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक रिसर्च में कहा है कि तरबूज का असर वायग्रा की तरह होता है। तरबूज में वह सभी गुण मौजूद हैं जो सेक्स ड्राइव बढ़ाने के लिए शरीर पर असर डालते हैं।

भारतीय मूल के वैज्ञानिक के नेतृत्व में अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने यह रिसर्च किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी में वाटरमेलन, हिंदी में तरबूज, बंगाली में तॉरमूज, मराठी में कलंदर, गुजराती में इंद्रक, और कन्नड़ में करबूजा कहे जाने वाले इस साधारण से फल में वह सभी तत्व मौजूद हैं जो शरीर के ब्लड वेसल्स पर वायग्रा जैसा असर डालते हैं और सेक्स ड्राइव को बढ़ाते हैं।

टेक्सस एएंडएम के फ्रूट और वेजिटेबल इम्प्रूवमंट सेंटर के डायरेक्ट डॉ. भीमनगौडा (भीमू) पाटिल ने कहा- जैसे जैसे हमने तरबूज के बारे में अध्ययन किया हमें पता चला कि यह कोई साधारण फल नहीं। इसमें शरीर के लिए प्रभावकारी प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं। अब तक तरबूज के बारे में हम सिर्फ यही जानते थे कि यह तरबूज सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें 92 प्रतिशत पानी मौजूद होता है और 0 पर्सेंट कैलरी होती है। लेकिन इसके अलावा भी तरबूज से होने वाले फायदों की लिस्ट काफी लंबी है।

उन्होंने बताया कि तरबूज से होने वाला एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि व्यक्ति की सेक्स ड्राइव को बढ़ाता है। बहुत से फलों और सब्जियों में पौषक तत्व मौजूद होते हैं। इन्हें मेडिकल भाषा में पाइथो-न्युट्रिअंट्स कहते हैं, जिनमें ऐसी बायोऐक्टिव क्षमता होती है जो शरीर के साथ आसानी से प्रतिक्रिया करने में सक्षम होते हैं और मानव शरीर पर स्वस्थवर्धक प्रभाव डालते हैं।

Sunday, May 24, 2009

वाइल्ड सेक्स से बढ़ जाते हैं प्रेग्नंसी के चांस

प्रेग्नंसी के लिए कपल्स क्या-क्या नहीं करते। डॉक्टरों के चक्कर काटने से लेकर वूडू तक सब किया जाता है। लेकिन साइंटिस्ट कहते है
ं कि एक आसान तरीका भी है। वाइल्ड सेक्स कीजिए। यानी इतने जोश और जुनून से कि सारी सीमाएं टूट जाएं।

साइंटिस्ट कहते हैं कि लव मेकिंग यानी सेक्स की क्वॉलिटी जितनी अच्छी होगी , महिलाओं के कन्सीव करने के चांस उतने ही ज्यादा होंगे। शेफील्ड यूनिवर्सिटी के सीनियर लेक्चरर ऐलन पासी के मुताबिक ऐसा सेक्स , जिसमें दोनों पार्टनर एक-दूसरे को संतुष्ट करने की पूरी कोशिश करते हैं , प्रेग्नंसी के चांस को बढ़ा देता है। वह कहते हैं कि जो कपल बच्चे के लिए कोशिश कर रहे होते हैं , वे अक्सर सेक्स को एक काम की तरह करते हैं।

पासी के मुताबिक ऐसे कपल्स ने बताया है कि उनका सेक्स बहुत मशीनी और रूटीन काम जैसा होता है। यह गलत है।

ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसायटी के सेक्रटरी पासी कहते हैं कि सेक्स वैसा ही वाइल्ड और थ्रिलिंग होना चाहिए , जैसा आप पहली बार मिलने पर कर रहे थे और बच्चे के बारे में नहीं सोच रहे थे। आमतौर पर इंटरकोर्स के दौरान 25 करोड़ स्पर्म्स पैदा होते हैं। लेकिन एक रिसर्च के मुताबिक जब पुरुष सेक्स में पूरी तरह संतुष्ट होता है , तो स्पर्म्स की संख्या 50 फीसदी तक बढ़ जाती है।

पासी बताते हैं कि अगर आप सेक्स को रूटीन से पांच मिनट ज्यादा लंबा खींचते हैं , तो स्पर्म्स की संख्या ढाई करोड़ तक बढ़ सकती है।

पार्टनर सेक्स से जी चुराए तो...

सेक्स के मामले में अगर आप अपनी पार्टनर के बदलते मूड से कंफ्यूज हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके पीछे क

ई कारण हो सकते हैं। जानते हैं, क्या हैं वे :

पुरुषों का मानना है कि महिलाएं बेहद राजदार होती हैं। उनकी सेक्स ड्राइव को लेकर भी वे कुछ ऐसा ही सोचते हैं। कई बार वे उन्हें सिडक्टिव लगती हैं, तो ऐसे मौके भी आते हैं जब वे क्लोज आने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं। दरअसल, इसके पीछे कई कारण होते हैं और अपनी परेशानी दूर करने के लिए आपको उन कारणों को दूर करना ही होगा।

मूड न होना
हायपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसऑर्डर के केसेज महिलाओं में बहुत ज्यादा देखने में आते हैं। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में 18 से 59 साल की महिलाओं पर की गई एक स्टडी से साबित हुई। इस डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्ति को सेक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती। इस डिसऑर्डर की प्राइमरी स्टेज में महिला को सेक्स की इच्छा ही नहीं होती, जबकि सेकंडरी स्टेज में उसकी पहली वाली दिलचस्पी खत्म हो जाती है। कंडिशन के बिगड़ने पर वह सेक्स से दूर भागने लगती है। इस डिसऑर्डर की वजहें कम्यूनिकेशन प्रॉब्लम, लड़ाई, प्यार का न मिलना, अकेलापन वगैरह हो सकती हैं।

क्या करें
उससे प्यार जताएं, लेकिन जबर्दस्ती न करें। उससे बातें करें और अपने साथ सहज होने का मौका दें।

थकान होना
महिला चाहे गृहिणी हो या प्रफेशनल, तमाम परेशानियां उनके लिए एंजॉय करने का स्कोप कम ही छोड़ती हैं। फिर रिसर्च से भी यह बात साबित हो चुकी है कि तनाव में रहने वाली महिलाओं को सेक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती। इसके अलावा, सेक्स को लेकर नर्वस होना, प्रेग्नेंसी का डर, दर्द वगैरह की वजह से भी वे सेक्स से दूर रहती हैं।

क्या करें
उनके साथ प्यार से पेश आएं और उनके लिए कुछ स्पेशल करें। फोर प्ले पर ध्यान दें। सेंसुअल मसाज या हॉट वॉटर बाथ जादू की तरह काम करेंगे।

कमी का अहसास
उसे लाइट में कपड़े उतारने में दिक्कत होती है और सेक्स के तुरंत बाद कपड़े पहनने की जल्दी। ऐसा तभी हो सकता है, जब वह अपनी बॉडी को लेकर सहज न हों। अचानक वजन का बढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स, दाग या पार्टनर के कॉमेंट्स उनमें हीन भावना जगा सकते हैं।

क्या करें
उनके साथ जिम में टाइम बिताएं। उन्हें ताई ची क्लास जॉइन करने के लिए प्रोत्साहित करें। वर्कआउट करने से उनकी बॉडी टोन होगी और सेक्स ड्राइव भी बढ़ेगी। उन्हें किसी हीरोइन या मॉडल की तरह बनने को न कहें। उन्हें बताएं कि साइज जीरो न होने के बावजूद वह आपको खूबसूरत लगती हैं।

डाइट का रोल
सेक्स ड्राइव बढ़ाने में खाने का भी अहम रोल है। 25 साल की एक लड़की ने शादी से पहले वजन घटाने के लिए खूब डाइटिंग की। शादी तक वह स्लिम तो हो गई, लेकिन शादी के बाद सेक्स में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। कुछ फूड आइटम्स स्टैमिना बढ़ाकर, बॉडी टोन करके और त्वचा को ग्लो देकर सेक्स ड्राइव बढ़ाते हैं। जबकि जंक फूड, कैफीन, हैवी खाना वगैरह इस चीज को कम करते हैं।

क्या करें
ध्यान रखें कि आपकी पार्टनर चॉकलेट, ओटमील, वॉलनट जैसी चीजें खूब खाएं। दरअसल, ये मूड लिफ्टर्स होती हैं। साथ ही, आलू के चिप्स की जगह उन्हें सलाद दें और कोला की जगह पानी।

दवाइयों पर दें ध्यान
घबराहट, तनाव, डिप्रेशन को दूर करने के लिए ली जाने वाली दवाइयां भी महिलाओं की सेक्स में दिलचस्पी कम करती हैं। बर्थ कंट्रोल पिल्स महिलाओं की ऑव्यूलेशन साइकल में बदलाव लाती है और इस वजह से भी फिजिकल इंटीमेसी में उनकी इच्छा पर असर डालती है।

क्या करें
अगर किसी खास दवाई के लेने से आपकी पार्टनर की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो रही है, तो इस मामले में डॉक्टर की सलाह लें।

कुछ दोष कल्चर का भी
हमारी सोसाइटी में सेक्स को लेकर लड़कियों को कभी खुलने नहीं दिया जाता। ऐसे में उनके मन में सेक्स को लेकर तमाम सवाल व दुविधाएं रहती हैं, जिससे कई बार शादी के लंबे अर्से बाद तक वे अपने हसबैंड के साथ सहज नहीं हो पातीं।

क्या करें
पार्टनर को काउंसलिंग दिलवाएं। मैरिज काउंसलिंग, कपल स्टिमुलेशन, सेल्फ हेल्प गाइड्स वगैरह आपकी मदद कर सकते हैं। फोर प्ले पर ध्यान दें।

200 दोस्तों के साथ हुई हमबिस्तर

पसंद है पॉर्न
केट हडसन ने स्वीकार किया है कि उन्हें हार्डकोर पॉर्न देखना काफी अच्छा लगता है। गौरतलब है कि केट का उन
केट हडसन को पसंद है हार्डकोर पॉर्न।
के पति रॉकर क्रिस रॉबिनसन से तलाक हो चुका है। एक अखबार से हुई बातचीत में अपने खास अंदाज में केट ने कहा है कि अब वह अपनी रातें अक्सर ही एक्स रेटेड फिल्मों के साथ बिताती हैं।

सेक्स के लिए दोस्ती
ब्रिटेन में एक महिला 200 ऑनलाइन दोस्तों के साथ हमबिस्तर हो चुकी है। लुईस ग्रांट अंजान लोगों से दोस्ती करने और सेक्स संबंध बनाने के लिए वेब सर्फिन्ग करती है। 25 वर्षीय इस महिला ने 200 ऑनलाइन दोस्तों से शारीरिक संबंध बनाए हैं।


गिफ्ट में मिले डैडी
अमेरिका के गैबरिएल को छठे जन्मदिन का ऐसा तोहफा मिला कि उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दरअसल उसके जन्मदिन पर उसकी मां ने एक बड़ा सा तोहफा दिया। जब तोहफे का रैपर खोला गया तो उसमें से गैबरिएल के पिता बाहर आए जो इराक में तैनात हैं।

Friday, May 22, 2009

एनर्जी सेविंग बल्ब घोल रहे हैं जिंदगी में जहर

लंदन ।। पृथ्वी के वायुमंडल पर से कार्बन डाई ऑक्साइड के बोझ को कम करने के लिए ब्रिटेन में तो 2012 तक एनर्जी सेविंग बल्बों का इस्तेमाल

जरूरी होगा पर चीन को इसके लिए अभी से बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। इन बल्बों को जिन फैक्ट्रियों में तैयार किया जा रहा है, वहां मर्करी का इस्तेमाल होता है। इस कारण हजारों वर्कर जहर की चपेट में आ चुके हैं। असल में एनर्जी सेविंग बल्ब माने जाने वाले फ्लूरोसेंट लाइट बल्ब में मर्करी का इस्तेमाल होता है।

यूरोपीय यूनियन के निर्देश के मुताबिक, तीन साल के भीतर इन बल्बों का इस्तेमाल जरूरी कर दिया जाएगा। इसलिए विदेश में बल्ब की डिमांड बढ़ने के कारण मर्करी की खदानें भी दोबारा खोल दी गई हैं जबकि यह भी कड़वा सच है कि इन्हीं खदानों के कारण चीन के कई दूरस्थ और खूबसूरत हिस्सों का एनवायरनमेंट बर्बाद हो चुका है।

पब्लिक हेल्थ को खतरा जान चीन के कई डॉक्टर, रेगुलेटर इकाइयां, वकील और अदालतें भी अब इसे लेकर अलर्ट हो गए हैं। यह अजीब विसंगति ही है कि जिस चीज को पृथ्वी का संरक्षक बताकर प्रमोट किया जा रहा है, वह मर्करी जैसे जहरीले पदार्थ से बनती है।

इन बल्बों को बनाते समय मजदूरों को मर्करी ठोस या दृव्य रूप में हाथ में लेना होता है। इसके बाद इसकी थोड़ी सी मात्रा हर बल्ब में डालनी होती है ताकि यह केमिकल रिऐक्शन के जरिए रोशनी पैदा कर सके। गौरतलब है कि मर्करी को दुनियाभर में स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा माना जाता है। अगर यह शरीर में चला जाता है तो इससे नर्वस सिस्टम, लंग्स और किडनी डैमेज होने का खतरा रहता है। इतना ही नहीं इससे गर्भ में पल रहे भ्रूण या नवजात बच्चे को भी खतरा रहता है।

चीन में जिन फैक्ट्रियों में ये बल्ब बनाए जा रहे हैं, वहां के कर्मचारियों के शरीर में मर्करी की मौजूदगी खतरनाक स्तर पर देखी गई है। फोशान और गुआंगझाऊ शहर इसका प्रमुख उदाहरण हैं।

नीतू का हॉट शूट

बॉलिवुड में अपना मुकाम तलाश रहीं नीतू चंद्रा का हॉट फोटो शूट पिछले दिनों कैंसल हो गया। नीतू इसकी वजह जहां वहां इकट्ठी हुई भीड़ को बताती हैं।

वहीं कहा यह भी जा रहा है कि होटल मैनिजमंट ने मेहमानों की शिकायत के चलते शूट कैंसल करने को कहा। दरअसल , नीतू एक मैगजीन के लिए इस शूट को करवा रही थीं और इसके लिए उन्होंने बिकनी पहनी थी। लेकिन जब वहां भीड़ जमा होने लगी , तो शूट को बीच में बंद करना पड़ा। तीन घंटे के इंतजार के बाद भी जब लोग वहां से नहीं हटे , तो नीतू वहां से चली गईं।





Speed Play PreviousNext

धूप से चार्ज होने वाला मोबाइल


आखिरकार वो टेक्नोलॉजी आ गई जो आपको मोबाइल फोन चार्ज करने की मुसीबत से छुटकारा दिला देगी। जापान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी शार्प ने एक ऐसा मोबाइल फोन आज यानी 19 मई को जापानी बाजार में उतारा जो धूप से चार्ज होता है।

सोलर पावर से चार्ज होने वाले इस फोन का नाम है मिरुमो। इस फोन को अगर आप धूप में 10 मिनट चार्ज करते हैं तो आप इससे एक मिनट कॉल कर सकते हैं।

ये एक हाइब्रिड पावर फोन है। यानी इसमें बिजली से चार्ज होने का भी ऑप्शन होगा। ये वैसी हालत में काम आएगा, जब फोन डिस्चार्ज हो जाए और कोई कॉल करनी हो। बस थोड़ी देर धूप में फोन को रखिए और कॉल कीजिए।

सोलर हाइब्रिड फोन की दूसरी खास बात है इसका बेहतरीन कैमरा। इसमें 8 मेगापिक्सेल का कैमरा है। इसके अलावा कई और तरह के फोन भी लॉन्च किए गए हैं। इसमें एक फोन वाटर प्रूफ है तो दूसरा 10 मेगापिक्सेल कैमरे से लैस।

Thursday, May 21, 2009

ग्रहों के भी दर्शन करेंगे मानसरोवर यात्री

नैनीताल [रमेश चन्द्रा]। कैलास मानसरोवर यात्रियों को इस बार आकाश गंगा के अलावा ग्रहों के दर्शन के साथ खगोलीय घटनाओं से भी रूबरू कराया जाएगा। अंतरिक्ष संस्था कास्मो सफारी दूरबीन के माध्यम से अंतरिक्ष के दर्शन कराएगी।

कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक कुर्वे ने बताया कि ब्रह्मांड के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि के चलते यह व्यवस्था की गई है। इसके लिए कास्मो सफारी द्वारा यात्रा मार्ग पर बागेश्वर व धारचूला में दूरबीनें लगाई गई है। अंतरिक्ष दर्शन के लिए यह दोनों स्थान बेहद उपयुक्त है। कास्मो सफारी के एस्ट्रोनामर संदीप निगम ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय खगोल वर्ष होने के चलते मानसरोवर यात्रियों के लिए अंतरिक्ष दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है।

इसके तहत पहली बार थ्रीडी स्पेस फिल्म शो का आयोजन किया जा रहा है। फिल्म के जरिए दर्शकों को अंतरिक्ष की रोचकता का ज्ञान हो सकेगा। इसके अलावा दूरबीन के जरिए ग्रहों को देखा जा सकेगा और उनके बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त नेब्यूला, तारा मंडल, चन्द्रमा को दूरबीन के जरिए देखा जा सकेगा।

निगम ने बताया कि खगोल दर्शन के लिए दो चरणों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा इस मार्ग से आदि कैलास, पिंडारी ग्लेशियर जाने वाले यात्री भी इसका लुत्फ उठा सकेंगे। उन्होंने बताया अंतरिक्ष के बारे में यात्रियों को विशेष जानकारी देने के लिए अहमदाबाद, महाराष्ट्र व कर्नाटक के खगोल वैज्ञानिक पहुंचेंगे। खगोल के कई अनसुलझे सवालों को जानने के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित होगा। ज्योतिष विज्ञान को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

Tuesday, May 12, 2009

लव लाइफ में 'जस्ट चिल'!

आज की भागदौड़ और टेंशन

से
भरी जिंदगी में बहुत से लोगों की लव लाइफ वीरान हो गई है। बेड पर जाने के ख्याल से ही उन्हें नींद आने लगती है। ऐसे ही लोगों की जिंदगी को खुशियों से आबाद करने के लिए हम एक्सपर्ट्स की सलाह से उन्हें खास टिप्स दे रहे हैं।

साइकॉलजिस्ट डॉ . पेट्रा बॉयनटन यूनिवर्सिटी कॉलिज , लंदन में लेक्चरर और सेक्स रिर्सचर हैं। उन्हें एजुकेशन की फील्ड में अचीवमंट्स के लिए अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। उनका कहना है , ' लव रिलेशनशिप का कनेक्शन दिमाग से होता है। अगर आपके ब्रेन में प्यार की तरंगें उठ रही हैं तो आप पार्टनर को पूरी तरह खुश कर सकते हैं। सच तो यह है कि प्यार में इंसान के रोम - रोम से संगीत निकलता है।

कुछ महिलाओं को लगता है कि वह अपनी फिजिकल अपीयरेंस से किसी पुरुष को अपनी ओर अट्रैक्ट नहीं कर सकतीं। ऐसी महिलाओं को सेल्फ कॉन्फिडेंस डिवेलप करने की जरूरत होती है।वह डांस या ड्रामा की क्लासेज जॉइन करके या एक्सरसाइज कर अपनी बॉडी को फिट और एनर्जी से भरपूर रख सकती हैं। बहुत सी लेडीज इतनी शर्मीली होती हैं कि अपने पार्टनर तक को मन की बात नहीं बता पातीं।

टेक योर टाइम

सारा नसीरजादेह अवॉर्ड विनिंग साइको थेरपिस्ट है और वह जिंदगी से हैरान - परेशान कपल्स की कांउसिलिंग से काफी मदद भी करते हैं।
टेंशन कैसी ?

फिजिकल रिलेशनशिप में सिर्फ प्यार के समंदर में डूबने की बात ही जेहन में रहनी चाहिए। इस समय दुनियादारी की किसी बात की कोई टेंशन नहीं रहनी चाहिए। पार्टनर की आलोचना और कमियों को बिल्कुल नजरअंदाज करना चाहिए। प्यार का सिर्फ एक ही मतलब नहीं होता। दरअसल यह समय पार्टनर की कंपनी को पूरी तरह एंजॉय करने का होता है।

नो टु अल्कोहल

अगर आप सोचते हैं कि अल्कोहल लेने से इस खास टाइम में ज्यादा मजा आएगा तो आप गलत हैं , बल्कि जरूरत से ज्यादा शराब पीने और धुआंधार सिगरेट फूंकने से आपकी परफॉर्मेंस पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। अल्कोहल और सिगरेट से नर्वस सिस्टम और ब्लड सर्कुलेशन पर भी बुरा असर पड़ता है।

हार्ट रेसिंग

पाउला हिल रिलेशनशिप साइकोथेरपिस्ट हैं। उनका कहना है कि फिजिकल रिलेशन बनाने से पहले अगर आप थके हुए या तनाव में हैं तो कोई एक्शन मूवी देख सकते हैं। पिलो फाइट कर सकते हैं या कॉफी की सिप लेने से भी आप खुद में नया जोश और ताजगी महसूस करेंगे। कई कपल्स बहुत ज्यादा थके होने के चलते फिजिकल रिलेशनशिप में इनवॉल्व नहीं हो पाते। आप चाहें तो एक कागज पर अपनी और पार्टनर की फीलिंग्स लिख सकते हैं। आप चाहें तो समय - समय पर एक्सपेरिमंट कर सकते हैं।

सेल्फ कॉन्फिडंस

अगर आपका कभी मन हो तो केवल अपने पार्टनर की खुशी की खातिर रिलेशनशिप में इनवॉल्व होकर देखिए। इससे आपका जोश और आत्मविश्वास दुगुना हो जाएगा।

चाइल्ड बर्थ

रशेल फॉक्स रिलेशनशिप काउंसिलर हैं। उनका कहना है , ' बच्चे के जन्म के बाद कपल्स की लव लाइफ में नया जोश और तरंग आती है। चाइल्ड बर्थ के बाद नर्वस सिस्टम ज्यादा सेंसेटिव हो जाता है। इससे कपल्स इमोशनली एक दूसरे के ज्यादा नजदीक आते हैं। इस दौरान आप चाहें तो अपना फेवरिट किरदार भी निभा सकते हैं। इससे लव लाइफ में चटपटा तड़का तो लगेगा ही।

रोल प्ले

पार्टनर के साथ आप खाली समय में कोई गेम भी खेल सकते हैं। यकीनन इस तरह का रोल निभाना चैलेंज होगा , लेकिन इससे सेल्फ एस्टीम भी बूस्ट अप होगी। पार्टनर से खुलकर बातें कीजिए , लेकिन बच्चों के बारे में नहीं।

गेट टॉकिंग

पार्टनर के साथ कम्यूनिकेशन की सभी लाइंस खोल दीजिए , फिर देखिए आपकी लाइफ में कैसे नई ताजगी आती है। अगर आप महसूस करते हैं कि आपकी बात पार्टनर नहीं सुनता तो लाइफ में कड़वाहट घुल सकती है। किसी तरह की टेंशन , चिंता , डर और इन सिक्यूरिटी को अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

धीरे - धीरे आगे बढि़ए

डॉ . कैथरीन हुड ने साइको सेक्सुएल हेल्थ में स्पेशलाइजेशन किया है। उनका कहना है कि प्यार में धीरे - धीरे आगे बढ़ना चाहिए। कभी जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। अगर स्पेशल टाइम में आपके सपनों में पार्टनर के अलावा कोई और भी है तो भी कोई हर्ज नहीं है। लाइफ में रोमैंस को जीवित रखना बहुत जरूरी है। जो कपल्स तरह - तरह के नुस्खे आजमाकर रोमांस को जिंदगी का पार्ट बनाए रखते हैं। वह ज्यादा खुश रहते हैं। इससे उन्हें गजब की एनर्जी तो मिलती ही है।